NCERT Supreme Court Controversy 2026 — देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब में शामिल “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” नामक अध्याय पर कड़ी आपत्ति जताई है। CJI सूर्यकांत ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने का एक “सोचा-समझा कदम” बताते हुए इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेने की बात कही। यह विवाद मंगलवार को उस वक्त सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को इस बारे में अवगत कराया।
NCERT किताब में क्या लिखा है जो बना विवाद का केंद्र?
NCERT Class 8 Judiciary Corruption Chapter असल में उस नए संस्करण में जोड़ा गया है जो पहले की किताब में था ही नहीं। पुराने संस्करण में छात्रों को पढ़ाया जाता था कि कोर्ट क्या होता है, उसकी भूमिका क्या है, लोकतंत्र में न्यायपालिका का महत्व क्या है और कोर्ट का ढाँचा कैसा है।
लेकिन नए संस्करण में एक अलग अध्याय जोड़ा गया है जिसमें लिखा है कि “न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है।” इसके साथ ही किताब में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में 81,000 से ज़्यादा मामले पेंडिंग हैं और हाई कोर्ट व ज़िला अदालतों में 4 करोड़ 70 लाख से अधिक मामले लंबित हैं।
Kapil Sibal ने खींचा Court का ध्यान — Singhvi बोले ‘Selectivity My Lord’
मंगलवार को कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला रखते हुए कहा कि इस तरह की पढ़ाई से लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा उठ जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी आपत्ति जताते हुए कहा — “Selectivity My Lord, Selectivity — यह दूसरे क्षेत्रों में भी है, लेकिन Judicial Corruption के लिए नहीं।”
जस्टिस बागची ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह किताब बेसिक स्ट्रक्चर के ही खिलाफ लगती है। बेंच और बार दोनों ने इस पर गंभीर चिंता जताई।
CJI Suryakant का सख्त रुख — “किसी को संस्था बदनाम नहीं करने दूंगा”
CJI Suryakant Suo Motu NCERT मामले में CJI ने जो बात कही वह बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा —
“कृपया कुछ दिन इंतजार कीजिए। बार और बेंच सभी परेशान हैं। सभी हाई कोर्ट के जज परेशान हैं। मैं इस मामले को खुद देखूंगा। मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा। संस्था के मुखिया होने के नाते मैंने अपनी ड्यूटी निभाई है। यह एक सोचा-समझा कदम लगता है।”
CJI का यह बयान इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने न केवल आपत्ति जताई, बल्कि यह भी संकेत दिया कि NCERT की यह हरकत किसी सुनियोजित मंशा का हिस्सा हो सकती है।
पहले की किताब से क्या था अलग?
NCERT Old vs New Textbook की तुलना की जाए तो पहले की किताब न्यायपालिका की संरचना, शक्तियों और लोकतंत्र में उसकी भूमिका पर केंद्रित थी। लेकिन नए संस्करण में भ्रष्टाचार के आरोप और लंबित मुकदमों के आंकड़े डालकर छात्रों के मन में न्यायपालिका के प्रति नकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की गई — ऐसा सुप्रीम कोर्ट और अधिवक्ताओं का मानना है।
क्या है पूरा संदर्भ
NCERT हर कुछ वर्षों में अपनी पाठ्यपुस्तकों का नवीनीकरण करती है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद भी किताबों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। लेकिन कक्षा 8 के छात्रों को “न्यायिक भ्रष्टाचार” की अवधारणा पढ़ाना और उसे इस रूप में प्रस्तुत करना एक बेहद संवेदनशील मसला है। न्यायपालिका लोकतंत्र का एक स्वतंत्र और सम्मानित स्तंभ है। स्कूली किताबों में इसे भ्रष्ट बताने से बच्चों के मन में एक पूरी संस्था के प्रति अविश्वास का बीज बोया जा सकता है — यही सुप्रीम कोर्ट की मूल चिंता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- NCERT की Class 8 Social Science की नई किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर जोड़ा गया — पुरानी किताब में यह था ही नहीं।
- वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने Supreme Court को बताया, Singhvi ने भी आपत्ति जताई; Justice Bachi बोले — “Basic Structure के खिलाफ लगती है यह किताब।”
- CJI Suryakant ने Suo Motu संज्ञान लिया — कहा “यह सोचा-समझा कदम, किसी को संस्था बदनाम नहीं करने दूंगा।”
- किताब में SC में 81,000+ और देशभर में 4.70 करोड़+ पेंडिंग मामलों का ज़िक्र, न्यायपालिका को भ्रष्ट बताया — बार और बेंच दोनों परेशान।








