Pakistan Hanuman Temple : पाकिस्तान के कराची शहर में, जहां मुस्लिम आबादी का दबदबा है, वहीं एक ऐसा मंदिर है जो न सिर्फ आस्था का केंद्र है बल्कि इतिहास का ऐसा सच भी है जिसे न मिटाया जा सका और न नकारा जा सका।
इस्लामिक पाकिस्तान, मुस्लिम बहुल कराची और उसी शहर में शान से लहराता भगवान हनुमान का ध्वज—यह दृश्य अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। कराची के सोल्जर बाजार इलाके में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर आज भी पूजा-पाठ का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर कम से कम 1500 साल पुराना बताया जाता है और इसे पाकिस्तान की राष्ट्रीय विरासत का दर्जा मिला हुआ है।

कराची में मौजूद आस्था का केंद्र
Arab News की रिपोर्ट के अनुसार, यह पंचमुखी हनुमान मंदिर पाकिस्तान के उन गिने-चुने धार्मिक स्थलों में शामिल है, जिन्हें आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय धरोहर माना गया है। मुस्लिम बहुल देश में इस मंदिर का अस्तित्व अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है।
प्राकृतिक मानी जाती है हनुमान जी की मूर्ति
इस मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद हनुमान जी की प्रतिमा है। मान्यता है कि यह प्रतिमा इंसानों द्वारा बनाई गई नहीं, बल्कि प्राकृतिक और दिव्य स्वरूप में प्रकट हुई थी। हिंदू विश्वासों के अनुसार, ऐसी प्रतिमा दुनिया में कहीं और नहीं है।
भगवान राम के वनवास से जुड़ता है इतिहास
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्थान का संबंध भगवान राम के वनवास काल से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि सदियों पहले इसी स्थान पर यह दिव्य प्रतिमा मिली, जिसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ। यही कारण है कि यह स्थल सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक भी माना जाता है।

राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा
1994 में इस मंदिर को सिंध सांस्कृतिक विरासत संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक घोषित किया गया। यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि आज के पाकिस्तान की जमीन पर कभी हिंदू संस्कृति कितनी गहराई से मौजूद थी।
खुदाई में मिले सैकड़ों साल पुराने अवशेष
सितंबर 2019 में मंदिर के विस्तार के दौरान इतिहासकारों को चौंकाने वाली खोज मिली। परिसर से हनुमान, गणेश, माता वानर और शिवलिंग की करीब 300 साल पुरानी मूर्तियां बरामद हुईं। नेशनल म्यूजियम ऑफ पाकिस्तान के तत्कालीन निदेशक मोहम्मद शाह बुखारी ने इन मूर्तियों की प्राचीनता की पुष्टि की थी।
जमीन विवाद और कानूनी लड़ाई
Arab News के अनुसार, मंदिर की मूल जमीन 2609 स्क्वायर फुट थी, लेकिन समय के साथ इसका बड़ा हिस्सा अवैध कब्जे में चला गया। 2006 में कराची प्रशासन ने जमीन लौटाने का आदेश दिया, मगर कब्जाधारी नहीं हटे। अंततः 2012 में स्थानीय हिंदुओं और एमक्यूएम (MQM) की मदद से जीर्णोद्धार शुरू हुआ और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कुछ जमीन वापस मिली।
हिंदू अस्तित्व का प्रतीक
जहां पाकिस्तान में हिंदू आबादी लगातार घटती गई, वहीं पंचमुखी हनुमान मंदिर आज भी हिंदू अस्तित्व का प्रतीक बना हुआ है। कराची जैसे महानगर में हनुमान मंदिर और श्मशान घाट का मौजूद होना अपने आप में असाधारण सच्चाई है।
महाकुंभ तक पहुंची कराची की आस्था
फरवरी 2025 में प्रयागराज महाकुंभ में पाकिस्तान से भी श्रद्धालु पहुंचे। The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, कराची के पंचमुखी हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी रामनाथ मिश्रा भी महाकुंभ में शामिल हुए। वे पाकिस्तान से करीब 400 हिंदू और सिखों की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जन के लिए लेकर आए थे।
जानें पूरा मामला
करीब 97 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले देश में पंचमुखी हनुमान मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है। यह उस इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक विरासत की कहानी है, जो आज भी जिंदा है और पाकिस्तान की जमीन पर मौजूद उस सच की याद दिलाती है जिसे न इतिहास से मिटाया जा सकता है और न जमीन से।
मुख्य बातें (Key Points)
- कराची का पंचमुखी हनुमान मंदिर करीब 1500 साल पुराना
- मंदिर को पाकिस्तान की राष्ट्रीय विरासत का दर्जा
- हनुमान जी की प्रतिमा को प्राकृतिक और दिव्य माना जाता है
- 2019 में खुदाई के दौरान 300 साल पुरानी मूर्तियां मिलीं
- मंदिर आज भी हिंदू अस्तित्व और साझा विरासत का प्रतीक








