Mamata Banerjee Election Commission SIR Controversy : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने गुरुवार को एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए Election Commission के मुख्यालय का रुख किया। उनके साथ SIR (Special Intensive Revision of Electoral Roll) प्रक्रिया से प्रभावित 13 BLO (Booth Level Officers) के परिवारजन भी मौजूद थे। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जिसमें कई लोगों की मृत्यु से जुड़ी गंभीर आरोप लगे हैं।
‘Election Commission में पहुंचीं ममता, न्याय की मांग’
Mamata Banerjee करीब 5-7 मिनट पहले चुनाव आयोग के मुख्यालय में प्रवेश किए। उनका मुख्य उद्देश्य Chief Election Commissioner को SIR (विशेष गहन निर्वाचक रोल संशोधन) की प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर समस्याओं के बारे में जानकारी देना था।
इस दौरान उनके साथ Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण क्षण था जहां एक मुख्यमंत्री सीधे चुनाव आयोग के पास अपनी समस्या लेकर पहुंची।
’13 BLO परिवारों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं’
ममता बनर्जी का मुख्य आरोप यह है कि SIR प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक दबाव और समय की कमी के कारण कुल 13 BLO की मृत्यु हुई है। इन परिवारों का कहना है कि कुछ ने आत्महत्या कर ली थी, जबकि अन्य मामलों में जांच चल रही है।
समय की कमी, काम की अधिकता – यही SIR प्रक्रिया की मूल समस्या है। बूथ लेवल अधिकारियों को इतना दबाव दिया गया कि उन्होंने अपनी जान ले ली। ममता बनर्जी ने न केवल इन परिवारों की व्यथा सुनी, बल्कि उन्हें सीधे चुनाव आयोग में ले जाकर न्याय की मांग की।
‘ममता का आरोप – SIR में गलत तरीका अपनाया जा रहा’
Trinamool Congress ने बार-बार यह कहा है कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह से गलत तरीके से चलाई जा रही है। उनके अनुसार:
- अनावश्यक दबाव: BLO पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है
- वोटर डिलीट करने की प्रक्रिया: विवादास्पद तरीके से वोटर्स को निकाला जा रहा है
- हड़बड़ी में निर्णय: SIR को इतनी जल्दबाजी में पूरा किया जा रहा है कि क्षेत्र के अधिकारी तनाव में आ गए हैं
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन (Memorandum) भी सौंपा, जिसमें SIR की प्रक्रिया में सुधार की मांग की गई है।
‘आयोग ने तैयार किया सुरक्षा घेरा’
ममता बनर्जी के आयोग पहुंचने के बाद से पूरे क्षेत्र को सुरक्षा की दीवार से घेर दिया गया है। Delhi Police, सशस्त्र बल, CISF (Central Industrial Security Force) और RF के जवान तैनात कर दिए गए हैं। चुनाव आयोग की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं है।
इस घटनाक्रम से साफ है कि SIR का मुद्दा केवल चुनावी नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट बन गया है। जब कोई सरकार की मुख्यमंत्री सीधे Election Commission के दरवाजे पर अपने नागरिकों के परिवारों को लेकर पहुंचे, तो यह गंभीर चेतावनी है।
‘राजनीतिक असर और विपक्ष की प्रतिक्रिया’
यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में तूफान ला सकती है। विपक्ष ने ममता के इस कदम को “राजनीतिक रणनीति” बताया है, लेकिन 13 परिवारों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं एक कड़वी सच्चाई बनी हुई हैं।
कब चुनाव आयोग इस मामले में गंभीर कार्रवाई करेगा, यह देखना होगा। लेकिन एक बात तय है – SIR की वर्तमान प्रक्रिया पर अब सवाल उठना तय है।
‘जानें, क्या है SIR विवाद?’
SIR (Special Intensive Revision) का मतलब है चुनावी सूची में व्यापक और तीव्र संशोधन। यह प्रक्रिया मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित हुए मतदाताओं और डुप्लिकेट नामों को निकालने के लिए की जाती है। पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया इतनी तेजी से चलाई जा रही है कि BLO तनाव में आ गए हैं। चुनाव आयोग के दबाव में काम करते हुए कई अधिकारी मानसिक तनाव का शिकार हो गए हैं, जिसके कारण कुछ की मृत्यु हुई है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- ममता बनर्जी ने 13 प्रभावित BLO परिवारों को लेकर Election Commission में आवेदन दायर किया
- SIR प्रक्रिया में अत्यधिक दबाव और समय की कमी BLO की मृत्यु का मुख्य कारण है
- Trinamool Congress का आरोप है कि वोटर्स को गलत तरीके से निकाला जा रहा है
- चुनाव आयोग ने सुरक्षा को लेकर सर्वोच्च सावधानी रखी है और पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है








