PM Modi Iran Israel War Statement: ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस संघर्ष पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। कनाडा के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में पीएम मोदी ने कहा: “पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए सभी विवादों के समाधान का समर्थन करता है।”
उन्होंने यह भी कहा: “जब दो लोकतंत्र साथ खड़े होते हैं तो शांति की आवाज और भी सशक्त हो जाती है।” यह बयान इस युद्ध पर भारत की आधिकारिक विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है।
‘भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता’
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत सभी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। वेस्ट एशिया में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं और युद्ध के बीच उनकी सुरक्षा भारत सरकार की सबसे बड़ी चिंता है। विशेष रूप से दुबई में फंसे भारतीयों और बंद एयरस्पेस की स्थिति को देखते हुए यह बयान और भी अहम हो जाता है।
‘नेतन्याहू से फोन पर हो चुकी है बात’
पीएम मोदी ने पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की थी। इसकी जानकारी पीएम मोदी ने खुद सोशल मीडिया पर दी थी। उन्होंने बताया था कि मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई, भारत की चिंताएं साझा की गईं, आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया और लड़ाई जल्द खत्म करने की जरूरत दोहराई गई।
‘UAE प्रेसिडेंट से बात: हमले की निंदा, वहां रहने वाले भारतीयों का रखें ध्यान’
UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अलनहयान से भी पीएम मोदी ने बातचीत की। उन्होंने UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और UAE का धन्यवाद किया कि वे वहां रहने वाले भारतीयों का ख्याल रख रहे हैं। पीएम ने कहा: “भारत इस मुश्किल वक्त में UAE के साथ है। हम तनाव कम करने, शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करते हैं।”
‘1 मार्च को रात 9:30 बजे हुई अहम सुरक्षा बैठक’
पीएम मोदी के नेतृत्व में 1 मार्च की रात 9:30 बजे एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक हुई। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, CDS और वित्त मंत्री शामिल रहे। बैठक में वेस्ट एशिया में रह रहे भारतीयों और वहां फंसे लोगों की सुरक्षा, हालात बिगड़ने की स्थिति में कार्रवाई और अन्य जरूरी मुद्दों पर चर्चा हुई।
‘भारत की स्थिति: न किसी के साथ, न किसी के खिलाफ’
पीएम मोदी का यह बयान भारत की परंपरागत “Strategic Autonomy” की नीति को दर्शाता है। भारत ने न अमेरिका-इजराइल का पक्ष लिया और न ईरान का। बातचीत और डिप्लोमेसी की वकालत करते हुए भारत ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ की भूमिका में पेश किया है। यह उसी भारत का रुख है जो रूस-यूक्रेन युद्ध में भी तटस्थ रहा था।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच जंग जारी है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई का निधन हो चुका है। वेस्ट एशिया का एयरस्पेस लगभग बंद है। दुबई समेत कई देशों में भारतीय फंसे हुए हैं। इस पूरे संकट के बीच पीएम मोदी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- PM मोदी ने ईरान-इजराइल युद्ध पर पहली बार सार्वजनिक बयान दिया: “बातचीत और डिप्लोमेसी से हो समाधान।”
- पश्चिम एशिया की स्थिति को भारत के लिए “गहरी चिंता का विषय” बताया।
- PM नेतन्याहू से फोन पर बात, लड़ाई जल्द खत्म करने की जरूरत दोहराई।
- UAE राष्ट्रपति से भी संपर्क, UAE पर हमलों की निंदा और भारतीयों की देखभाल के लिए धन्यवाद।
- 1 मार्च रात 9:30 बजे अमित शाह, राजनाथ सिंह और CDS के साथ उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक हुई।








