Maharaja Ranjit Singh AFPI Entrance Exam. पंजाब के युवाओं में सेना की वर्दी पहनने और देश सेवा करने का जुनून किस कदर हावी है, इसकी एक शानदार तस्वीर रविवार को देखने को मिली। मोहाली स्थित प्रतिष्ठित महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सिज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट (MRSAFPI) में दाखिला लेने के लिए एक-एक सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला। मात्र 48 सीटों के लिए 3,000 से अधिक उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, जो यह बताता है कि पंजाब के हर घर में आज भी एक ‘फौजी’ अफसर बनने का सपना पल रहा है।
एक सीट के लिए 67 दावेदार
रविवार को मोहाली, जालंधर और बठिंडा के परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही छात्रों की चहल-पहल थी। मौका था संस्था के 16वें कोर्स के लिए आयोजित दाखिला परीक्षा का। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कुल 3,256 लड़के इस परीक्षा में बैठे। संस्थान में केवल 48 सीटें हैं, जिसका मतलब है कि एक सीट पाने के लिए औसतन 67 से ज्यादा छात्रों के बीच कड़ी टक्कर है। यह परीक्षा सी-डैक (C-DAC) द्वारा आयोजित करवाई गई थी।
मान सरकार का ‘ऑपरेशन अफसर’
पंजाब के रोजगार उत्पत्ति और प्रशिक्षण विभाग के कैबिनेट मंत्री Aman Arora की देखरेख में चल रही इस संस्था ने पिछले कुछ सालों में बेहतरीन नतीजे दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान इस संस्था का रिकॉर्ड शानदार रहा है।
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इस दौरान 100 कैडेट्स ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) या समकक्ष अकादमियों में जगह बनाई है।
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सबसे गर्व की बात यह है कि 84 कैडेट्स अपनी ट्रेनिंग पूरी कर भारतीय सेना में ‘कमीशंड अफसर’ (Commissioned Officers) बन चुके हैं।
चयन प्रक्रिया: अभी तो यह पहली सीढ़ी है
संस्था के निदेशक मेजर जनरल Ajay H. Chauhan (सेवानिवृत्त) ने बताया कि यह परीक्षा महज पहला चरण है। परीक्षा चार केंद्रों पर आयोजित की गई:
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स्कूल ऑफ एमिनेंस (फेज़-11, मोहाली)
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स्कूल ऑफ एमिनेंस (फेज़-3बी1, मोहाली)
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पुलिस डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, जालंधर
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लॉर्ड रामा पब्लिक स्कूल, बठिंडा
मेजर जनरल चौहान के अनुसार, इस लिखित परीक्षा के नतीजों के आधार पर Top 150 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के बाद इन 150 छात्रों को इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। अंत में, सबसे योग्य 48 उम्मीदवारों को दो साल के कठिन और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा।
आम परिवार के बच्चों के लिए सुनहरा मौका
इस खबर का सबसे बड़ा असर उन मध्यमवर्गीय और साधारण परिवारों पर है जिनके बच्चे सेना में अफसर बनने का सपना देखते हैं लेकिन महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। यह सरकारी संस्थान चुने गए छात्रों को न केवल अकादमिक पढ़ाई करवाता है, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है और लीडरशिप स्किल सिखाकर सीधे NDA में भेजने के लिए तैयार करता है।
संपादकीय विश्लेषण: पंजाब की मिट्टी और सेना का रिश्ता
पंजाब और फौज का रिश्ता बहुत पुराना और गहरा है। 3,256 छात्रों का एक प्रवेश परीक्षा के लिए उमड़ना यह साबित करता है कि ड्रग्स और पलायन की खबरों के बीच, पंजाब का एक बड़ा युवा वर्ग आज भी अनुशासन और देशप्रेम के रास्ते पर चलना चाहता है। महाराजा रणजीत सिंह इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान इन युवाओं को सही दिशा दे रहे हैं। 84 अफसरों का बनना यह बताता है कि अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो पंजाब के युवा किसी से कम नहीं हैं। सरकार को ऐसे और संस्थानों की स्थापना पर विचार करना चाहिए।
जानें पूरा मामला (Background)
महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सिज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट, मोहाली पंजाब सरकार का एक प्रमुख संस्थान है। इसका मुख्य उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के माध्यम से सेना में स्थायी कमीशन के लिए तैयार करना है। यहां छात्रों को 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के साथ-साथ सेना भर्ती की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
मुख्य बातें (Key Points)
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MRSAFPI के 16वें कोर्स की 48 सीटों के लिए 3,256 छात्रों ने परीक्षा दी।
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सीएम Bhagwant Mann के कार्यकाल में संस्था के 84 छात्र सेना में अफसर बने।
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टॉप 150 छात्रों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, जिनमें से 48 का चयन होगा।
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परीक्षा का आयोजन मोहाली, जालंधर और बठिंडा में किया गया।








