पंजाब में कांग्रेस के फेरबदल के पीछे प्रशांत किशोर का हाथ? कैप्टन का साथ छोड़ने के बाद दिया था फीडबैक


चंडीगढ़, 20 सितंबर (The News Air)
दो दिन तक चली मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस्तीफ़ा लेकर चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का अगला सीएम चुन लिया है। हालांकि, चुनाव से ऐन वक़्त पहले चन्नी को नया सीएम बनाने से यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि आख़िर इस फ़ैसले से पार्टी को कितना फ़ायदा मिलेगा और क्या चन्नी वही करिश्मा बरक़रार रख पाएंगे जो कैप्टन अमरिंदर सिंह का था? हालांकि, इसका जवाब पार्टी को कुछ महीने पहले ही मिल चुका है और जवाब देने वाले शख़्स थे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर। पीके ने बीते महीने ही पंजाब सीएम के मुख्य सलाहकार पद से इस्तीफ़ा दिया था। हालांकि, अब बताया जा रहा है कि पीके के फीडबैक के आधार पर ही पंजाब में कांग्रेस ने यह बड़ा फेरबदल किया है।
प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच उन्होंने पंजाब के तत्कालीन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सलाहकार का पद छोड़ दिया था। सूत्रों के मुताबिक़, प्रशांत किशोर ने ही यह फीडबैक दिया था कि कांग्रेस आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी से पीछे रहने वाली है।
एक अन्य सूत्र ने बताया कि पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षणों में भी यह बात सामने आई कि पंजाब में कांग्रेस कमज़ोर पड़ती जा रही है और आगामी चुनावों में पार्टी मौजूदा सीटों के आधे पर भी जीत नहीं पाएगी। बता दें कि 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में कांग्रेस के पास फ़िलहाल 80 सीटें हैं।
बता दें कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर अभी तक कोई आखिरी फ़ैसला नहीं हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट्स में यह जरूर कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी में उन्हें कोई बड़ी भूमिका दी जा सकती है, मगर इस पर आखिरी फ़ैसला पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेना है। प्रशांत किशोर ने बीते महीने यानी 5 अगस्त को ही पंजाब सीएम के मुख्य सलाहकार पद से इस्तीफ़ा दिया था।
इसके अलावा गांधी परिवार को फ़ैसले लेने में शामिल न करना और पार्टी लाइन से अलग चलना भी कैप्टन को भारी पड़ा। हाल ही में जलियांवाला बाग़ के मेकओवर को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और इसे शहीदों का अपमान तक बताया था, जबकि कैप्टन ने इस बदलाव को अच्छा बता डाला था।
हालांकि, पार्टी सूत्रों की मानें तो कैप्टन को अपनी विदाई का संकेत 18 जुलाई को ही मिल गया था, जब उनकी नाराज़गी के बावज़ूद नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।


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