Knowledge Wisdom : नई दिल्ली में मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ज्ञान और विवेक पर आधारित एक प्रेरक संस्कृत सुभाषित साझा किया। 20 जनवरी 2026 को सामने आए इस संदेश में उन्होंने बताया कि अनंत जानकारी के दौर में मनुष्य को सार चुनने की कला सीखनी चाहिए। यह विचार आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में दिशा देने वाला माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री PIB Delhi द्वारा जारी विवरण के अनुसार, यह सुभाषित ज्ञान की विशालता, समय की कमी और जीवन की बाधाओं के बीच सही चयन पर केंद्रित है। संदेश में यह स्पष्ट किया गया कि हर उपलब्ध जानकारी उपयोगी नहीं होती, बल्कि सार को अपनाना ही वास्तविक बुद्धिमत्ता है।
‘ज्ञान का सार ही असली पूंजी’
प्रधानमंत्री ने जिस संस्कृत श्लोक को साझा किया, उसमें कहा गया है कि शास्त्र अनंत हैं, विद्याएँ अनेक हैं, लेकिन समय सीमित है और जीवन में बाधाएँ भी बहुत हैं। ऐसे में व्यक्ति को हंस की तरह होना चाहिए, जो दूध और पानी के मिश्रण से केवल दूध को अलग कर लेता है। यही प्रतीक यह सिखाता है कि अनावश्यक को छोड़कर सार ग्रहण करना चाहिए।
‘आज के डिजिटल युग के लिए सीधा संदेश’
यह संदेश ऐसे समय में आया है जब आम व्यक्ति सूचनाओं की बाढ़ से घिरा है। हर दिन सामने आने वाली खबरें, पोस्ट और जानकारियाँ भ्रम पैदा करती हैं। प्रधानमंत्री का यह विचार आम पाठक को यह समझाने की कोशिश करता है कि सीमित समय में सही ज्ञान चुनना ही जीवन को संतुलित बनाता है।
X पर साझा किया गया विचार
प्रधानमंत्री ने इस सुभाषित को X पर भी साझा किया। पोस्ट में वही श्लोक दोहराया गया, जिससे यह संदेश व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचा और चर्चा का विषय बना।
अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥ pic.twitter.com/exuoawjflX
— Narendra Modi (@narendramodi) January 20, 2026
विश्लेषण: क्यों अहम है यह संदेश
यह संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी है। आज जब हर व्यक्ति तेजी से निर्णय लेने के दबाव में है, तब यह विचार बताता है कि हर जानकारी पर प्रतिक्रिया जरूरी नहीं। सार को चुनने की क्षमता व्यक्ति को बेहतर निर्णय लेने, मानसिक शांति बनाए रखने और सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।
आम आदमी पर असर
इस संदेश का सीधा असर आम जीवन पर पड़ता है। छात्र हों या नौकरीपेशा लोग, सभी के लिए यह सीख है कि पढ़ाई, काम और सूचनाओं के बीच संतुलन बनाकर केवल उपयोगी बातों पर ध्यान दिया जाए।
जानें पूरा मामला
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह संस्कृत सुभाषित ज्ञान, समय और विवेक के संबंध को रेखांकित करता है। सीमित जीवन में अनावश्यक को त्यागकर सार को अपनाने का यह विचार भारतीय दर्शन की उस परंपरा को सामने लाता है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
मुख्य बातें (Key Points)
- प्रधानमंत्री ने ज्ञान के सार को अपनाने पर जोर दिया
- संस्कृत सुभाषित में समय की कमी और बाधाओं का उल्लेख
- अनावश्यक जानकारी छोड़ने की सीख
- डिजिटल युग में विवेकपूर्ण चयन का संदेश








