Magh Mela Prayagraj : प्रयागराज में पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ ही माघ मेले का शुभारंभ हो गया है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु मां गंगा में पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य लाभ ले रहे हैं। पहले स्नान पर्व के साथ ही कल्पवास की शुरुआत भी हो चुकी है। संगम तट पर आस्था, भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है।

पौष पूर्णिमा से माघ मेले का आगाज़
पौष पूर्णिमा के दिन से ही Prayagraj में माघ मेले की शुरुआत हो गई। पहले स्नान पर्व के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम तट पर पहुंची और मां गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
माघ मेले के दौरान भारत के अलग-अलग कोनों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। संगम की रेती पर फैली भक्ति और श्रद्धा का वातावरण लोगों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है।
कल्पवास की परंपरा हुई शुरू
पहले स्नान पर्व के साथ ही कल्पवास भी आरंभ हो गया है। ऐसी मान्यता है कि माघ मास में सभी देवी-देवता प्रयागराज में ही वास करते हैं, इसलिए संगम का यह स्थल कल्पवासियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
कुंभ जैसी भव्यता, वैसी ही व्यवस्थाएं
माघ मेला क्षेत्र का नजारा पिछले वर्ष लगे महाकुंभ की याद दिला रहा है। व्यवस्थाएं भी वैसी ही हैं और श्रद्धालुओं में उत्साह भी उतना ही दिखाई दे रहा है। संगम का कण-कण आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा नजर आ रहा है।
साधु-संतों की मौजूदगी बनी आकर्षण
मेला क्षेत्र में केदारनाथ से आए एक साधु अपनी अनोखी वेशभूषा के कारण चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सिर पर ताज जैसा मुकुट, आंखों में काला चश्मा, हाथों में डमरू और पैरों में पायल—उनका स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़
साधु-संतों का कहना है कि इस बार माघ मेले में आस्था की वही झलक दिख रही है जो महाकुंभ के दौरान देखने को मिली थी। कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
संगम तट पर भजन-कीर्तन की गूंज
माघ मेले में भजन-कीर्तन और साधना का विशेष महत्व है। संगम तट पर श्रद्धालु भगवान के भजन, कीर्तन और जप-तप में लीन नजर आ रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां से जाने का मन ही नहीं करता।
3 जनवरी से कल्पवास की शुरुआत
3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर कल्पवास की विधिवत शुरुआत हुई। लाखों कल्पवासी एक महीने तक तंबुओं के शहर में रहकर पूजा-अर्चना और साधना करेंगे। यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है।
विश्लेषण: आस्था का जीवंत रूप है माघ मेला
माघ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। कुंभ जैसी भव्यता, संगम की पवित्रता और कल्पवास की साधना—ये सभी मिलकर प्रयागराज को आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना देते हैं।

जानें पूरा मामला
पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत हुई। संगम तट पर श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया और इसके साथ ही कल्पवास आरंभ हुआ। पूरे माघ महीने तक संगम की रेती पर आस्था, साधना और भक्ति का यह सिलसिला चलता रहेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- पौष पूर्णिमा से प्रयागराज में माघ मेले का शुभारंभ
- पहले स्नान पर्व के साथ कल्पवास शुरू
- देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे संगम तट
- कुंभ जैसी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण








