Sikh Family Donates Land : पंजाब के Moga जिले के महिना (Mehna) गांव में इंसानियत और भाईचारे की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। यहाँ एक सिख परिवार ने गांव के मुस्लिम समुदाय के लिए अपने खेत का एक हिस्सा दान कर दिया है, ताकि कब्रिस्तान तक जाने का रास्ता बन सके। यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पिछले लगभग सात दशकों से मुस्लिम परिवारों को अपने प्रियजनों को दफनाने के लिए दूसरों के खेतों और खड़ी फसलों के बीच से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें एक पक्का और सम्मानजनक रास्ता मिल गया है।
70 साल पुरानी समस्या का अंत
गांव में मुस्लिम समुदाय के पास कब्रिस्तान तो था, लेकिन वहां तक जाने के लिए कोई सरकारी या निजी रास्ता नहीं था। जब भी किसी की मौत होती, तो शव यात्रा को खेतों में खड़ी फसल या बारिश के दिनों में जमा पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता था। इसके लिए भी हर बार जमीन मालिकों से इजाजत लेनी पड़ती थी।
यह समस्या पिछले 70 सालों से जस की तस बनी हुई थी। लेकिन अब गांव के Jagdish Singh और उनके भतीजे शमशेर सिंह व राजविंदर सिंह ने बड़ा दिल दिखाते हुए अपनी जमीन का वह हिस्सा दान कर दिया, जो कब्रिस्तान के रास्ते के लिए जरूरी था।
पैसे और जमीन के बदले जमीन लेने से किया इनकार
इस नेक काम में गांव के सरपंच Amandeep Singh Bhima ने अहम भूमिका निभाई। जब उन्हें पता चला कि कब्रिस्तान का कोई रास्ता नहीं है, तो उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Record) चेक किया और पुष्टि की कि वाकई वहां कोई रास्ता नहीं था।
इसके बाद सरपंच, मुस्लिम समुदाय और पंचायत के सदस्य जमीन मालिक सिख परिवार के पास गए। उन्होंने जमीन के बदले पैसे या दूसरी जगह जमीन देने की पेशकश की। लेकिन जगदीश सिंह के परिवार ने यह कहते हुए सब कुछ ठुकरा दिया कि वे यह जमीन भाईचारे और समाज सेवा के लिए दान कर रहे हैं, उन्हें इसके बदले कुछ नहीं चाहिए। जगदीश सिंह के बेटे गुरविंदर सिंह गिल ने कहा, “हम चाहते हैं कि गांव में सभी भाईचारे प्यार और शांति से रहें।”
रज्जो की मौत के बाद जागी पंचायत
इस समस्या ने तब तूल पकड़ा जब 25 जनवरी को गांव की एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला, रज्जो की मौत हो गई। रज्जो, गांव के निवासी बूटा खान की भाभी थीं। उनके अंतिम संस्कार के लिए परिवार को शव को खेतों के बीच से ले जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।
इसके बाद बूटा खान ने पंचायत से गुहार लगाई। बीबीसी द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद सरपंच और ग्रामीण सक्रिय हुए और सिख परिवार ने आगे आकर इस दशकों पुरानी समस्या का समाधान कर दिया।
‘मुस्लिम समुदाय की 37 वोटें, लेकिन सम्मान पूरा’
महना गांव में लगभग 3500 वोटें हैं, जिनमें से मुस्लिम समुदाय की केवल 37 वोटें हैं। बूटा खान ने बताया कि 1947 के बंटवारे के वक्त बाकी मुस्लिम परिवार पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन उनके पिता यहीं रुक गए थे।
कम संख्या होने के बावजूद, गांव के सिख समुदाय ने उनकी भावनाओं का सम्मान किया। मौलवी आस मोहम्मद ने कहा कि मुस्लिम समुदाय की आने वाली पीढ़ियां भी जगदीश सिंह के परिवार की इस दरियादिली को याद रखेंगी।
विश्लेषण (Analysis)
वर्तमान समय में जब अक्सर धर्म के नाम पर दूरियां बढ़ाने वाली खबरें सामने आती हैं, मोगा की यह घटना पंजाब की उस ‘सांझी विरासत’ (Shared Heritage) को दर्शाती है जिसके लिए यह राज्य जाना जाता है। एक सिख परिवार द्वारा मुस्लिम पड़ोसियों के अंतिम सफर को सम्मानजनक बनाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन दान करना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का एक मजबूत दस्तावेज है। यह साबित करता है कि ग्रामीण भारत में आज भी मानवीय संवेदनाएं नफा-नुकसान से ऊपर हैं।
‘जानें पूरा मामला’
मोगा के महना गांव में कब्रिस्तान जाने का रास्ता न होने से मुस्लिम समुदाय 70 साल से परेशान था। हाल ही में रज्जो नामक महिला की मौत के बाद यह मुद्दा गरमाया। सरपंच अमनदीप सिंह भीमा की पहल पर जमीन मालिक जगदीश सिंह और उनके परिवार ने कब्रिस्तान के रास्ते के लिए अपनी जमीन मुफ्त में दान कर दी। अब जल्द ही कागजी कार्रवाई पूरी कर पक्के रास्ते का निर्माण शुरू होगा।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
दानवीर: जगदीश सिंह, शमशेर सिंह और राजविंदर सिंह ने जमीन दान की।
समस्या: 70 साल से कब्रिस्तान जाने के लिए कोई रास्ता नहीं था।
निर्णय: परिवार ने जमीन के बदले पैसे या दूसरी जमीन लेने से मना कर दिया।
पहल: सरपंच अमनदीप सिंह भीमा और पंचायत ने दोनों पक्षों को मिलाया।
संदर्भ: 25 जनवरी को रज्जो की मौत के बाद उठी मांग पर हुआ फैसला।








