LPG Gas Cylinder Crisis India ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध और मिडिल ईस्ट में गहराते एनर्जी क्राइसिस के चलते भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। डोमेस्टिक सिलेंडर ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर लगभग ₹116 महंगा हो गया है। ₹900 के पार पहुंच चुका सिलेंडर अब ब्लैक मार्केट में कहीं-कहीं ₹1000 से लेकर ₹2000 तक बिक रहा है, जिससे करोड़ों भारतीय परिवारों की रसोई पर सीधा संकट आ गया है।
गैस बुकिंग ऐप क्रैश, जगह-जगह पैनिक बाइंग का माहौल
इस LPG Gas Cylinder Crisis का असर इतना गहरा है कि सिलेंडर बुक करने वाला आईबीआरएस (IBRS) ऐप तक क्रैश कर गया। देश भर से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी लाइनों में खड़े नजर आ रहे हैं। कहीं सिलेंडर के लिए मारपीट हो रही है तो कहीं लोग सिर पर सिलेंडर उठाकर ले जाते दिख रहे हैं। पूरे देश में पैनिक बाइंग का माहौल बन गया है।
झांसी में तो सिलेंडर से भरा एक पूरा ट्रक किसी ने चुराकर एजेंसी में बेच दिया, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। गाड़ियों की टंकी और यहां तक कि पानी की टंकी में भी लोग पेट्रोल भरवा रहे हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी पूरे देश में बेलगाम हो चुकी है।
20% रेस्टोरेंट पहले ही प्रभावित, आधे बंद होने की कगार पर
सिर्फ एक हफ्ते के अंदर ही इस LPG Gas Cylinder Crisis ने खाने-पीने के कारोबार की कमर तोड़ दी है। करीब 20 प्रतिशत रेस्टोरेंट पहले ही प्रभावित हो चुके हैं। रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक चला तो लगभग आधे रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर आ सकते हैं।
सबसे ज्यादा मार उन लोगों पर पड़ रही है जो इन रेस्टोरेंट में काम करते हैं: कारीगर, डिलीवरी बॉय और दिहाड़ी कामगार। मालिक तो दो दिन बंद रखकर गुजारा कर लेगा, लेकिन रोज कमाने-खाने वालों का क्या? शहरों में लोग इंडक्शन कुकटॉप खरीदने दौड़ पड़े, लेकिन वो भी आउट ऑफ स्टॉक हो गए।
क्यों आया LPG Gas Crisis: Strait of Hormuz बंद होने का सीधा असर
इस पूरे संकट की जड़ मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध में है। भारत रोजाना करीब 65 लाख गैस सिलेंडर इस्तेमाल करता है। देश में जितना एलपीजी यूज होता है, उसका लगभग 60 से 65 प्रतिशत विदेश से मंगाया जाता है। इस इंपोर्ट का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा वेस्ट एशिया से आता है, जो स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से होकर गुजरता है।
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने ईरान पर युद्ध छेड़ा, जिसके बाद ईरान ने यह अहम समुद्री रूट बंद कर दिया है और कुछ शिप्स पर हमले भी किए हैं। इससे बड़े कार्गो शिप्स के इंश्योरेंस प्रीमियम आसमान छू रहे हैं, क्योंकि अगर किसी जहाज पर हमला हो जाए तो अरबों डॉलर का नुकसान होगा। शिप मालिक इतने रिस्क में अपने जहाज चलाने को तैयार नहीं हैं। वैकल्पिक रूट अपनाने में ज्यादा समय और ज्यादा खर्चा लगता है, जिससे कीमतें और बढ़ जाती हैं।
भारत के पास कितने दिनों का एलपीजी रिजर्व?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह LPG Gas Cylinder Crisis कब तक टिकेगी। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, भारत के पास करीब 40 से 45 दिनों का एलपीजी रिजर्व है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर देश की रिफाइनरियों में डोमेस्टिक क्रूड ऑयल का प्रोडक्शन बढ़ाया जाए तो लगभग 2 महीने तक काम चल सकता है। लेकिन अगर यह स्थिति यूक्रेन-रूस युद्ध की तरह लंबी खिंची तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।
यह संकट सिर्फ एलपीजी तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध लंबा चला तो कच्चा तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल जाएगी।
सरकार ने उठाए कई कदम, ईरान से डिप्लोमेटिक बातचीत जारी
इस LPG Gas Cylinder Crisis से निपटने के लिए सरकार ने कई मोर्चों पर कदम उठाए हैं। एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू कर दिया गया है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम कसी जा सके। डोमेस्टिक प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं और वैकल्पिक स्रोतों तथा रूट्स की तलाश जारी है। सरकार ने यहां तक कहा है कि एलपीजी उपलब्ध न होने पर मिट्टी के तेल से खाना बनाया जा सकता है।
डिप्लोमेटिक स्तर पर भी भारत सरकार सक्रिय है। ईरान से अनुरोध किया गया है कि भारतीय शिप्स को स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से गुजरने दिया जाए, चाहे नेवल एस्कॉर्ट के साथ ही सही। इसका सकारात्मक नतीजा भी सामने आया है: ईरान सरकार ने खुद कहा है कि इंडियन ओशन की तरफ जाने वाले और खासतौर पर भारतीय कारोबार से जुड़े जहाजों को टैग किया जाएगा और उन्हें नहीं रोका जाएगा। यह भारतीय कूटनीति की एक अहम कामयाबी मानी जा रही है।
ईरान ने युद्ध विराम के लिए रखीं तीन बड़ी शर्तें
ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। पहली: ईरान को एक संप्रभु देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाए और उस पर लगे सभी प्रतिबंध (Sanctions) हटाए जाएं। दूसरी: युद्ध में हुए नुकसान का पूरा मुआवजा (Reparations) दिया जाए। तीसरी: भविष्य में ऐसे किसी हमले की पुनरावृत्ति न हो, इसकी ठोस गारंटी मिले।
इस युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनई की मौत हो चुकी है और पूरी ईरानी लीडरशिप को निशाना बनाया गया है। कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन में भी हमले हो रहे हैं। इसी बीच उत्तर कोरिया ने भी अपनी नेवल क्रूज से स्ट्रेटेजिक मिसाइल का टेस्ट किया, जिससे वैश्विक तनाव और गहरा गया है।
पीलीभीत की महिला से लेकर दिल्ली तक: दुनिया कितनी जुड़ी है
इस LPG Gas Cylinder Crisis को समझने के लिए बस एक उदाहरण काफी है। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के एक छोटे से गांव की महिला इसलिए परेशान है क्योंकि हजारों किलोमीटर दूर ट्रंप ने ईरान पर युद्ध छेड़ दिया। यही दुनिया के इंटरकनेक्टेड होने का असली मतलब है: धमाके मिडिल ईस्ट में हो रहे हैं, लेकिन उसका शोर भारत के हर घर की रसोई तक पहुंच रहा है।
जो लोग गेटेड सोसाइटी में रहते हैं, जिनके घर पाइपलाइन गैस आती है, उन्हें शायद इस संकट की गंभीरता का अंदाजा न हो। लेकिन जिन करोड़ों परिवारों का बजट पहले से तंग है, उनके लिए सिलेंडर में ₹50 की बढ़ोतरी भी पूरे महीने का हिसाब-किताब बिगाड़ देती है। स्टॉक मार्केट में गिरावट आई है, दवाइयां भी महंगी हो रही हैं और आगे और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
क्या यह सिर्फ भारत का संकट है?
यह समझना जरूरी है कि यह एनर्जी क्राइसिस सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का है। मिडिल ईस्ट में बमबारी हो रही है, ट्रेड रूट्स प्रभावित हैं और हर वो देश मुश्किल में है जो एनर्जी के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है। इस संकट को किसी एक पार्टी या सरकार की पॉलिसी का नतीजा बताना पूरी तरह सही नहीं होगा।
हालांकि, यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि जब ऐसे संकट की आशंका पहले से थी तो पर्याप्त स्ट्रेटेजिक रिजर्व क्यों नहीं बनाए गए? जहां सरकार ने डिप्लोमेसी और एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के जरिए कदम उठाए हैं, वहीं लंबी अवधि की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी पर गंभीर मंथन की जरूरत है। फिलहाल, इस चुनौती में जनता और सरकार दोनों को मिलकर आगे बढ़ना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- LPG Gas Cylinder Crisis के चलते डोमेस्टिक सिलेंडर ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर ₹116 महंगा हुआ, ब्लैक मार्केट में ₹1000 से ₹2000 तक पहुंचे दाम।
- भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 60-65% इंपोर्ट करता है, जिसका 90% स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से आता था जो ईरान ने बंद कर दिया है।
- भारत के पास करीब 40-45 दिनों का एलपीजी रिजर्व, सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू किया और ईरान से डिप्लोमेटिक बातचीत जारी।
- 20% रेस्टोरेंट पहले ही प्रभावित, लंबे समय तक संकट रहा तो आधे रेस्टोरेंट बंद होने की आशंका, सबसे ज्यादा मार गरीब परिवारों और दिहाड़ी कामगारों पर।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








