Lohri 2026 Date : पंजाब और उत्तर भारत में लोहड़ी को सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत, रिश्तों की मिठास और परिवार के साथ जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। शादी के बाद जब पहला पर्व आता है, तो हर रस्म और हर परंपरा अपने आप में खास बन जाती है। खासकर नवविवाहित जोड़ों के लिए पहली लोहड़ी का महत्व कहीं ज्यादा होता है। साल 2026 में लोहड़ी 13 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी, जबकि संक्रांति का समय 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे रहेगा।

नवविवाहित जोड़ों के लिए पहली लोहड़ी क्यों है खास
पहली लोहड़ी वह अवसर होता है जब नई बहू या दामाद को पूरे परिवार और समाज के सामने औपचारिक रूप से अपनाया जाता है। यह सिर्फ पर्व नहीं, बल्कि आशीर्वाद, स्वीकार्यता और नए जीवन की शुरुआत का संकेत होता है। इसी वजह से इस दिन की हर परंपरा को खास ध्यान और श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।
कपड़ों को लेकर न करें ये गलती
लोहड़ी रंगों और उमंग का पर्व है। इस दिन बहुत सादे, फीके या काले-सफेद कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता। नवविवाहित महिलाओं के लिए लाल, पीला, नारंगी, हरा या चमकीले रंग पहनना शुभ माना गया है। फुलकारी दुपट्टा या पारंपरिक पंजाबी पोशाक लोहड़ी की रौनक को और बढ़ा देती है। पुरुषों के लिए कुर्ता-पजामा या जैकेट के साथ पारंपरिक पहनावा बेहतर रहता है।
अग्नि में आहुति देते समय बरतें सावधानी
लोहड़ी की सबसे अहम परंपरा पवित्र अग्नि से जुड़ी होती है। तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और मक्के के दाने अग्नि में अर्पित किए जाते हैं। कई लोग अनजाने में खाते-खाते उसी बर्तन से सामग्री उठाकर अग्नि में डाल देते हैं, जो अशुभ माना जाता है। अग्नि में अर्पित की जाने वाली सामग्री हमेशा अलग रखें और उसे झूठा न करें।

अग्नि परिक्रमा का सही समय क्यों जरूरी
शाम को जब अग्नि प्रज्वलित की जाती है, वही लोहड़ी का सबसे पवित्र समय माना जाता है। नवविवाहित जोड़ों के लिए अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करना सौभाग्य, सुख और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कोशिश करें कि इस समय पूजा और आहुति के दौरान आप मौजूद रहें, क्योंकि यही वह पल होता है जब पूरा परिवार एक साथ भविष्य के लिए प्रार्थना करता है।
उपहार और आशीर्वाद का महत्व
पहली लोहड़ी पर मिलने वाले उपहार सिर्फ वस्तुएं नहीं होते, बल्कि उनमें बड़ों का प्यार और आशीर्वाद जुड़ा होता है। उपहार छोटा हो या बड़ा, उसे मुस्कुराकर स्वीकार करें और बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। यही परंपरा रिश्तों को मजबूत बनाती है और परिवार में अपनापन बढ़ाती है।
शुभ समय और तिथि
लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। अग्नि प्रज्वलन का शुभ समय शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक बताया गया है। इस दौरान पूजा, परिक्रमा और आहुति करना विशेष फलदायी माना जाता है।
क्या है पृष्ठभूमि
लोहड़ी को नई शुरुआत, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्ध जीवन का प्रतीक माना जाता है। जब कोई जोड़ा पहली बार यह पर्व मनाता है, तो परिवार की उम्मीदें और दुआएं उनके साथ जुड़ जाती हैं। अगर इसी समय घर में किसी बच्चे का जन्म हुआ हो, तो लोहड़ी की खुशी और भी बढ़ जाती है और यह पर्व जीवनभर की याद बन जाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- लोहड़ी 2026 में 13 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।
- पहली लोहड़ी नवविवाहित जोड़ों के लिए बेहद खास मानी जाती है।
- अग्नि में आहुति देते समय झूठी सामग्री का प्रयोग न करें।
- शुभ समय में पूजा और परिक्रमा करना सौभाग्य का प्रतीक है।








