PM Kisan Nidhi Yojana 22nd Installment: बिहार के भागलपुर जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। यहाँ फर्जी तरीके से योजना का लाभ ले रहे 33,325 लोगों के नाम आधिकारिक लाभुक सूची से काट दिए गए हैं। यह कार्रवाई जिले भर में चलाए गए विशेष सत्यापन अभियान के बाद की गई है, जिसमें बड़े पैमाने पर अपात्र लोगों के योजना से जुड़े होने का खुलासा हुआ है। प्रशासन की इस सख्ती से उन किसानों में हलचल मच गई है जो अब भी जांच के घेरे में हैं।
गहन जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। प्रखंड स्तर पर की गई छानबीन के बाद संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गई थी। मुख्यालय स्तर पर सभी दस्तावेजों की पड़ताल के बाद यह पुष्टि हुई कि 33,325 लाभुक योजना का लाभ लेने के लिए पात्र ही नहीं थे। प्रशासन के अनुसार, यह सफाई अभियान आगे भी जारी रहेगा और जिले में अब भी करीब 1 लाख लाभुक किसान सवालों के घेरे में हैं।
क्यों कटे इतने सारे नाम? जानिए वजह
सत्यापन अभियान के दौरान पाई गई गड़बड़ियों ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पता चला कि नाम कटने वालों में सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिनके पास योजना का लाभ लेने की कोई पात्रता ही नहीं थी। आइए, इन आंकड़ों पर एक नज़र डालते हैं:
सरकारी नौकरी वाले लाभुक: सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह हुआ कि 24,318 ऐसे लोग योजना से जुड़े थे जो सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के नियमों के अनुसार, सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और आयकरदाता इसके दायरे में नहीं आते।
आयकरदाता भी थे शामिल: 3,911 लाभुक ऐसे पाए गए जो आयकरदाता (Income Tax Payee) हैं। यानी वे सालाना टैक्स दायरे में आने वाली आमदनी तो रखते हैं, लेकिन सरकारी योजना का लाभ भी उठा रहे थे।
मृतकों के नाम भी नहीं हटे: प्रशासन की लापरवाही का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया, जहां 3,571 ऐसे लाभुक मिले जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम से योजना की किस्तें जारी रहीं। इन सभी के नाम अब सूची से हटा दिए गए हैं।
फार्मर आईडी का बड़ा संकट: लाखों किसानों पर आफत
नाम कटने की यह कार्रवाई भले ही 33 हजार से अधिक लोगों की हुई हो, लेकिन असली चिंता जिले के बाकी किसानों को लेकर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भागलपुर जिले में पहले कुल 2,74,158 लाभुकों को पीएम किसान योजना का लाभ मिल रहा था। 33,325 नाम कटने के बाद अब यह संख्या घटकर 2,40,833 रह गई है।
लेकिन चिंता की बात यह है कि इन 2,40,833 शेष लाभुकों में से केवल 1,11,487 किसानों की ही फार्मर आईडी (Farmer ID) बन पाई है। यानी अब भी 1,29,346 किसानों की फार्मर आईडी बनना बाकी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनेगी, उनके खाते में आगे पीएम किसान योजना की राशि नहीं आएगी। साथ ही, वे अन्य सरकारी कृषि सुविधाओं और सब्सिडी से भी वंचित हो जाएंगे। यह स्थिति उन हजारों किसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जिन्होंने अब तक अपना पंजीकरण पूरा नहीं कराया है।
अब भी एक लाख किसान जांच के घेरे में
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह सफाई अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। जिले में करीब 1 लाख ऐसे लाभुक अब भी सवालों के घेरे में हैं, जिनके मामले संदिग्ध पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं:
कई लाभुक ऐसे हैं जो झारखंड (Jharkhand) में रहते हैं, लेकिन बिहार के कोटे से पीएम किसान का लाभ ले रहे हैं।
कुछ मामलों में लाभुक की मृत्यु के बाद भी उनके खाते में किस्तें जा रही हैं।
कई ऐसे लाभुक भी हैं जिनके पास सिर्फ दो डिसमिल जमीन है, और उनके नाम से जमीन की जमाबंदी (खतियान) ही मौजूद नहीं है।
कुछ किसानों के पास जमीन की जमाबंदी तो है, लेकिन उनके आधार कार्ड का नाम जमाबंदी के नाम से मेल नहीं खा रहा है।
इन सभी संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें अब घर-घर जाकर सत्यापन कर रही हैं। प्रशासन का यह प्रयास है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे, न कि किसी अयोग्य व्यक्ति तक।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
प्रशासन ने सभी लाभुक किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपना ईकेवाईसी (eKYC) और किसान पंजीकरण (Farmer Registration) पूरा करा लें। ऐसा न करने पर उन्हें अपात्र घोषित किए जाने का जोखिम है। यह सिर्फ पीएम किसान योजना ही नहीं, बल्कि भविष्य में मिलने वाली अन्य सरकारी कृषि सुविधाओं से भी वंचित कर सकता है। इसलिए, सभी किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी कृषि समन्वयक या सीएससी (CSC) सेंटर पर जाकर अपनी प्रक्रिया पूरी करा लें।
मुख्य बातें (Key Points)
बिहार के भागलपुर जिले में PM Kisan Yojana के 33,325 अपात्र लाभुकों के नाम काटे गए।
इनमें 24,318 सरकारी कर्मचारी, 3,911 आयकरदाता और 3,571 मृतक व्यक्ति शामिल हैं।
अब जिले में 2,40,833 लाभुक बचे हैं, जिनमें से 1,29,346 की फार्मर आईडी अब भी लंबित है।
बिना फार्मर आईडी के किसानों को आगे योजना की किस्त और अन्य सरकारी सुविधाएं नहीं मिलेंगी।
प्रशासन ने करीब 1 लाख अन्य संदिग्ध लाभुकों की भी जांच शुरू कर दी है।








