Operation Epic Fury Blunder के रूप में अमेरिका की वह जंग सामने आ रही है जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने 28 फरवरी को इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर शुरू किया था। महज दो हफ्ते में पूरी तस्वीर पलट चुकी है। जिस अमेरिका ने “कुछ ही घंटों में जीत” का दावा किया था, वही अब सीजफायर की बात कर रहा है। दूसरी तरफ ईरान, जिसकी पूरी शीर्ष नेतृत्व (टॉप लीडरशिप) को तबाह कर दिया गया था, वह न सिर्फ टिका हुआ है बल्कि अब अमेरिका पर शर्तें थोप रहा है। स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज पूरी तरह बंद है, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है और खाड़ी देश अमेरिका से नाराज़ हैं कि उन्हें इस जंग में घसीटा गया।
योजना में ही थी सबसे बड़ी गलती: होर्मुज को लेकर कोई प्लान ही नहीं था
इस Operation Epic Fury Blunder की जड़ें योजना बनाने के चरण में ही दिखने लगती हैं। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों की गणना बिल्कुल साफ थी: ईरान की शीर्ष नेतृत्व को खत्म करो, ईरान अंदर से ढह जाएगा, विपक्ष सड़कों पर उतरेगा, तख्तापलट होगा और अमेरिका चुपचाप अपनी कठपुतली सरकार बिठा देगा। साथ ही ईरान का तेल अमेरिका के हाथ में आ जाएगा।
लेकिन व्हाइट हाउस से अब लगातार लीक हो रही रिपोर्ट्स पुष्टि कर रही हैं कि ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) ने ईरान की इस क्षमता को गंभीरता से लिया ही नहीं कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को बंद कर सकता है। पेंटागन में इस सबसे खराब स्थिति (वर्स्ट-केस सिनेरियो) को गौण (सेकेंडरी) प्राथमिकता पर रख दिया गया। दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट, जो ईरान की सीमा से लगकर गुजरता है, उस पर ईरान क्या करेगा इसकी गणना करना “वैकल्पिक” (ऑप्शनल) मान लिया गया।
एक गोपनीय कांग्रेसनल ब्रीफिंग (Classified Congressional Briefing) में ट्रंप प्रशासन ने यह स्वीकार भी किया कि अगर होर्मुज बंद हो जाए तो उसे दोबारा खोलने का अमेरिका के पास कोई ठोस प्लान नहीं है। उनकी सोच यह थी कि होर्मुज बंद करना ईरान के लिए खुद ज्यादा नुकसानदेह होगा, इसलिए वह ऐसा नहीं करेगा। लेकिन ईरान ने चीन के लिए होर्मुज खुला रखा और चीन से तेल का पैसा बटोरता रहा, जबकि बाकी दुनिया को तड़पाता रहा।
ईरान वेनेज़ुएला नहीं निकला: तख्तापलट की उम्मीद धरी रह गई
Operation Epic Fury Blunder का सबसे बड़ा चेहरा यह है कि अमेरिका ने ईरान को वेनेज़ुएला समझ लिया। अमेरिकी विशेषज्ञ अब खुद मान रहे हैं कि ईरान में सरकार गिराना पहले से और मुश्किल हो गया है। नेतृत्व खत्म करने से ईरान टूटा नहीं, बल्कि और एकजुट हो गया।
ठीक वैसे ही जैसे चार साल पहले रूस ने यूक्रेन पर तीन तरफ से हमला किया था। राष्ट्रपति पुतिन की गणना थी कि यूक्रेन जल्दी समर्पण कर देगा, त्वरित जीत मिलेगी। इसीलिए पुतिन ने इसे “युद्ध” भी नहीं कहा, “विशेष सैन्य अभियान” बताया। चार साल बाद भी वह अभियान जारी है और ज़ेलेंस्की ने समर्पण नहीं किया। लगता है अमेरिका ने इस कहानी से कुछ नहीं सीखा।
14 दिनों के बाद अमेरिकी विशेषज्ञ अब खुलेआम कह रहे हैं कि Operation Epic Fury दरअसल “Operation Epic Blunder” बन चुका है। युद्ध के घोषित लक्ष्य हासिल नहीं हुए। उल्टा पूरी दुनिया में तेल और तेल उत्पादों के लिए हाहाकार मच गया है।
नया सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनई: बदले की आग में जलता नेतृत्व
इस Operation Epic Fury Blunder का सबसे बड़ा बैकफायर ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनई की नियुक्ति हो सकता है। ये अयातुल्लाह अली खामेनई के बेटे हैं और IRGC (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के करीबी माने जाते हैं। अमेरिका और इजराइल ने उनके पूरे परिवार को तबाह कर दिया है और अब वह बदला लेने पर तुले हुए हैं।
अपने पहले ही संबोधन में मोजतबा खामेनई ने साफ कर दिया कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने खाड़ी देशों को सीधी चेतावनी दी है कि अपनी जमीन से अमेरिकी सैन्य अड्डे तुरंत हटाओ, वरना ईरान उन्हें निशाना बनाता रहेगा। ईरान सीधे अमेरिका से नहीं लड़ सकता, लेकिन वह अमेरिका की आर्थिक रीढ़ तोड़ने में लगा है और उसके सहयोगियों में दरार डालने की कोशिश कर रहा है।
ईरान की तीन कड़ी शर्तें: सीजफायर चाहिए तो पहले ये करो
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस Operation Epic Fury Blunder के बीच सीजफायर की बात अमेरिका कर रहा है, ईरान नहीं। ईरान के राष्ट्रपति ने सीजफायर के लिए तीन सख्त शर्तें रखी हैं। पहली: ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए, जिसका मतलब है कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु क्षमता विकास के अधिकार को स्वीकार किया जाए। दूसरी: अमेरिका को युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई (वॉर रेपरेशंस) देनी होगी। तीसरी: भविष्य में ऐसे किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी चाहिए, और वो भी लिखित में।
ईरान की सेना अमेरिका के आगे कुछ भी नहीं है। लेकिन देखिए, वह अब भी अमेरिका से ताकत की स्थिति (पोजिशन ऑफ स्ट्रेंथ) से बात कर रहा है। नया सुप्रीम लीडर पहले ही ऐलान कर चुका है कि ईरान के मिनब शहर में जो निर्दोष लड़कियां मारी गईं, उसका बदला लिया जाएगा। ईरान ने साफ कह दिया है: न कोई समझौता, न कोई बातचीत। अगर शर्तें मानो तो ठीक, वरना ईरान नए मोर्चे खोलने को तैयार है, ऐसे मोर्चे जिनकी ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की थी।
अमेरिकी सेना को भारी नुकसान: 170 सैनिक घायल, 12 की मौत, अरबों का खर्चा
Operation Epic Fury Blunder की असली कीमत अमेरिकी सैनिकों ने चुकाई है। अमेरिकी मीडिया अब रोज़ाना ट्रंप प्रशासन की पोल खोल रहा है। ताज़ा खुलासों के अनुसार ईरानी हमलों में कम से कम 170 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। इन गंभीर रूप से घायल सैनिकों को चुपचाप, बिना किसी की जानकारी के जर्मनी ले जाकर इलाज कराया गया। 12 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
मिडिल ईस्ट में लगभग सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों पर अब तक हमले हो चुके हैं। शुरुआती दिनों में ही अमेरिका को 20 अरब डॉलर से ज्यादा का खर्चा उठाना पड़ा है। अरबों डॉलर की एयर डिफेंस और रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त या निष्क्रिय हो चुके हैं। सालों में जमा किए गए गोला-बारूद के भंडार खत्म हो रहे हैं।
पहले F-15 फाइटर जेट गिरे, फिर थाड (THAAD) रडार तबाह हुए, अब KC-135 स्ट्रैटोटैंकर क्रैश हो गया जिसमें चार अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। अमेरिका कह रहा है कि यह “दुर्घटना” थी, लेकिन इराक में एक ईरान समर्थित गुट ने दावा किया है कि उसने इस विमान को मार गिराया। तीन F-15 को “फ्रेंडली फायर”, KC-135 को “मिड-एयर कलीज़न” और MQ-9 ड्रोन को “तकनीकी खराबी” बताया जा रहा है। IRGC ने तो यहां तक दावा किया है कि उसकी बैलेस्टिक मिसाइलों ने USS अब्राहम लिंकन को भी हिट किया है, हालांकि अमेरिका ने इसे बार-बार नकारा है।
होर्मुज बंद, तेल 100 डॉलर, खाड़ी देश नाराज़: वैश्विक आर्थिक तबाही
Operation Epic Fury Blunder का सबसे विनाशकारी असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से तेल का प्रवाह पूरी तरह रुक गया है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। टैंकर चल नहीं पा रहे। शिपिंग कंपनियां अपने लोगों और संपत्ति को और जोखिम में नहीं डालना चाहतीं। ईरान ने होर्मुज से गुज़रने की कोशिश करने वाले तीन अलग-अलग जहाजों को आग लगा दी है और साफ कर दिया है कि वह सिर्फ होर्मुज ही नहीं, किसी भी वैकल्पिक मार्ग को भी बंद करेगा।
अमेरिकी नौसेना ने शिपिंग इंडस्ट्री को बता दिया है कि वह टैंकरों को एस्कॉर्ट करने में असमर्थ है। अमेरिका के ऊर्जा सचिव (एनर्जी सेक्रेटरी) ने खुद CNBC पर पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना तैयार नहीं है: सैन्य संपत्तियां ईरान की क्षमताओं को नष्ट करने में लगी हुई हैं और व्यापार मार्गों की सुरक्षा अभी प्राथमिकता नहीं है।
खाड़ी देशों का अमेरिका से मोहभंग: अरबों डॉलर निकालने की तैयारी
इस Operation Epic Fury Blunder ने अमेरिका और खाड़ी देशों के दशकों पुराने रिश्तों में दरार डाल दी है। सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत: ये चारों बड़ी GCC अर्थव्यवस्थाएं अब अमेरिका में अपने खरबों डॉलर के निवेश (सॉवरेन वेल्थ फंड्स) की समीक्षा शुरू कर चुकी हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक 15 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।
ये वही देश हैं जो सालों से अपनी सुरक्षा अमेरिका को आउटसोर्स करते आए हैं। लेकिन अब अमेरिका उनके एयरपोर्ट, बंदरगाह और तेल प्रतिष्ठान नहीं बचा पा रहा। रॉयटर्स के अनुसार खाड़ी देशों में अमेरिका के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है क्योंकि यह युद्ध भले ही अमेरिका या इजराइल ने शुरू किया हो, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान खाड़ी देशों को हो रहा है। वे अपना तेल और गैस बेच नहीं पा रहे। अमेरिका इजराइल को बचाने में इतना व्यस्त है कि खाड़ी देशों को किसी मिसाइल हमले से बचाने पर ध्यान ही नहीं दे पा रहा।
ट्रंप की हताशा: रूस से तेल खरीदो, फाल्स फ्लैग का डर
Operation Epic Fury Blunder के बीच ट्रंप प्रशासन हताशा में ऐसे कदम उठा रहा है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। जिस रूस पर सालों से प्रतिबंध (सेंक्शन्स) लगाए जा रहे थे, जिसकी वजह से भारत पर टैरिफ लगाए गए, अब पूरी दुनिया को कहा जा रहा है कि रूस से तेल खरीदो। यही रूस अमेरिका के खिलाफ यूक्रेन में लड़ रहा है और ईरान को अमेरिका के खिलाफ खुफिया जानकारी दे रहा है। अब इस युद्ध की बदौलत रूस एक महीने में 130 मिलियन बैरल तेल बेचकर मोटी कमाई करेगा।
लेकिन सबसे डरावना पहलू वह है जो अमेरिका के स्वतंत्र विश्लेषक बता रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी जनता के बीच एक कथानक (नैरेटिव) सेट करना शुरू कर दिया है कि ईरानी नेताओं ने अमेरिकी धरती पर एक “स्लीपर सेल” सक्रिय किया है और 9/11 जैसा हमला हो सकता है। अमेरिका में स्वतंत्र आवाज़ें पहले से कहने लगी हैं कि कोई फाल्स फ्लैग ऑपरेशन हो सकता है। एक आतंकी हमला और अमेरिका को ईरान में जमीनी सैनिक (बूट्स ऑन द ग्राउंड) भेजने का बहाना मिल जाएगा। सैनिक तैयार हैं, योजनाएं तैयार हैं, बस एक ट्रिगर चाहिए।
ईरान ने कैसे पलटा पासा: कमज़ोर ताकत ने ताकतवर को घुटनों पर लाया
Operation Epic Fury Blunder की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि दो हफ्ते पहले ईरान “विक्ट्री डिनायल स्ट्रैटेजी” अपना रहा था, यानी अगर अमेरिका से जीत नहीं सकते तो हार भी नहीं मानेंगे। लेकिन पिछले 24-48 घंटों में ईरान ने युद्ध रणनीति की किताब में नया अध्याय लिख दिया है।
ईरान ने दो बातें समझ ली हैं। पहली: वह दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, इसलिए इस आर्थिक उथल-पुथल से उसे उतनी दिक्कत नहीं होगी, लेकिन दुनिया यह युद्ध कुछ महीनों से ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। दूसरी: आज ईरान के पास भू-राजनीतिक और भौगोलिक दोनों फायदे हैं। अमेरिका ने ईरानी नेतृत्व और नागरिकों के साथ जो किया, उसके बाद ईरान को रोकने की स्थिति में कोई नहीं है। और अगर ईरान खुद यह युद्ध रोक दे तो इजराइल और अमेरिका को फिर से तैयारी करने और दोबारा हमला करने का मौका मिल जाएगा। इसीलिए ईरान चाहता है कि इस बार स्थायी समाधान निकले और अमेरिका उस पूरे क्षेत्र से बाहर हो।
ट्रंप के Truth Social पर बयान लगातार हताशा भरे होते जा रहे हैं। कभी वर्ल्ड कप खेलने आ रही ईरानी टीम को धमकी दे रहे हैं, कभी ईरानी नागरिकों की मौत का जश्न मना रहे हैं। इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां किसी देश के नेतृत्व ने अति-आत्मविश्वास में दूसरे देश को कम आंका और नतीजा हमेशा वही रहा: अपमान, आर्थिक तबाही और एक ऐसा युद्ध जो कितने साल चलेगा कोई नहीं जानता।
मुख्य बातें (Key Points)
- Operation Epic Fury को अमेरिकी विशेषज्ञ अब “Operation Epic Blunder” कह रहे हैं, ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज बंद होने का कोई प्लान नहीं बनाया था।
- ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनई ने सीजफायर के लिए तीन कड़ी शर्तें रखीं: परमाणु अधिकार की मान्यता, युद्ध मुआवजा और लिखित गारंटी।
- 170 अमेरिकी सैनिक घायल, 12 की मौत, 20 अरब डॉलर से ज्यादा का खर्चा, तेल 100 डॉलर प्रति बैरल, खाड़ी देश अमेरिका से नाराज़ और अरबों डॉलर निकालने की तैयारी में।
- ईरान ने पासा पलटा: अमेरिका सीजफायर मांग रहा है, ईरान शर्तें रख रहा है, होर्मुज बंद है, ईरान नए मोर्चे खोलने को तैयार है।








