Love Jihad RSS : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भोपाल में लव जिहाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को कानून से पहले परिवार और समाज के स्तर पर रोका जा सकता है। भोपाल के शिवनेरी भवन में आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि घर और परिवार में नियमित संवाद होगा तो इस तरह की समस्याओं पर अपने आप अंकुश लग जाएगा।
लव जिहाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर संघ प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब समाज में इस विषय को लेकर लगातार बहस और चिंता बनी हुई है।

परिवार से ही क्यों शुरू होती है रोकथाम
मोहन भागवत ने कहा कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कोई बेटी किसी अपरिचित व्यक्ति के बहकावे में कैसे आ जाती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण परिवार के भीतर संवाद की कमी है। जब माता-पिता और बच्चों के बीच खुलकर बातचीत नहीं होती, तो गलत दिशा में जाने की आशंका बढ़ जाती है।
उन्होंने जोर दिया कि घर में रोजमर्रा का संवाद केवल औपचारिक न हो, बल्कि ऐसा हो जिसमें बच्चे बिना डर अपनी बातें रख सकें।
लव जिहाद रोकने के लिए तीन स्तर का फार्मूला
संघ प्रमुख ने इस समस्या से निपटने के लिए तीन स्पष्ट स्तर बताए। पहला, परिवार के भीतर निरंतर और भरोसेमंद संवाद। दूसरा, बच्चियों को सावधानी, आत्मरक्षा और सही संस्कार देना ताकि वे किसी भी बहकावे में न आएं। तीसरा, जो लोग अपराध करते हैं, उनके खिलाफ प्रभावी निराकरण होना चाहिए, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।
महिलाओं की भूमिका पर जोर
मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। पहले महिलाएं समाज और परिवार की धुरी थीं, लेकिन बीच के दौर में हुए आक्रमणों के कारण जीवन में अस्थिरता आई। सुरक्षा के नाम पर महिलाओं पर तरह-तरह की बंदिशें लगाई गईं, जो उस समय की जरूरत थीं।
पुरानी परिस्थितियां बदलीं, सोच नहीं बदली
उन्होंने कहा कि आक्रमणों के बाद जब परिस्थितियां बदलीं, तब समाज पुरानी सोच से बाहर नहीं आ पाया। महाभारत काल के करीब एक हजार साल बाद धीरे-धीरे समाज का स्वाभाविक तरीका कमजोर पड़ता गया। सुरक्षा के नाम पर जो व्यवस्थाएं बनीं, वे समय के साथ बदलनी चाहिए थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पुरुषों की सोच बदलने की जरूरत
संघ प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि अब यह जरूरी है कि पुरुषों को यह समझाया जाए कि महिलाओं को घर में बंद रखना या यह कहना कि “बाकी सब हम संभाल लेंगे” अब सही तरीका नहीं है। वह परिस्थिति अब नहीं रही, इसलिए सोच और व्यवहार में बदलाव जरूरी है।
आम परिवारों पर इस बयान का असर
मोहन भागवत के इस बयान का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ता है। यह संदेश जाता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल बाहरी निगरानी से नहीं, बल्कि घर के भीतर भरोसे और संवाद से सुनिश्चित होती है। परिवार अगर सतर्क और जुड़ा रहेगा, तो कई समस्याएं शुरुआत में ही रुक सकती हैं।
जानें पूरा मामला
भोपाल के शिवनेरी भवन में आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने समाज, परिवार और महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से बात की। लव जिहाद को लेकर उन्होंने इसे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारी बताया।
मुख्य बातें (Key Points)
- मोहन भागवत ने लव जिहाद रोकने में परिवार की भूमिका को अहम बताया
- संवाद की कमी को समस्या की बड़ी वजह बताया
- रोकथाम के लिए तीन स्तर—संवाद, संस्कार और प्रभावी कार्रवाई
- महिलाओं और पुरुषों दोनों की सोच बदलने पर जोर








