Punjab DIG Harcharan Singh Bhullar Case: 5 लाख रुपये की रिश्वत मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के रोपड़ रेंज के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उन पर शिकंजा कस दिया है। भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के गंभीर आरोपों में घिरे भुल्लर के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, जिससे उनके लिए आने वाले दिन और मुश्किल भरे हो सकते हैं।
सीबीआई जल्द दाखिल करेगी चार्जशीट
सीबीआई भुल्लर के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले में 15 दिसंबर से पहले चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अगले महीने से सीबीआई की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हो जाएगी।
इसके साथ ही, भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी सीबीआई की जांच अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने उनके सेक्टर 40 स्थित घर पर छापा मारा था, जहां से 7.5 करोड़ रुपये कैश, 2.5 किलो सोना और कई बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए थे। इन खुलासों के बाद सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का एक अलग मामला भी दर्ज किया था।
ईडी की एंट्री से बढ़ी मुश्किलें
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने भी हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। ईडी सीबीआई की एफआईआर के आधार पर भुल्लर के बैंक खातों, लेनदेन और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो भी इस मामले में अपनी जांच कर रहा है। इस तरह, भुल्लर वर्तमान में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अवैध संपत्ति से जुड़े मामलों में तीन प्रमुख एजेंसियों—सीबीआई, ईडी और पंजाब विजिलेंस ब्यूरो—की चौतरफा जांच का सामना कर रहे हैं।
कागजी कंपनी और बेनामी संपत्तियों का खुलासा
सीबीआई ने हाल ही में पंजाब के पटियाला, लुधियाना और जालंधर में पांच जगहों पर दबिश दी थी। इस दौरान मिले दस्तावेजों ने भुल्लर की बेनामी संपत्तियों का राज खोलना शुरू कर दिया है। जांच में यह बात सामने आई है कि भुल्लर ने कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के साथ गठजोड़ करके एक कागजी कंपनी खड़ी की और उसी के जरिए बेनामी संपत्तियां अर्जित कीं।
अदालत में उठे सवाल
इससे पहले, जब मामला अदालत में सामने आया था, तो भुल्लर के वकीलों ने सीबीआई की पंजाब रेड पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में, सीबीआई ने कोर्ट में पंजाब विजिलेंस की एफआईआर पर ही सवालिया निशान लगा दिए थे।
सीबीआई ने कोर्ट के ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा था कि विजिलेंस ने यह केस खुफिया सूचना मिलने के महज आधे घंटे बाद ही दर्ज कर लिया था। यहां तक कि जज ने भी सवाल पूछा था कि 30 साल के सर्विस रिकॉर्ड वाले डीआईजी की पूरी संपत्ति के बारे में विजिलेंस को आधे घंटे में ही कैसे यकीन हो गया कि वह आय से ज्यादा है।
जानें पूरा मामला
16 अक्टूबर को सीबीआई ने बिचौलिए कृष्ण शारदा के साथ डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि दोनों ने मंडी गोविंदगढ़ के स्क्रैप डीलर आकाश बत्ता से 8 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी।
हरचरण सिंह भुल्लर 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, जिनका जन्म 1967 में हुआ था। साल 2014 में उन्हें रोपड़ रेंज के आईजी की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले वे पटियाला रेंज और रूपनगर रेंज में डीआईजी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। इसी साल उन्होंने रोपड़ में ड्रग के खिलाफ अभियान को लीड करके सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने उनकी साख पर बट्टा लगा दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ सीबीआई 15 दिसंबर तक चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर बैंक खातों और संपत्तियों की जांच शुरू की है।
सीबीआई की छापेमारी में 7.5 करोड़ कैश, 2.5 किलो सोना और बेनामी संपत्ति के दस्तावेज मिले थे।
जांच में कागजी कंपनी के जरिए बेनामी संपत्ति बनाने का खुलासा हुआ है।








