कैबिनेट में परगट सिंह समेत कई नए चेहरे बन सकते हैं मंत्री


नई दिल्ली, 25 सितंबर (The News Air)
पंजाब में कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री को तो बदल दिया, लेकिन कैबिनेट को लेकर अभी भी जद्दोजहद जारी है। कांग्रेस हाईकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी तो कर दी, लेकिन अभी नए सीएम के मंत्रिमंडल को तय करने के लिए राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कई थिंक टैंक हाथ-पाँव मार रहे हैं. बीते शुक्रवार को भी राहुल गांधी के आवास पर मंत्रिमंडल को फाइनल करने के लिए रात 2 बजे से सुबह चार बजे तक बैठक चली और मंत्रिमंडल की उस सूची पर विचार किया गया जिसे हाईकमान ने बीते गुरुवार को तैयार कर लिया था.

पंजाब कैबिनेट के विस्तार को लेकर कांग्रेस हाईकमान कनफ्यूज हो गया है। 3 बार बैठक के बाद भी मंत्रियों की लिस्ट फाइनल नहीं हो सकी। राहुल गांधी के घर शुक्रवार रात फिर 2 बजे तक 4 घंटे मंथन चला। इसमें सबसे बड़ा ख़तरा अब कैप्टन अमरिंदर सिंह बने हुए हैं। हाईकमान इस बात से आशंकित है कि अगर पुराने मंत्रियों को हटाया तो वे कैप्टन के साथ मिल सकते हैं। इससे कैप्टन का ग्रुप मज़बूत हो जाएगा। नई सरकार के ख़िलाफ़ भी बग़ावत शुरू हो जाएगी। चुनाव में क़रीब 3 महीने बचे हैं। बग़ावत हुई तो कांग्रेस को नुक्सान होना तय है। इसलिए बैठकों का दौर जारी है।

परगट सिंह समेत कई नए चेहरे बन सकते हैं मंत्री
सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट में कुछ नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है। परगट सिंह, राजकुमार वेरका, गुरकीरत सिंह कोटली, संगत सिंह गिलजियान, सुरजीत धीमान, अमरिंदर सिंह राजा वरिंग और कुलजीत सिंह नागरा के मंत्री बनने के कयास लगाए जा रहे हैं। परगट सिंह को सिद्धू का क़रीबी माना जाता है और वर्तमान में वह पंजाब कांग्रेस के महासचिव हैं। जबकि गिलजियान पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। इस तरह के कयास भी हैं कि अमरिंदर सिंह के क़रीबी राणा गुरजीत सिंह सोढ़ी और साधु सिंह धर्मसोत को मंत्री पद से हटाया जा सकता है। सोढ़ी खेल मंत्री थे जबकि धर्मसोत सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री थे।

सूत्रों ने बताया कि सिद्धू और चन्नी कई विधायकों को कैबिनेट में शामिल करने पर एकमत नहीं थे. राजा वड़िंग, परगट सिंह और कुलजीत नागरा को शामिल करने पर दोनों के बीच मतभेद सामने आए हैं. जबकि सिद्धू तीनों का पुरज़ोर समर्थन कर रहे हैं. चन्नी का मानना है कि संगठन के लोगों को पार्टी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि चुनाव नज़दीक हैं. परगट सिंह पीपीसीसी महासचिव हैं और नागरा कार्यकारी अध्यक्ष हैं.
साथ ही सिद्धू, राजा वड़िंग का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल उनका कड़ा विरोध कर रहे हैं. बादल ने चन्नी के सीएम बनने में भी अहम भूमिका निभाई थी. चन्नी को गुरुवार को दिल्ली बुलाया गया था और उन्होंने वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, प्रभारी महासचिव हरीश रावत, हरीश चौधरी और अजय माकन और अंत में राहुल गांधी के साथ दो दौर की बैठकें की थीं. राहुल गांधी की पूर्व पीपीसीसी प्रमुख सुनील जाखड़ से क़रीब 45 मिनट तक मुलाक़ात के बाद शुक्रवार को उन्हें फिर से बैठक के लिए बुलाया गया था.

बताया जा रहा है कि जाखड़ का भी कुछ विधायकों को मंत्री बनाए जाने पर विचार था. पार्टी जाखड़ को मंत्रिमंडल में एक भूमिका स्वीकार करने के लिए प्रभावित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह मना कर रहे हैं. बैठक की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि जाखड़ ने राहुल से कहा है कि वह सरकार में कोई पद नहीं चाहते हैं.


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