Mamata Banerjee Supreme Court – पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को काला कोट पहनकर सुप्रीम कोर्ट में हाजिरी दी और राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) ऑफ इलेक्टोरल रोल्स को चुनौती दी। यह इतिहास में पहली बार था जब किसी सिटिंग मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में खुद अपना पक्ष रखने की पेशकश की। ममता ने आरोप लगाया कि 58 लाख नामों को पहले चरण में काट दिया गया है और दूसरे चरण में 1.30 करोड़ नाम छोड़ दिए गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को “WhatsApp आयोग” तक कह दिया।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में ममता बनर्जी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत से खुद दलील रखने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा, “मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण शख्सियत नहीं हूं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, लेकिन मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही। मैं आम आदमी के लिए लड़ रही हूं।” सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की है।
इतिहास में पहली बार सिटिंग CM सुप्रीम कोर्ट में
यह इतिहास में पहली बार हुआ जब किसी सिटिंग मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में खुद अपना पक्ष रखने की पेशकश की। ममता बनर्जी एक क्वालिफाइड लॉयर हैं और उन्हें कोर्ट में दलील रखने का अधिकार है। मंगलवार रात 10:30 बजे तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने X (पूर्व में Twitter) पर पोस्ट किया था – “पीपल्स एडवोकेट वर्सेस डेविल एडवोकेट”।
बुधवार सुबह ममता बनर्जी काला कोट पहने और हाथ में फाइलों का बंडल लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। तृणमूल कांग्रेस ने उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। मंगलवार शाम को ही यह जानकारी आ गई थी कि सुप्रीम कोर्ट में उनके नाम का गेट पास भी बन गया है।
ममता की 8 मुख्य मांगें
ममता बनर्जी की ओर से वकील श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर 8 मुख्य मांगें रखीं:
पहली मांग: चुनाव आयोग की 24 जून और 27 अक्टूबर 2025 को जारी SIR नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए।
दूसरी मांग: चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मौजूदा वोटर लिस्ट के आधार पर ही कराए जाएं।
तीसरी मांग: BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) और DEO (डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर) को कहा जाए कि किसी के नाम में गलती है तो उसे सही कराएं, नाम काटें नहीं।
चौथी मांग: चुनाव आयोग से कहा जाए कि जिन भी नामों में गड़बड़ियां हैं या जो अनमैप्ड हैं, उनकी सूची ऑनलाइन अपलोड की जाए।
पांचवीं मांग: चुनाव आयोग से कहा जाए कि आधार कार्ड को पूरी तरह वैध डॉक्यूमेंट माना जाए।
छठी मांग: चुनाव आयोग से कहा जाए कि माइक्रो ऑब्जर्वर्स जो उन्होंने पश्चिम बंगाल भेज रखे हैं, उनको वापस बुलाया जाए।
सातवीं मांग: नोटिस पर एक “कारण बताओ” ऑप्शन भी होना चाहिए जिससे लोगों को यह पता चले कि उनका नाम आखिर क्यों कट रहा है।
आठवीं मांग: जो काम 2 साल में होना था, वो अब 4 महीने में क्यों किया जा रहा है?
चुनाव आयोग को “WhatsApp आयोग” कहा
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को उनके पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने चुनाव आयोग को “WhatsApp आयोग” तक कह दिया। ममता ने कहा, “मैंने चुनाव आयोग को कई पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब हमें लगा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया जानबूझकर पश्चिम बंगाल को टारगेट करने के लिए डिजाइन की गई है। ममता ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दबाव में 150 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक बूथ लेवल ऑफिसर भी शामिल है।
“न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा है”
ममता बनर्जी ने कोर्ट में भावुक होते हुए कहा, “जस्टिस इज क्राइंग बिहाइंड द डोर्स” (न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा है)। उन्होंने कहा, “मैं एक बहुत ही कम महत्व की व्यक्ति हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं। मैं अपने राज्य के लोगों के लिए लड़ रही हूं।”
ममता ने बताया कि वे कुछ ऐसे लोगों को भी साथ लाई थीं जिनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया था और जिन्हें लिस्ट में मृतक घोषित किया गया था, जबकि वे जीवित हैं। यह दिखाने के लिए कि SIR प्रक्रिया में कितनी गड़बड़ियां हो रही हैं।
टैगोर, रॉय, दत्ता की स्पेलिंग का उदाहरण
पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से यह तर्क रखा गया कि तमाम ऐसे सरनेम हैं पश्चिम बंगाल में जिनकी स्पेलिंग लोग अलग-अलग लिखते हैं। जैसे कि रॉय (Roy/Rai), दत्ता (Dutta/Datta), गांगुली (Ganguly/Ganguli) और इसी कड़ी में उन्होंने टैगोर (Tagore/Thakur) सरनेम का भी उदाहरण दिया।
कोई ‘ई’ लगाता है तो कोई ‘इ’ नहीं लगाता। अब आप कैसे यह विभेद करेंगे कि कोई स्पेलिंग गलत है या कोई स्पेलिंग सही है? या कोई व्यक्ति जो पहले एक स्पेलिंग लिख रहा था या उसी परिवार का दूसरा व्यक्ति अपने सरनेम की स्पेलिंग चेंज कर दी, तो आप वो विभेद कैसे करेंगे? और ये कैसे कहेंगे कि कोई एक स्पेलिंग सही है और दूसरी गलत है और इस आधार पर नाम कटने चाहिए?
असम का भी नाम लिया
ममता बनर्जी ने असम का भी नाम लिया। उन्होंने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल के साथ इस साल असम में भी चुनाव होने हैं, लेकिन वहां यह SIR प्रक्रिया क्यों नहीं हो रही है? ममता ने कहा, “व्हाई नॉट असम?” उन्होंने आरोप लगाया कि लड़कियों की शादी हुई तो उनके नाम काट दिए गए। स्पेलिंग मिस्टेक हुई तो नाम काट दिए गए।
ममता ने कहा कि ढाई दशक बाद अब 3 महीने में यह सब कराने की कौन सी जल्दबाजी है? उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस फसल कटाई और पूजा के सीजन में जारी किए गए, जब कई लोग अपने घरों से दूर थे।
BJP शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर्स
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि BJP शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर्स भेजे गए हैं जो स्थानीय चुनाव स्टाफ को ओवरराइड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैलिड आइडेंटिफिकेशन डॉक्यूमेंट्स जैसे आधार कार्ड और डोमिसाइल सर्टिफिकेट को रिजेक्ट किया जा रहा है और अतिरिक्त डॉक्यूमेंट्स की मांग की जा रही है।
ममता ने दावा किया कि SIR मुख्य रूप से डिलीशन पर फोकस्ड है, यहां तक कि छोटी-छोटी विसंगतियों के लिए भी, जैसे कि किसी महिला ने अपने पति का सरनेम अपना लिया या कोई व्यक्ति काम के लिए दूसरी जगह शिफ्ट हो गया।
CJI ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत ने बंगाली भाषा की भाषाई बारीकियों को स्वीकार किया और यह सुनिश्चित करने के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण का सुझाव दिया कि कोई भी वास्तविक मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर न रहे।
जब ममता ने कई बार सीजीआई से परमिशन मांगी कि क्या वे खुद दलील रख सकती हैं, तो बेंच ने कोई सीधा हां या ना नहीं कहा। बेंच ने कहा कि स्टेट ऑफ बंगाल ने भी पिटीशन फाइल की है और उनके पास काबिल वकीलों की टीम है। कपिल सिब्बल जैसे वकील उनके पास हैं जिन्होंने 19 जनवरी को तर्क भी रखा था।
आखिर में जब सोमवार की तारीख दी गई, उसके पहले सीजीआई ने एक रोचक टिप्पणी की। सीजीआई ने कहा, “मैडम ममता, वी हैव नो डाउट अबाउट द एबिलिटी ऑफ मिस्टर दीवान। योर पॉइंट इज वेल टेकन।” मतलब जो दीवान साहब वहां पर उनकी सरकार का पक्ष रख रहे थे, उनका नाम लेते हुए सीजीआई ने यह टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और उसे 10 फरवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई सोमवार, 9 फरवरी 2026 को तय की गई है। अब यह देखना होगा कि अगली प्रोसीडिंग में ममता बनर्जी हिस्सा ले पाती हैं और अपनी दलीलें खुद रखती हैं या श्याम दीवान उनकी ओर से हिस्सा लेते हैं।
SIR क्या है?
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) चुनाव आयोग की एक पहल है जिसका उद्देश्य घर-घर जाकर वेरिफिकेशन के माध्यम से पात्र मतदाताओं को शामिल करके और अपात्र लोगों को हटाकर सटीक और अपडेटेड इलेक्टोरल रोल्स सुनिश्चित करना है। पश्चिम बंगाल में SIR के पहले चरण की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित की गई थी।
पश्चिम बंगाल SIR इलेक्टोरल रोल्स की फाइनल सर्टिफाइड लिस्ट 14 या 15 फरवरी 2026 को प्रकाशित होने वाली है। ममता बनर्जी की पिटीशन SIR प्रक्रिया से संबंधित सभी ECI आदेशों और निर्देशों को रद्द करने और आगामी विधानसभा चुनावों को 2025 इलेक्टोरल रोल्स के आधार पर कराने की मांग करती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ममता बनर्जी ने काला कोट पहनकर सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया को चुनौती दी, इतिहास में पहली बार सिटिंग CM ने ऐसा किया
- 58 लाख नामों को पहले चरण में काटा गया, दूसरे चरण में 1.30 करोड़ नाम छोड़े गए
- ममता ने चुनाव आयोग को “WhatsApp आयोग” कहा, कहा – न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा है
- टैगोर, रॉय, दत्ता जैसे सरनेम की स्पेलिंग वेरिएशन का उदाहरण दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, अगली सुनवाई 9 फरवरी को
- CJI ने कहा – कोई पात्र वोटर इलेक्टोरल रोल से बाहर न रहे








