Makar Sankranti 2026 : 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति पर 22 साल बाद एक अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन संक्रांति और षट्तिला एकादशी एक साथ पड़ रही हैं, जिससे आध्यात्मिक दृष्टि से अक्षय पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 2003 में बना था। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जिससे दान, स्नान और पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
ज्योतिष के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 03:07 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी क्षण से मकर संक्रांति का पर्व मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है। महापुण्य काल दोपहर 03:07 बजे से शाम 06:00 बजे तक रहेगा, जिसमें किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है।
संक्रांति और एकादशी का संयुक्त फल
इस वर्ष मकर संक्रांति के साथ षट्तिला एकादशी व्रत भी है। दोनों का एक ही दिन पड़ना आध्यात्मिक रूप से अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, दान और पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

दान, स्नान और खिचड़ी का महत्व
मकर संक्रांति पर स्नान के बाद तिल, गुड़, चावल, उड़द आदि का दान किया जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने और दान देने की परंपरा है, जिसे ‘खिचड़ी पर्व’ भी कहा जाता है। तिल और गुड़ शरीर को गर्म रखने के साथ पौष्टिक भी होते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन औषधि, तेल और आहार का दान करने से दीर्घायु और निरोगी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
उत्तरायण का आरंभ और सकारात्मकता
मकर संक्रांति के साथ सूर्य उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में दक्षिणायन को नकारात्मकता और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इस दिन से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं, जिसे अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना कहा जाता है। इसी कारण जप, तप, श्राद्ध, तर्पण और दान का विशेष महत्व है।
गंगा स्नान और माघ मेले की शुरुआत
मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर सभी देवी-देवता स्नान के लिए आते हैं। इसी दिन माघ मेले का पहला स्नान होता है और एक माह तक चलने वाले मेले की शुरुआत होती है।
आम जीवन पर असर
इस शुभ संयोग का प्रभाव केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी शुभ माना गया है। कृषि, अर्थव्यवस्था और खेलकूद के क्षेत्रों में मजबूती आने की मान्यता है। लोग नए संकल्प लेकर सकारात्मक शुरुआत करते हैं।

विश्लेषण: क्यों खास है 2026 की संक्रांति
22 वर्षों बाद बना यह योग धार्मिक आस्था के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। संक्रांति, एकादशी और दो महायोगों का एक साथ होना लोगों को दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करेगा। यही कारण है कि 2026 की मकर संक्रांति को विशेष फलदायी माना जा रहा है।
जानें पूरा मामला
14 जनवरी 2026 को दोपहर 03:07 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इसी दिन षट्तिला एकादशी, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इसे 22 वर्षों में सबसे खास बना देता है।

मुख्य बातें (Key Points)
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22 साल बाद संक्रांति और एकादशी एक साथ
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14 जनवरी 2026 को दोपहर 03:07 बजे संक्रांति
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सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का निर्माण
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दान, स्नान और खिचड़ी का विशेष महत्व
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उत्तरायण के साथ सकारात्मकता का आरंभ








