सांसद औजला का नए CM भगवंत मान के नाम ट्वीट

The News Air- अमृतसर- पंजाब में बिक रहे नशे की रोकथाम के लिए 25 दिन पहले DGP को लिखे पत्र पर कार्रवाई के लिए सांसद गुरजीत औजला ने CM भगवंत मान के नाम ट्वीट किया है। गौरतलब है कि पंजाब कांग्रेस ने चुनाव से पहले नशे के खिलाफ कार्रवाई के दावे करते हुए बिक्रम मजीठिया पर मामला दर्ज हुआ था। फिर भी लोगों ने कांग्रेस की कारगुजारी को पूरी तरह से नकार कर सूबे में AAP को चुना।

सांसद गुरजीत औजला ने CM भगवंत मान के नाम किए ट्वीट में अनुरोध किया कि आशा करते हैं, CM मान अब अपने कार्यालय को पूरी तरह से संभाल चुके होंगे। पिछले महीने DGP वीके भावरा को नशे की रोकथाम के लिए खत लिखा था। अनुरोध है कि पंजाब राज्य से ड्रग, अपहरण, सट्टा, मनी गैंग और साठगांठ खत्म करने के प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने DGP को लिखे पत्र की कॉपी भी ट्वीट की है। पत्र में सांसद औजला ने पुलिस पर नश बेचने वालों पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए हैं।

पंजाब के लोगों को अब नशेड़ी कहा जाता है

DGP को लिखे खत में सांसद औजला ने कहा था कि पंजाब के लोग जो कभी अपनी बुद्धि और वीरता के लिए जाने जाते थे। अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नशेड़ी कहा जा रहा है। पंजाब राज्य में मादक पदार्थों की लत और नशीली दवाओं के कारण मौत की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, इसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन पर आती है।

वह लंबे समय से नशीली दवाओं के खतरे के खिलाफ काम कर रहे हैं। कई मौकों पर उन्होंने जिला पुलिस को कार्रवाई करने के लिए सतर्क किया है, स्थानीय पुलिस के चुप रहने के रवैये ने निवासियों का उन पर विश्वास खो दिया है।

खुले में बिक रहा नशा

औजला ने कहा था कि ज्यादातर स्लम क्षेत्रों में अवैध नशा, अवैध शराब और दड़ा-सट्‌टा आम हो रहा है और इसके लिए लोगों में असंतोष है। यह असंतोष निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों को बुरी तरह उलझा रहा है। मादक पदार्थ की तस्करी की जांच में कई वरिष्ठ अधिकारियों और राजनेताओं के नाम कई मौकों पर सामने आए हैं, लेकिन वे कार्रवाई की बजाय सीलबंद लिफाफे में पड़े हैं।

संसद में भी उठा चुके हैं मुद्दा

इस मामले को गुरजीत औजला संसद में भी उठा चुके हैं। इसमें उन्होंने बताया था कि थाना स्तर पर कंजम्पशन और पेडलर से पकड़ी गई सामग्री काफी छोटी होती है। पुलिस उसके आगे बड़ी मछली तक पहुंचने का प्रयास ही नहीं करती। हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों के पुलिस विभागों ने पारंपरिक तरीकों को दरकिनार करते हुए आधुनिक साधनों और तकनीकों के साथ अपने क्षेत्रों में इस खतरे को रोकने के लिए पूरी जिम्मेदारी ली है। ऐसा ही पंजाब में भी करने की जरूरत है।

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