MNREGA Name Change: देश के ग्रामीण इलाकों में रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ यानी मनरेगा (MNREGA) को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इस फ्लैगशिप योजना का नाम बदलने की तैयारी कर रही है। अब इस योजना को ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ के नाम से जाना जा सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है।
गांधी के ग्राम स्वराज दर्शन को मजबूती देने की पहल
सूत्रों का कहना है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नाम बदलने का एक प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसका मकसद महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ (Gram Swaraj) के दर्शन को और मजबूती देना है। यह बदलाव केवल नाम तक सीमित रहेगा या इसमें कुछ और भी जुड़ेगा, यह कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही साफ हो पाएगा। सरकार का मानना है कि ‘पूज्य बापू’ नाम जुड़ने से योजना का भावनात्मक जुड़ाव और बढ़ेगा।
योजना का मूल ढांचा रहेगा वही
राहत की बात यह है कि योजना के नाम में बदलाव के बावजूद इसके मूल ढांचे में कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली सालाना 100 दिन की रोजगार गारंटी और मजदूरी के नियम पहले की तरह ही रहेंगे। सरकार का फोकस नाम के साथ-साथ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी है।
25 करोड़ परिवारों का सहारा है मनरेगा
2005 में यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना आज भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ है। यह योजना 25 करोड़ से ज्यादा परिवारों को आजीविका सुरक्षा प्रदान करती है। बेरोजगारी कम करने के साथ-साथ यह योजना गांवों में सड़कें, तालाब और अन्य स्थाई संपत्तियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बजट में 10% की बढ़ोतरी
सरकार ने मनरेगा के महत्व को समझते हुए 2025-26 के बजट में इसके लिए 86,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा है। विश्व बैंक ने भी इसे ग्रामीण विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। 2025 में अब तक 15 करोड़ से ज्यादा काम दिवस (Man-days) पूरे किए जा चुके हैं, जो इसकी सफलता को दर्शाता है।
जानें पूरा मामला
मनरेगा का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। 2005 में इसे रघूवंश प्रसाद सिंह ने पेश किया था और 2 अक्टूबर 2005 को गांधी जयंती पर यह कानून बना। शुरुआत में इसका नाम नरेगा था, जिसे 2009 में बदलकर ‘मनरेगा’ कर दिया गया। अब एक बार फिर इसके नाम बदलने की चर्चा है। हालांकि, योजना के सामने भुगतान में देरी और असमानता जैसी चुनौतियां भी हैं, जिन्हें दूर करना सरकार के लिए असली परीक्षा होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
मनरेगा का नया नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ हो सकता है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रस्ताव तैयार किया है, कैबिनेट मंजूरी बाकी।
योजना के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी में कोई बदलाव नहीं होगा।
2025-26 के बजट में मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये आवंटित।








