Magh Purnima 2026 : माघ पूर्णिमा का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन कल्पवास का विधिवत समापन होता है और श्रद्धालु पवित्र स्नान के साथ अपने व्रत को पूर्ण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के अवसर पर स्नान, ध्यान और दान करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को मनाई जाएगी।
माघ पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत 1 फरवरी को सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर होगी, जबकि इसका समापन 2 फरवरी को देर रात 3 बजकर 38 मिनट पर होगा। तिथि का अधिकांश भाग 1 फरवरी को पड़ने के कारण इसी दिन माघ पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।
माघ पूर्णिमा पर शुभ मुहूर्त
धार्मिक अनुष्ठानों के लिए माघ पूर्णिमा के दिन कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:24 से 6:17 तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:57 तक होगा।
विजय मुहूर्त दोपहर 2:23 से 3:07 तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त शाम 5:58 से 6:24 तक माना गया है।
इन समयों में स्नान, पूजा और दान को विशेष फलदायी माना जाता है।
दान और पूजा का विशेष महत्व
सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन तिल, गुड़, कंबल, अन्न, घी और दूध का दान करने से साधक को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में धन की कमी नहीं रहती। स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देने और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने की परंपरा भी प्रचलित है।
आर्थिक तंगी दूर करने से जुड़े उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी से जूझ रहा है तो माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को पीले कपड़े में हल्दी की सात गांठें बांधकर अर्पित करनी चाहिए। इसके बाद इसे तिजोरी में रखने से धन लाभ के योग बनते हैं।
इसी तरह, शाम के समय तुलसी के पौधे के पास देसी घी का दीपक जलाकर सात या ग्यारह बार परिक्रमा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास माना जाता है।
क्या करें और क्या न करें
माघ पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। इस दिन क्रोध, विवाद और झूठ से बचने की सलाह दी जाती है। काले रंग के कपड़े न पहनें और घर व मंदिर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को दान अवश्य करें।
आम श्रद्धालुओं पर असर
माघ पूर्णिमा का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और सामाजिक सहयोग का संदेश भी देता है। दान और सेवा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सहारा मिलता है, वहीं श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और संतोष की अनुभूति होती है।
माघ मास को स्नान, दान और तप का महीना माना जाता है। इसी माह की पूर्णिमा तिथि पर कल्पवास का समापन होता है। प्राचीन काल से माघ पूर्णिमा पर गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा की परंपरा चली आ रही है, जिसे आज भी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- माघ पूर्णिमा 2026 का पर्व 1 फरवरी को मनाया जाएगा
- तिथि की शुरुआत 1 फरवरी सुबह 5:52 से, समापन 2 फरवरी रात 3:38 पर
- स्नान, दान और पूजा का विशेष धार्मिक महत्व
- तिल, कंबल और अन्न दान से पुण्य और धन लाभ की मान्यता






