Om Birla No Confidence Motion को लेकर संसद का माहौल पूरी तरह गरमा गया है। बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश कर दिया है। इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से यह जानकारी सामने आने के बाद संसद के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज हो गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब बजट सत्र के 10वें दिन लोकसभा में प्रश्नकाल तक नहीं चल पाया और कार्यवाही लगातार हंगामे की भेंट चढ़ती रही।
कांग्रेस ने क्यों खोला स्पीकर के खिलाफ मोर्चा
कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश कर संसद की परंपराओं में एक बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने मीडिया को बताया कि इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
विपक्ष का आरोप है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही और विपक्ष की आवाज को बार-बार दबाया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते स्पीकर के खिलाफ यह असाधारण कदम उठाया गया है।
बजट सत्र का 10वां दिन, सवालों का समय बेकार
मंगलवार को बजट सत्र का 10वां दिन था, लेकिन लोकसभा में प्रश्नकाल नहीं चल सका। सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।
महज एक मिनट के भीतर ही चेयर पर मौजूद P C Mohan ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। यह कदम इस बात का संकेत था कि हालात कितने असहज हो चुके हैं।
स्थगन के बाद भी नहीं थमा हंगामा
12 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। नारेबाजी और शोरगुल के बीच कामकाज संभव नहीं हो पाया। हालात बिगड़ते देख एक बार फिर लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
लगातार हो रहे स्थगनों ने यह साफ कर दिया कि बजट जैसे अहम मुद्दे पर भी चर्चा ठप पड़ी हुई है, जिससे सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
किरण रिजिजू की अपील, विपक्ष नहीं माना
हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने विपक्षी सांसदों से भावुक अपील की। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि बजट पर चर्चा होने दी जाए, क्योंकि इससे सभी का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि रोज-रोज के हंगामे से संसद का कामकाज ठप हो रहा है और देश के अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही। हालांकि विपक्ष ने उनकी अपील पर कोई नरमी नहीं दिखाई।
राहुल गांधी और बुक कंट्रोवर्सी ने बढ़ाई गर्मी
लोकसभा के बाहर भी सियासी बयानबाजी तेज रही। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने एक बुक विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि या तो पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या फिर पेंग्विन पब्लिशर्स, जिसने उस किताब को छापा है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि पूर्व सेना प्रमुख झूठ नहीं बोलेंगे। सरकार की ओर से पलटवार करते हुए कहा गया कि जो किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई, उस पर राहुल गांधी कैसे टिप्पणी कर सकते हैं।
अविश्वास प्रस्ताव का सियासी मतलब
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना भारतीय संसदीय इतिहास में बेहद दुर्लभ माना जाता है। आमतौर पर अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ लाया जाता है, न कि स्पीकर के खिलाफ।
इस कदम से यह साफ हो गया है कि विपक्ष सरकार के साथ-साथ सदन के संचालन को लेकर भी आक्रामक रुख अपना चुका है। कांग्रेस और सहयोगी दल इस मुद्दे को लोकतंत्र और संसदीय मर्यादाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
सरकार की रणनीति और आगे की राह
सरकार की ओर से फिलहाल यह संकेत दिए जा रहे हैं कि वह बजट सत्र को सुचारु रूप से चलाना चाहती है। लेकिन विपक्ष का रुख कड़ा बना हुआ है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किया जाएगा और इस पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अगर यह प्रस्ताव चर्चा के लिए आता है, तो संसद में राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।
बजट 2026 पर संकट के बादल
बजट सत्र के दौरान बार-बार हो रहे हंगामों का सीधा असर Budget 2026 पर चर्चा पर पड़ रहा है। सरकार जहां आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष अपने मुद्दों पर बहस की मांग कर रहा है।
अगर यह टकराव जारी रहा, तो संसद का समय बर्बाद होने के साथ-साथ कई अहम विधायी कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
क्या है पूरा मामला
कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। यह कदम बजट सत्र के बीच उठाया गया है, जब सदन पहले से ही हंगामों से जूझ रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि यह मामला संसद में किस दिशा में आगे बढ़ता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस
- 118 सांसदों के हस्ताक्षर, कांग्रेस ने किया पेश
- बजट सत्र के 10वें दिन प्रश्नकाल नहीं चल सका
- हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित








