Mineral Exploration : 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत के भूवैज्ञानिक भविष्य की दिशा तय करने वाली एक अहम बैठक होने जा रही है। खान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा आयोजित 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड बैठक में देश के खनिज अन्वेषण, स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों और आपदा जोखिम प्रबंधन पर बड़े फैसलों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
21 जनवरी 2026 को एपी शिंदे संगोष्ठी हॉल, आईसीएआर, पूसा, नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता खान मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल करेंगे। बैठक में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के महानिदेशक असित साहा और खान मंत्रालय के अपर सचिव संजय लोहिया सहित केंद्र और राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी खनन कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे।

क्या है केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड
केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड, खान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण का एक शीर्ष मंच है, जहां जीएसआई के वार्षिक क्षेत्र सत्र कार्यक्रम पर चर्चा कर कार्यों के दोहराव से बचा जाता है। यहीं से यह तय होता है कि आगामी वर्ष में सर्वेक्षण, मानचित्रण, अनुसंधान और अन्वेषण किन प्राथमिकताओं पर आगे बढ़ेगा।
राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ा खनिज एजेंडा
बैठक में लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, ग्रेफाइट, पीजीई, वैनेडियम, स्कैंडियम और सीजियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण पर खास फोकस रहेगा। इन खनिजों को ऊर्जा संक्रमण, आत्मनिर्भर भारत और औद्योगिक विकास की राष्ट्रीय जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
नई तकनीक से बदलेगा अन्वेषण का तरीका
चर्चा में एआई और मशीन लर्निंग आधारित डेटा एकीकरण, भूभौतिकीय सर्वेक्षण, हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग, डीप ड्रिलिंग और खनिज प्रणाली अध्ययन जैसे आधुनिक औजारों को अपनाने पर जोर दिया जाएगा। इसका मकसद अन्वेषण की सटीकता बढ़ाना और समय व लागत दोनों को कम करना है।
आपदा जोखिम और हिमालयी चुनौतियां
बैठक में हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में भूस्खलन खतरे के क्षेत्र निर्धारण और ढलान स्थिरता अध्ययन पर भी चर्चा होगी। इसका सीधा उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सुरक्षित बुनियादी ढांचे की योजना को मजबूत करना है।
1068 परियोजनाओं का रोडमैप
इस बैठक में जीएसआई की 1068 परियोजनाओं वाला वार्षिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय किया गया है। इसमें खनिज अन्वेषण, कार्बन पृथक्करण अध्ययन, अपतटीय अन्वेषण और जनहित भूविज्ञान पर विशेष बल दिया गया है।
प्रदर्शनी और प्रकाशन विमोचन
बैठक के दौरान भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन किया जाएगा। साथ ही सामरिक और महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण में जीएसआई की उपलब्धियों को दर्शाने वाली एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
विश्लेषण: क्यों अहम है यह बैठक
यह बैठक केवल एक तकनीकी चर्चा नहीं, बल्कि भारत की संसाधन सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की नींव रखने वाला मंच है। महत्वपूर्ण खनिजों पर केंद्रित रणनीति से भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में ठोस कदम उठा सकता है।
आम लोगों पर असर
इन पहलों से खनिज संपदा का बेहतर उपयोग, आपदा जोखिम में कमी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा उद्योग, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा।
जानें पूरा मामला
65वीं सीजीपीबी बैठक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक प्राथमिकताओं को वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों से जोड़ने का प्रयास है, जिससे नवाचार, संसाधन सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास को गति मिल सके।
मुख्य बातें (Key Points)
- 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 65वीं सीजीपीबी बैठक
- महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों पर विशेष फोकस
- 1068 परियोजनाओं का वार्षिक कार्यक्रम प्रस्तुत
- एआई और आधुनिक तकनीक से अन्वेषण को बढ़ावा








