SKM Protest Flood Compensation : संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित राज्यों में “प्रशासनिक विफलता” को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला है। एसकेएम ने मुआवजे के लिए भौतिक सत्यापन न होने, ऋण माफी से वंचित करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को ‘विफल’ बताते हुए 4 नवंबर को देश भर में जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपने का ऐलान किया है।
4 नवंबर को DM को ज्ञापन, सत्यापन की मांग एसकेएम का आरोप है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में प्रशासन ने अभी तक लोगों को हुए नुकसान का डेटा भी सार्वजनिक नहीं किया है, जिसके बिना पीड़ितों को कभी मुआवजा नहीं मिल पाएगा। मोर्चा ने मांग की है कि नुकसान का आकलन करने के लिए भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाए।
इसके लिए एसकेएम 4 नवंबर को जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन सौंपेगा। मोर्चा ने अपने सदस्य संगठनों से भी पीड़ितों को एकजुट कर वास्तविक नुकसान के बराबर मुआवजे और कृषि श्रमिकों व बटाईदार किसानों को भी क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया है।
‘क्षतिग्रस्त मकान का मुआवजा 1.2 लाख? सरकार क्रूर’ किसान मोर्चा ने क्षतिग्रस्त पक्के मकानों के लिए घोषित मुआवजे की राशि को “क्रूर और असंवेदनशील” बताया है। एसकेएम ने कहा कि पंजाब में मात्र 1.2 लाख रुपये और उत्तराखंड में 0.95 लाख रुपये की मामूली राशि घोषित की गई है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश में 7 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की गई है।
आपदा प्रबंधन कानून में संशोधन पर भड़के किसान एसकेएम ने अप्रैल 2025 में आपदा प्रबंधन अधिनियम में किए गए संशोधनों की कड़ी निंदा की है। मोर्चा ने आरोप लगाया कि यह संशोधन मोदी-शाह सरकार की “संकीर्ण मानसिकता” को दर्शाता है और इसका उद्देश्य गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को ऋण माफी से वंचित करना है।
एसकेएम ने कहा कि यह संशोधन केरल उच्च न्यायालय के उस दबाव से बचने के लिए किया गया, जिसने वायनाड भूस्खलन (जिसमें 298 लोग मारे गए) के पीड़ितों को ऋण माफी देने का समर्थन किया था। मोर्चा ने इन संशोधनों को तुरंत निरस्त करने और वायनाड सहित पूरे भारत में बाढ़-भूस्खलन प्रभावित परिवारों के लिए तीन साल की पूर्ण ऋण माफी की मांग की है।
‘PM फसल बीमा योजना फेल, कंपनियों को 1 लाख करोड़ का मुनाफा’ मोर्चा ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को एक “बड़ी विफलता” और “कॉर्पोरेट-समर्थक” योजना करार दिया है। एसकेएम ने दावा किया कि 2017 से इस योजना में 2.83 लाख करोड़ रुपये (सब्सिडी + प्रीमियम) एकत्र किए गए, लेकिन केवल 1.80 लाख करोड़ रुपये ही वितरित किए गए।
आरोप है कि इससे किसानों की कीमत पर कॉर्पोरेट कंपनियों को “एक लाख करोड़ का भारी मुनाफा” हुआ है। एसकेएम ने PMFBY को समाप्त करने और LIC की तरह सार्वजनिक क्षेत्र में फसलों और पशुधन के लिए एक बीमा निगम स्थापित करने की मांग की है।
पराली पर उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं, नमी की सीमा बढ़े ज्ञापन में पराली जलाने के नाम पर किसानों के उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया जाएगा। एसकेएम ने स्पष्ट किया कि खेतों से पराली की गठरी हटाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और किसानों की गिरफ्तारी या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मोर्चा ने धान खरीद में नमी की सीमा 17% से बढ़ाकर 22% करने की मांग भी उठाई है।
क्या है पूरा मामला? इस साल (2025) मंथा चक्रवात सहित देश के कई राज्यों में आई अभूतपूर्व बाढ़ और भूस्खलन से फसलों, संपत्तियों और जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। एसकेएम का आरोप है कि केंद्र सरकार न तो इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर रही है और न ही वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा दे रही है। मोर्चा ने केंद्र से सभी प्रभावित राज्यों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है, जिसमें पंजाब के लिए 25,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
मुख्य बातें (Key Points):
- SKM ने बाढ़/भूस्खलन पीड़ितों को कम मुआवजे पर 4 नवंबर को DM को ज्ञापन देने का ऐलान किया।
- पंजाब में 1.2 लाख, उत्तराखंड में 0.95 लाख मुआवजे को ‘क्रूर’ बताया।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन कर ऋण माफी रोकने का आरोप लगाया।
- PM फसल बीमा योजना को ‘विफल’ बताकर रद्द करने और पराली पर उत्पीड़न रोकने की मांग की।
- धान खरीद में नमी की सीमा 17% से बढ़ाकर 22% करने की भी मांग रखी गई है।








