Mobile Data Rollover को लेकर भारतीय संसद में एक बड़ा और अहम सवाल उठाया गया है। एक सांसद ने टेलीकॉम कंपनियों की उस नीति पर सीधा निशाना साधा है जिसके तहत उपभोक्ता को रोजाना मिलने वाला डेटा अगर पूरा इस्तेमाल न हो, तो रात 12 बजे बचा हुआ हिस्सा अपने आप खत्म हो जाता है। न कोई रिफंड, न कोई रोलओवर: बस चुपचाप डेटा गायब। सांसद ने इसे उपभोक्ताओं के साथ खुला अन्याय बताते हुए संसद में तीन बड़ी मांगें रखी हैं।
Daily Data Limit का खेल: पैसे पूरे, डेटा आधा
भारत में टेलीकॉम कंपनियां अपने रिचार्ज प्लान में ‘Daily Data Limit’ के तहत 1.5GB, 2GB या 3GB प्रतिदिन जैसे डेटा ऑफर करती हैं। यह डेटा हर 24 घंटे में रीसेट हो जाता है। लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब आप किसी दिन अपना पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर पाते।
मान लीजिए आपके प्लान में रोजाना 2GB डेटा मिलता है और आपने किसी दिन सिर्फ 1.5GB इस्तेमाल किया। बाकी बचे 0.5GB का क्या होगा? जवाब है: रात 12 बजते ही वह गायब हो जाएगा। न कोई रिफंड मिलेगा, न ही वह अगले दिन जुड़ेगा। सांसद ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए साफ कहा कि यह कोई दुर्घटना या तकनीकी खामी नहीं है, बल्कि यह टेलीकॉम कंपनियों की एक सोची-समझी नीति (policy) है।
“इस्तेमाल करो या खो दो”: उपभोक्ता के सामने सिर्फ दो रास्ते
सांसद ने इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि आज Mobile Data Rollover की कोई व्यवस्था न होने के कारण पूरा सिस्टम ‘इस्तेमाल करो या गंवा दो’ (Use it or Lose it) के सिद्धांत पर चलता है। उपभोक्ता के सामने सिर्फ दो ही रास्ते बचते हैं: या तो बिना जरूरत के डेटा बेवजह खर्च करो, या रात 12 बजे उसे बर्बाद होते देखो।
उन्होंने संसद में सीधा सवाल दागा कि जब उपभोक्ता ने अपनी जेब से पैसे देकर डेटा खरीदा है, तो उसे जब्त (forfeit) क्यों किया जा रहा है? उनकी साफ मांग है कि बचा हुआ Unused Data अगले साइकल में कैरी फॉरवर्ड होना चाहिए ताकि लोग उस चीज का इस्तेमाल कर सकें जिसके लिए उन्होंने पहले ही भुगतान कर दिया है।
पहली मांग: सभी यूजर्स के लिए Data Rollover अनिवार्य हो
सांसद की पहली और सबसे अहम मांग यह है कि सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपने उपभोक्ताओं को Mobile Data Rollover यानी Data Carry Forward की सुविधा देनी चाहिए। इसका सीधा मतलब यह है कि जो डेटा दिन के अंत में बच जाता है, उसे खत्म करने की बजाय अगले दिन की Daily Data Limit में जोड़ दिया जाए। वैधता खत्म होते ही डेटा को मिटा देना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
दूसरी मांग: बचे डेटा की कीमत अगले रिचार्ज में एडजस्ट हो
दूसरी मांग और भी दिलचस्प है। सांसद ने कहा कि अगर कोई उपभोक्ता लगातार कई साइकल में अपने डेटा का पूरा उपयोग नहीं कर पाता, तो उसके बचे हुए Unused Data की कीमत अगले महीने के रिचार्ज अमाउंट में एडजस्ट या डिस्काउंट के रूप में दी जानी चाहिए। सांसद का तर्क एकदम सीधा है: उपभोक्ता को बार-बार उस क्षमता के लिए भुगतान नहीं करना चाहिए जिसका वह इस्तेमाल ही नहीं करता।
तीसरी मांग: बचा डेटा दोस्तों और रिश्तेदारों को ट्रांसफर करने की सुविधा मिले
तीसरी मांग शायद सबसे क्रांतिकारी है। सांसद ने कहा कि बचे हुए डेटा को उपभोक्ता की ‘डिजिटल संपत्ति’ (Digital Property) माना जाना चाहिए। जैसे हम अपने बैंक खाते से किसी को भी पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, ठीक उसी तरह उपभोक्ताओं को अपनी Daily Data Limit में से बचे हुए डेटा को अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों या दोस्तों को ट्रांसफर करने की पूरी अनुमति मिलनी चाहिए। यह मांग Mobile Data Rollover से एक कदम आगे की बात है और डेटा पर उपभोक्ता के पूर्ण अधिकार की वकालत करती है।
Digital India के दौर में डेटा के अधिकार का सवाल
सांसद ने Digital India अभियान का हवाला देते हुए एक बेहद अहम बात कही। उन्होंने कहा कि जब हम एक डिजिटल भारत का निर्माण कर रहे हैं, तो डिजिटल पहुंच (Digital Access) ऐसे डेटा पर निर्भर नहीं हो सकती जो अचानक गायब हो जाता है। उनका संदेश बिल्कुल साफ था: अगर आपने डेटा के लिए भुगतान किया है, तो वह आपका है, उसे कैरी फॉरवर्ड होना चाहिए और वह आपके इस्तेमाल के लिए बना रहना चाहिए।
करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर कितना असर?
यह मसला सिर्फ संसद की बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़ा है। हर दिन लाखों लोग अपना पूरा Daily Data इस्तेमाल नहीं कर पाते और उनकी कमाई का एक हिस्सा बिना किसी फायदे के टेलीकॉम कंपनियों की झोली में चला जाता है।
अगर Mobile Data Rollover की मांग मानी जाती है तो सबसे ज्यादा राहत उन लोगों को मिलेगी जो रोजाना भारी इंटरनेट का उपयोग नहीं करते। ऐसे उपभोक्ताओं को अपने खर्च किए गए हर पैसे का पूरा मूल्य मिल सकेगा और डेटा की रोजाना होने वाली बर्बादी पर लगाम लगेगी। यह एक ऐसा मुद्दा है जो हर स्मार्टफोन यूजर से सीधे जुड़ा है।
जानें पूरा मामला
भारत में टेलीकॉम कंपनियां अपने प्रीपेड रिचार्ज प्लान में 1.5GB, 2GB या 3GB प्रतिदिन जैसी Daily Data Limit ऑफर करती हैं। यह डेटा हर 24 घंटे में रीसेट होता है, यानी चाहे आपने अपना पूरा डेटा इस्तेमाल किया हो या नहीं, रात 12 बजे सब शून्य हो जाता है और नए दिन का कोटा शुरू हो जाता है। इस नीति के खिलाफ अब संसद में जोरदार आवाज उठाई गई है, जहां एक सांसद ने Mobile Data Rollover, अगले महीने के रिचार्ज में बचे डेटा का एडजस्टमेंट, और Unused Data को दूसरों को ट्रांसफर करने जैसी तीन बड़ी मांगें रखी हैं। इन मांगों का मकसद उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और टेलीकॉम कंपनियों की एकतरफा नीतियों पर सवाल उठाना है।
Telecom Companies ऐसे Recharge Plans offer करती हैं जिनमें ‘Daily Data Limits’ जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB per day होती हैं, जो हर 24 hours में reset हो जाती हैं। बचा हुआ data midnight पर expire हो जाता है, जबकि उसके पूरे पैसे पहले ही दिए जा चुके होते हैं।
आपको 2GB के लिए charge किया… pic.twitter.com/i7Ib42nFMK
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 23, 2026
मुख्य बातें (Key Points)
- टेलीकॉम कंपनियों के रिचार्ज प्लान में बचा हुआ Daily Data रात 12 बजे अपने आप खत्म हो जाता है: न रिफंड, न रोलओवर।
- सांसद ने संसद में सवाल उठाया कि पैसे देकर खरीदा गया डेटा जब्त (forfeit) क्यों किया जाता है।
- तीन मांगें रखी गईं: Mobile Data Rollover की सुविधा, अगले रिचार्ज में बचे डेटा का एडजस्टमेंट/डिस्काउंट, और बचा डेटा दोस्तों-रिश्तेदारों को ट्रांसफर करने का विकल्प।
- सांसद ने कहा कि Digital India के दौर में डिजिटल एक्सेस ऐसे डेटा पर निर्भर नहीं हो सकता जो गायब हो जाता है।








