MRI Machine यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग: अस्पतालों में एक ऐसी मशीन होती है जो साल के 365 दिन, 24 घंटे चालू रहती है। इसे कभी बंद नहीं किया जाता और अगर गलती से भी इसका बटन दबाकर बंद कर दिया जाए, तो इसे दोबारा शुरू करने में 20 से 30 लाख रुपये तक का भारी नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर इस मशीन में ऐसा क्या है जो इसे कभी बंद नहीं किया जा सकता।
क्यों कभी बंद नहीं होती MRI Machine?
MRI Machine के अंदर एक बेहद ताकतवर चुंबक (Magnet) होता है और यह कोई साधारण चुंबक नहीं है। इसे काम करने के लिए ठंडक चाहिए होती है, लगभग माइनस 269 डिग्री सेल्सियस। इतनी भयंकर ठंडक बनाए रखने के लिए इसमें लिक्विड हीलियम गैस भरी जाती है।
अगर इस मशीन को बंद कर दिया जाए तो हीलियम उबलने लगती है और गैस बनकर उड़ जाती है। हीलियम बेहद महंगी गैस है। एक MRI Machine में 1500 से 2000 लीटर हीलियम होती है और इसे दोबारा भरने और मशीन को ठीक करने में लाखों रुपये और कई महीनों का वक्त बर्बाद हो जाता है। यही वजह है कि इस मशीन को हमेशा चालू रखा जाता है।
MRI Machine और X-Ray में क्या अंतर है?
अक्सर लोग MRI को सीटी स्कैन या एक्सरे जैसा समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। एक्सरे हड्डियों को देखता है। लेकिन MRI शरीर के नरम अंदरूनी हिस्सों जैसे दिमाग, नसों, मांसपेशियों और ट्यूमर की ऐसी साफ तस्वीरें खींचती है जो किसी और मशीन से संभव नहीं है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई खतरनाक रेडिएशन यानी हानिकारक किरणें भी नहीं होतीं।
कब बंद की जाती है यह मशीन?
इस कभी ना बंद होने वाली मशीन को सिर्फ इमरजेंसी में बंद किया जाता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “क्वेंच” करना कहते हैं। जैसे अगर कोई लोहे की भारी चीज चुंबक से चिपक जाए, अगर कोई मरीज अंदर फंस जाए या फिर भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा आ जाए, तब इसे इमरजेंसी में बंद किया जाता है।
MRI Machine का आविष्कार किसने किया?
इस क्रांतिकारी मशीन का श्रेय डॉक्टर रेमंड दमादियन को दिया जाता है। उन्होंने 1977 में पहली बार खुद के शरीर को स्कैन करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। आज यह तकनीक दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचा रही है। एक एक्सरे सिर्फ हड्डियां दिखाता है, लेकिन MRI ने चिकित्सा विज्ञान को वह आंखें दी हैं जो शरीर के अंदर छिपी हर बीमारी को पहचान सकती हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- MRI Machine 365 दिन, 24 घंटे चालू रहती है, बंद करने पर 20-30 लाख रुपये का नुकसान
- मशीन के अंदर माइनस 269 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखने के लिए 1500-2000 लीटर लिक्विड हीलियम भरी जाती है
- डॉक्टर रेमंड दमादियन ने 1977 में पहली बार MRI से अपना शरीर स्कैन किया था
- इमरजेंसी में मशीन को बंद करने की प्रक्रिया को “क्वेंच” कहते हैं













