Punjab Congress Delhi Meeting : पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह को सुलझाने के लिए गुरुवार को दिल्ली में हाईलेवल बैठक शुरू हो गई है। यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के “अपर कास्ट” वाले विवादित बयान के बाद पार्टी में जो सियासी तूफान उठा था, उसी पर लगाम लगाने के लिए हाईकमान ने सभी वरिष्ठ नेताओं को तलब किया है।
खरगे के आवास पर जुटे दिग्गज
इस अहम बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल मौजूद हैं। पंजाब से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी और विजय इंदर सिंगला समेत कई वरिष्ठ नेता पहुंचे हैं।
बैठक में पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर जारी विवाद पर नेताओं को कड़ा संदेश दिए जाने की संभावना है। अब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है और पार्टी किसी भी हाल में अंदरूनी कलह को बर्दाश्त नहीं करना चाहती।
क्या था चन्नी का विवादित बयान?
दरअसल, 17 जनवरी को कांग्रेस के एससी सेल की मीटिंग थी। इसमें पूर्व सीएम और जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी में सारे पद जट्ट सिख नेताओं को देने की बात कही थी।
चन्नी ने कहा था कि पंजाब में अगर आप मानते हैं कि 38% या 35% आबादी है, तो वह है ही, तो फिर हमें रिप्रेजेंटेशन क्यों नहीं मिल रही। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब कांग्रेस के प्रधान भी अपर कास्ट हैं, CLP लीडर भी अपर कास्ट हैं, पंजाब की महिला विंग प्रधान भी अपर कास्ट, पंजाब का जनरल सेक्रेटरी भी अपर कास्ट।
चन्नी ने कहा था कि “यार हम कहां जाएं, यह लोग कहां जाएंगे।” पहले तो चन्नी कहते रहे कि उन्होंने जट्ट सिखों के बारे में कुछ नहीं बोला, लेकिन बाद में इसका वीडियो वायरल हो गया।
राजा वड़िंग का चन्नी को करारा जवाब
चन्नी के बयान के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दोटूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 2 सीटों से चुनाव हारने के बावजूद कांग्रेस ने चन्नी को सांसद बनाया। रंधावा सीएम बनने वाले थे, लेकिन चन्नी को बनाया गया। उन्हें तो ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए।
राजा वड़िंग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि CWC का सबसे बड़ा पद होता है और उसके मेंबर चरणजीत चन्नी हैं। चन्नी तो ये बात कह ही नहीं सकते क्योंकि उनके पास तो सबसे बड़ा पद है।
चन्नी को मिले कई बड़े पद
राजा वड़िंग ने याद दिलाया कि जब चन्नी को CLP का नेता बनाया गया तो सुनील जाखड़ को हटाया गया था। चन्नी दोनों जगह से विधानसभा चुनाव हारे थे, फिर भी उन्हें जालंधर से सांसद बनाया गया।
इतना ही नहीं, चन्नी लोकसभा की एग्रीकल्चर कमेटी के भी चेयरमैन हैं। सुखजिंदर रंधावा मुख्यमंत्री बन रहे थे, लेकिन पार्टी ने चरणजीत चन्नी को सीएम बनाया।
राजा वड़िंग ने कहा कि दलित हमारे सिर का ताज हैं और रहेंगे। हमारी सेक्युलर पार्टी है। पंजाब सेक्युलर स्टेट है, यहां जात-पात नहीं है।
बीजेपी ने दिया पार्टी में शामिल होने का न्योता
जैसे ही चन्नी के बयान से राजनीति गरमाई, भारतीय जनता पार्टी भी इस मामले में कूद पड़ी। बीजेपी ने चन्नी को पार्टी में शामिल होने का न्योता दे दिया।
हालांकि चन्नी ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में रहेंगे और कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं। मैं किसी अन्य पार्टी के बारे में सोच भी नहीं सकता हूं।
2027 चुनाव की तैयारी पर असर
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं हैं। ऐसे में पार्टी के अंदर जाति के आधार पर उठे इस विवाद ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। हाईकमान नहीं चाहता कि चुनाव से पहले पार्टी में इस तरह की फूट पड़े।
आज की बैठक में संभावना है कि सभी नेताओं को एकजुट रहने और पार्टी की छवि खराब न करने का कड़ा संदेश दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर भी कोई फैसला हो सकता है।
आम पाठक पर असर
यह विवाद सिर्फ कांग्रेस का आंतरिक मामला नहीं है। पंजाब में जाति के आधार पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल हर आम नागरिक से जुड़ा है। अगर कांग्रेस अपनी अंदरूनी कलह को नहीं सुलझा पाई तो 2027 के चुनाव में इसका सीधा असर पार्टी के वोट बैंक पर पड़ सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- दिल्ली में खरगे के आवास पर पंजाब कांग्रेस की हाईलेवल बैठक शुरू
- चन्नी के “अपर कास्ट” बयान से पार्टी में विवाद गहराया
- राजा वड़िंग ने चन्नी को याद दिलाया कि दो बार हारने के बाद भी सीएम और सांसद बनाया गया
- बीजेपी ने चन्नी को पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया, चन्नी ने किया इनकार
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी एकजुटता पर जोर देगी हाईकमान








