No Confidence Motion Against Om Birla को लेकर संसद भवन से बड़ी सियासी हलचल सामने आई है। बजट सत्र के दौरान लगातार बढ़ती तनातनी के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहे और विपक्षी नेताओं की आवाज दबाई जा रही है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब संसद का बजट सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा समय पर शुरू नहीं हो सकी और लोकसभा में प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित कराना पड़ा।
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष का आरोप
विपक्ष की ओर से राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता खुलकर स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि जब भी राहुल गांधी या अन्य विपक्षी सांसद सदन में बोलने के लिए खड़े होते हैं, स्पीकर बार-बार टोका-टोकी करते हैं और उनकी बात पूरी नहीं होने दी जाती।
विपक्ष का दावा है कि यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। इसी नाराजगी के चलते अब अविश्वास प्रस्ताव लाने पर लगभग सभी विपक्षी दल सहमत हो चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक सहमति बन चुकी है
विपक्षी सूत्रों के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सहमति बन गई है और जल्द ही लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपा जा सकता है। हालांकि अभी प्रस्ताव पर सांसदों के हस्ताक्षर होना बाकी है, लेकिन किसी भी समय विपक्षी सांसद बैठक कर इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि INDIA गठबंधन के पास लोकसभा में करीब 240 सांसदों का समर्थन है, जो इस प्रस्ताव के लिए जरूरी संख्या से कहीं अधिक है।
बजट सत्र में क्यों बढ़ा विवाद
पूरे बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला है। चीन, डोकलाम और पूर्व सैन्य अधिकारियों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठे, जिस पर स्पीकर की टिप्पणियों से विपक्ष असहज हुआ। कई मौकों पर कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और सदन का माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
एक घटना में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के बयान के बाद हालात इतने बिगड़े कि विपक्षी सांसदों ने कागज उछाल दिए। इसके बाद आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई।
निलंबन के बाद सड़क पर उतरा विपक्ष
सांसदों के निलंबन के बाद सदन के बाहर भी राजनीतिक माहौल गरमा गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता निलंबित सांसदों के समर्थन में धरने पर बैठे। विपक्ष का कहना है कि यह सब स्पीकर के पक्षपातपूर्ण फैसलों का नतीजा है।
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया क्या है
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विपक्ष को लोकसभा महासचिव को लिखित नोटिस देना होता है। इस प्रस्ताव पर कम से कम 100 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। विपक्ष के पास संख्या बल मौजूद है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सभी सांसद इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करते हैं या नहीं।
राजनीतिक संदेश और असर
अगर विपक्ष वास्तव में अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो यह दूसरे कार्यकाल में स्पीकर की कुर्सी संभाल रहे ओम बिरला के कामकाज पर सीधा सवाल खड़ा करेगा। भले ही प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम हो, लेकिन यह कदम सरकार और स्पीकर दोनों के लिए सियासी दबाव बढ़ा सकता है।
आम जनता के लिए क्या मायने
संसद में लगातार हंगामे और टकराव का असर कानून निर्माण और जनहित के मुद्दों पर पड़ता है। अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी से साफ है कि आने वाले दिनों में संसद का सियासी तापमान और बढ़ सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में
- राहुल गांधी समेत विपक्ष ने पक्षपात के आरोप लगाए
- बजट सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ा
- प्रस्ताव के लिए विपक्ष के पास पर्याप्त सांसदों का समर्थन








