Magh Mela Prayagraj : प्रयागराज की संगम नगरी में चल रहे माघ मेले के दौरान शनिवार 24 जनवरी की शाम बड़ा हंगामा सामने आया। सेक्टर-4 में स्थित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर में कुछ लोगों ने लाठी-डंडों और झंडों के साथ जबरन घुसने की कोशिश की। इस दौरान नारेबाजी, धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण माहौल बन गया। घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उनकी और शिविर में मौजूद श्रद्धालुओं की जान को खतरा था।
घटना शाम करीब 6:30 से 7:30 बजे के बीच की बताई जा रही है। चश्मदीदों के मुताबिक, कुछ लोग हाथों में डंडे और झंडे लेकर शिविर के बाहर पहुंचे और जबरन अंदर जाने की कोशिश करने लगे। शिविर सेवकों ने उन्हें रोका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई। काफी प्रयासों के बाद हालात को शांत कराया गया और हंगामा कर रहे लोगों को बाहर कर दिया गया।
“हाथों में हथियार, कुछ भी कर सकते थे”
हंगामे के बाद मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि बाहर से आए लोगों के पास डंडों के साथ-साथ धारदार हथियार भी थे। उन्होंने दावा किया कि झंडों में डंडे, धारदार हथियार और यहां तक कि पिस्तौल तक होने की बात सामने आई है।
उनका कहना था कि अगर शिविर में मौजूद लोग चाहते तो उन लोगों को पकड़ सकते थे, लेकिन हालात बिगड़ने की आशंका के चलते शांति से उन्हें बाहर कर दिया गया।
“पहले से साजिश की सूचना मिली थी”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी आरोप लगाया कि यह सब सुनियोजित था। उनके मुताबिक, प्रशासनिक बैठकों से जुड़े कुछ अधिकारियों से पहले ही उन्हें गड़बड़ी की आशंका की सूचना मिल गई थी। इसी वजह से उन्होंने घटना से ठीक एक दिन पहले अपने शिविर के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे।
उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों के कारण ही हंगामा करने वाले ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाए और जल्द ही पीछे हट गए।
नारेबाजी और राजनीतिक रंग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिविर के बाहर कथित तौर पर “आई लव बुलडोजर बाबा” जैसे नारे लगाए गए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके समर्थक बुलडोजर बाबा कहकर संबोधित करते हैं, इसलिए इस घटना को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले पालकी स्नान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राज्य सरकार और प्रशासन की आलोचना की थी।
पुलिस में शिकायत, सुरक्षा बढ़ी
घटना के बाद शिविर प्रभारी की ओर से कल्पवासी थाना में लिखित शिकायत दी गई है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने शिविर में जबरन घुसकर उपद्रव करने की कोशिश की और मारपीट पर उतारू हो गए।
शिकायत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, शिविर में रह रहे श्रद्धालुओं और शिविर की संपत्ति की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। पुलिस से एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और शिविर के आसपास पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने की मांग की गई है। इसके बाद पुलिस ने शिविर के चारों ओर सुरक्षा बढ़ा दी है।
पालकी छोड़ी, वैनिटी वैन में रह रहे स्वामी
इस घटना के बाद सुरक्षा कारणों से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी पालकी छोड़ दी है और फिलहाल वैनिटी वैन में रह रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने किसी अनहोनी की आशंका जताई थी। बताया गया है कि शिविर के अंदर और बाहर कुल 12 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं सामने
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने फैसले पर डटे हुए हैं और इस पूरे विवाद में कई “नकली चेहरों” की पहचान हुई है। उन्होंने दावा किया कि एक-एक सनातनी स्वामी के साथ खड़ा है।
श्रद्धालुओं में डर, प्रशासन पर सवाल
माघ मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में इस तरह की घटना ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिविर में मौजूद लोगों का कहना है कि अगर समय रहते हालात न संभाले जाते तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। प्रशासन से मांग की जा रही है कि संतों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
मोहनी अमावस्या पर पालकी स्नान को लेकर विवाद के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले सात दिनों से शिविर के बाहर ही बैठे थे। इसी मुद्दे पर उन्होंने प्रशासन पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था। अब माघ मेला के दौरान हुए इस हंगामे ने पूरे विवाद को और गहरा कर दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 24 जनवरी की शाम माघ मेला शिविर में हंगामा
- लाठी-डंडों और झंडों के साथ जबरन घुसने की कोशिश
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जान का खतरा बताया
- पुलिस से एफआईआर और अतिरिक्त सुरक्षा की मांग







