LPG Crisis को लेकर संसद में जोरदार हंगामा हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि देश में गैस सिलेंडर का संकट “आया नहीं, बल्कि मोदी सरकार ने लाया है।” राज्यसभा में एप्रोप्रिएशन बिल पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने कहा कि जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का 60 फीसदी हिस्सा ईरान के कब्जे में आता है और भारत की जरूरत का 60 फीसदी कच्चा तेल और 50 फीसदी गैस इसी रास्ते से आती है, तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान से बेवजह झगड़ा क्यों किया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि सदन को होर्मुज समुद्री मार्ग खुलने की गलत जानकारी दी जा रही है, जबकि हकीकत यह है कि अभी मात्र 2 जहाज ही आए हैं और 22 जहाज अभी भी फंसे हुए हैं। संजय सिंह ने यह भी कहा कि सरकार ने संकट के बीच घरेलू गैस में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर में ₹115 की बढ़ोतरी करके जनता का दर्द और बढ़ा दिया है।
“यह आई हुई विपत्ति नहीं, लाई गई विपत्ति है”: संजय सिंह का तीखा हमला
LPG Crisis पर संसद में संजय सिंह ने सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार कह रही है कि यह विपत्ति का काल है और विपक्ष को साथ देना चाहिए। लेकिन सरकार से पूछना चाहते हैं कि यह विपत्ति आई कैसे है।
संजय सिंह ने कहा, “यह कोई आई हुई विपत्ति नहीं, बल्कि लाई गई विपत्ति है। यह एक लाया हुआ संकट और लाई गई समस्या है। इस प्रायोजित संकट को लाने वाले सबसे बड़े व्यक्ति देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।”
उन्होंने एप्रोप्रिएशन बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि मंत्री ने सदन से मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए ₹57,000 करोड़ की मंजूरी मांगी है। लेकिन सवाल यह है कि अगर सरकार ने समय रहते सही कूटनीतिक कदम उठाए होते तो इतनी बड़ी रकम की जरूरत ही नहीं पड़ती।
“होर्मुज का 60% ईरान का, तो बेवजह झगड़ा क्यों किया?”
LPG Crisis की जड़ में ईरान के साथ बिगड़े रिश्तों को बताते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह बात न देश की जनता को पता थी, न पीठ को और न ही विपक्ष को। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और देश के विदेश मंत्री को यह बात अच्छी तरह पता थी कि Strait of Hormuz से भारत की जरूरत का 60 फीसदी कच्चा तेल और 50 फीसदी गैस आती है।
संजय सिंह ने सवाल उठाया, “जब प्रधानमंत्री को यह बात पता थी कि होर्मुज समुद्री मार्ग का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ईरान के रास्ते और उसके कब्जे में आता है, तो फिर ईरान से ‘तू कौन मैं खामखा’ वाला जबरदस्ती का झगड़ा करने की क्या जरूरत थी? सरकार ने जानबूझकर देश को संकट में डाला है।”
यह आरोप बेहद गंभीर है क्योंकि संजय सिंह सीधे प्रधानमंत्री पर उंगली उठा रहे हैं कि देश का यह ऊर्जा संकट प्राकृतिक नहीं बल्कि सरकार की कूटनीतिक विफलता का नतीजा है।
“मोदी ने खुद ईरान को मित्र बताया, फिर खामेनेई की मौत पर खामोश रहे”
LPG Crisis को लेकर संजय सिंह ने ईरान के साथ भारत के पुराने रिश्तों का विस्तार से हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ईरान भारत का परंपरागत मित्र है और यह बात खुद प्रधानमंत्री ने मानी है।
संजय सिंह ने बताया कि जब प्रधानमंत्री मोदी ईरान की यात्रा पर गए थे, तो उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था कि “भारत और ईरान की दोस्ती इतिहास से भी पुरानी है।” उन्होंने वहां के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को सातवीं शताब्दी की कुरान की पांडुलिपि भेंट की थी। उन्होंने चाबहार पोर्ट का समझौता किया था और खूब बखान किया था कि इससे भारत का व्यापार बढ़ेगा।
संजय सिंह ने कहा, “2019 तक भारत को ईरान से सस्ता तेल और गैस रुपए में मिलती थी। लेकिन आज भारत के प्रधानमंत्री खामेनेई की मौत पर खामोश रहते हैं। 160 स्कूली बच्चे मार दिए जाते हैं, तब भी वे खामोश रहते हैं।”
“ईरानी नौसैनिक मेहमान मारे गए, मोदी ने शोक तक नहीं जताया”
LPG Crisis की पृष्ठभूमि समझाते हुए संजय सिंह ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भारत ने ईरानी नौसेना को अपने युद्धाभ्यास में बुलाया था। जब ईरानी नौसेना का जहाज वापस जा रहा था, तो अमेरिका द्वारा ईरान के 100 नौसैनिक मार दिए गए।
संजय सिंह ने कहा, “हमारे मेहमान मारे गए, लेकिन प्रधानमंत्री खामोश रहे और शोक संवेदना का एक शब्द तक नहीं बोला। जो देश हमारा मित्र था, उसके साथ हमने ऐसा व्यवहार किया। और अब जब ईरान ने होर्मुज बंद कर दिया तो हम चिल्ला रहे हैं कि गैस नहीं मिल रही।”
यह आरोप अगर सच है तो यह भारत की कूटनीतिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। जिस देश से भारत का 60% तेल और 50% गैस आता है, उसके साथ रिश्ते बिगाड़ना और फिर संकट में फंसना, यह सवाल जरूर उठता है कि सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कितनी दूरदर्शिता दिखाई।
“होर्मुज खुल गया है, यह सदन को गलत जानकारी”: 22 जहाज अभी फंसे
LPG Crisis पर संजय सिंह ने सबसे बड़ा खुलासा यह किया कि सरकार सदन को गलत जानकारी दे रही है। उन्होंने कहा कि सदन में आज यह कहा गया कि होर्मुज समुद्री मार्ग खुल गया है, लेकिन यह सच नहीं है।
संजय सिंह ने कहा, “होर्मुज समुद्री मार्ग से अभी मात्र 2 जहाज ही आए हैं, जबकि 22 जहाज अभी भी रुके हुए हैं। सदन को ऐसी गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए।”
अगर संजय सिंह का दावा सही है कि 22 जहाज अभी भी फंसे हैं तो इसका मतलब है कि LPG संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। सरकार ने भले ही शिवालिक और नंदा देवी जैसे दो जहाजों को सुरक्षित निकालकर राहत का दावा किया हो, लेकिन 22 और जहाजों का फंसा होना बताता है कि स्थिति अभी गंभीर बनी हुई है।
संकट के बीच गैस के दाम बढ़ाए: घरेलू में ₹60, कमर्शियल में ₹115 की वृद्धि
LPG Crisis के बीच संजय सिंह ने सरकार पर एक और बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में गैस सिलेंडर को लेकर हाहाकार मचा है, लोग कतारों में खड़े हैं, कालाबाजारी हो रही है, ऐसे कठिन समय में सरकार ने गैस के दाम और बढ़ा दिए हैं।
संजय सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹115 की बढ़ोतरी कर दी है। उनका सवाल था कि जब देश ऊर्जा संकट से जूझ रहा है और आम आदमी पहले से ही परेशान है, तो ऐसे समय में दाम बढ़ाना कहां की समझदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार को “झूठ बोलने के बजाय सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए” और संकट को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए।
चाबहार पोर्ट और 2019 तक सस्ता तेल: क्या खोया भारत ने
LPG Crisis की पृष्ठभूमि में संजय सिंह ने भारत-ईरान संबंधों के इतिहास की एक अहम कड़ी भी जोड़ी। उन्होंने बताया कि 2019 तक भारत को ईरान से सस्ता तेल और गैस रुपए में मिलती थी। ईरान के साथ भारत के मित्रतापूर्ण संबंध थे और दोनों देश कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे थे।
भारत सरकार ने चाबहार पोर्ट में सैकड़ों करोड़ रुपए का निवेश किया था। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की व्यापारिक रणनीति का अहम हिस्सा बताया था और कहा था कि अब पाकिस्तान से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अब अमेरिका ने चाबहार पोर्ट के पास ही बमबारी कर दी है, जिससे भारत का पूरा निवेश खतरे में आ गया है।
संजय सिंह का सवाल है कि जब ईरान से इतने फायदे मिल रहे थे, तो फिर सरकार ने उनसे रिश्ते क्यों बिगाड़े। अगर भारत ने ईरान के साथ अपने पुराने मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखे होते तो शायद आज यह ऊर्जा संकट नहीं होता।
₹57,000 करोड़ की मांग: क्या सच में जरूरी है इतनी बड़ी रकम
LPG Crisis से निपटने के लिए सरकार ने संसद से ₹57,000 करोड़ की मंजूरी मांगी है। संजय सिंह ने इस मांग पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर सरकार ने पहले से सही विदेश नीति अपनाई होती, ईरान के साथ रिश्ते बिगाड़े नहीं होते और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दूरदर्शी कदम उठाए होते, तो इतनी बड़ी रकम खर्च करने की नौबत ही नहीं आती।
यह ₹57,000 करोड़ आखिरकार जनता की जेब से ही आएगा, चाहे वो टैक्स के रूप में हो या महंगाई के रूप में। जब सरकार कहती है कि यह विपत्ति का काल है और सबको साथ देना चाहिए, तो विपक्ष का यह पूछना जायज है कि यह विपत्ति आई कैसे और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP सांसद संजय सिंह ने कहा LPG Crisis आया नहीं, बल्कि मोदी सरकार ने लाया है, ईरान से रिश्ते बिगाड़ना और खामेनेई की मौत पर खामोश रहना बताया संकट की जड़।
- संजय सिंह ने गंभीर आरोप लगाया कि Hormuz खुलने की गलत जानकारी दी जा रही है, अभी सिर्फ 2 जहाज आए, 22 जहाज अभी फंसे हैं।
- संकट के बीच सरकार ने घरेलू गैस में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर में ₹115 की बढ़ोतरी की, सरकार ने संसद से ₹57,000 करोड़ की मंजूरी मांगी।
- 2019 तक ईरान से रुपए में सस्ता तेल और गैस मिलती थी, मोदी ने चाबहार पोर्ट में निवेश किया, ईरान को मित्र बताया, लेकिन बाद में रिश्ते बिगाड़ दिए।








