NIFT Conference 2026: 23 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) के मुंबई परिसर में NIFT International Conference 2026 का सफल समापन हुआ। “Design for Inclusive Futures” विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह चर्चा के केंद्र में रहा कि डिज़ाइन किस तरह समानता, सुगम्यता और सामाजिक प्रभाव का मजबूत माध्यम बन सकता है। दूसरे और अंतिम दिन नीति, शिक्षा, तकनीक और पारंपरिक शिल्प के बीच तालमेल पर गहन विमर्श हुआ।
सम्मेलन के दौरान मुख्य भाषणों, तकनीकी सत्रों, आमंत्रित शोध पत्रों और प्रभावशाली पैनल चर्चाओं के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भविष्य का डिज़ाइन केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उसे समावेशी और मानव-केंद्रित होना होगा।
शिल्प विरासत को मिला वैश्विक मंच
दो दिवसीय सम्मेलन के अंतर्गत वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के सहयोग से एक शिल्प प्रदर्शन-सह-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर के शिल्प क्लस्टरों से आए 32 हथकरघा और हस्तशिल्प कारीगरों ने लाइव प्रदर्शन प्रस्तुत किए।
गोंड पेंटिंग, पैठाणी साड़ी बुनाई, इकत वस्त्र, माहेश्वरी टेक्सटाइल, एप्लीके और कच्छ की बांधनी जैसी पारंपरिक कलाओं ने यह दिखाया कि भारतीय शिल्प न केवल सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि सतत और समावेशी डिज़ाइन के मजबूत आधार भी हैं। इस मंच ने कारीगरों, डिज़ाइनरों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच जीवंत संवाद को बढ़ावा दिया।
समावेशी डिज़ाइन पर विशेषज्ञों की स्पष्ट राय
अपने मुख्य संबोधन में डॉ. नूपुर आनंद, संकायाध्यक्ष, NIFT, ने सुगम्यता को डिज़ाइन का मूल सिद्धांत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दिव्यांगता और आयु-संबंधी जरूरतों को सीमाओं की बजाय नवाचार के अवसर के रूप में देखने की बात कही और मानव-केंद्रित शिक्षा को भविष्य की कुंजी बताया।
AI, Universal Design और सामाजिक लागत पर चर्चा
दिन की शुरुआत मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी से जुड़े जलज होरा के मुख्य भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने फैशन और डिज़ाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सार्थक उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि AI का उद्देश्य मानव रचनात्मकता को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उसे सशक्त बनाना होना चाहिए।
इसके बाद एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने यूनिवर्सल डिज़ाइन को एक अनिवार्य सिद्धांत बताया। उन्होंने दिव्यांग व्यक्तियों को डिजिटल और वित्तीय मुख्यधारा से बाहर रखने की सामाजिक और आर्थिक लागतों की ओर ध्यान दिलाया।
डिज़ाइन शिक्षा में भारत की वैश्विक भूमिका
सम्मेलन का समापन डॉ. रूपा अग्रवाल, सम्मेलन अध्यक्ष, NIFT, के समापन सत्र के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि NIFT International Conference 2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत न केवल डिज़ाइन शिक्षा में, बल्कि समावेशी और सामाजिक रूप से प्रभावशाली डिज़ाइन के वैश्विक विमर्श में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।
विश्लेषण
NIFT International Conference 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य का डिज़ाइन केवल उत्पाद या फैशन तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक समानता, सांस्कृतिक निरंतरता और तकनीकी नवाचार का साझा मंच है। शिल्प विरासत, AI और यूनिवर्सल डिज़ाइन को एक साथ जोड़कर NIFT ने यह संदेश दिया कि भारत का डिज़ाइन इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर दिशा तय करने की क्षमता रखता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- मुंबई में NIFT International Conference 2026 का सफल समापन
- समावेशी डिज़ाइन और सुगम्यता पर वैश्विक विशेषज्ञों का फोकस
- 32 कारीगरों ने भारतीय शिल्प विरासत का लाइव प्रदर्शन किया
- AI, यूनिवर्सल डिज़ाइन और सामाजिक प्रभाव पर गहन चर्चा








