Punjab Rural Renaissance Package : पंजाब (Punjab) सरकार ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता और जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 15,000 तालाबों की सफाई के लिए 4573 करोड़ रुपए के ‘ग्रामीण पुनर्जागरण पैकेज’ (Rural Renaissance Package) के तहत एक अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इस योजना को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य गांवों में न केवल तालाबों की सफाई करना है, बल्कि सीवरेज ट्रीटमेंट (Sewage Treatment) की व्यवस्थाओं को भी थापर (Thapar) और सीचेवाल (Seechewal) मॉडल के जरिये दुरुस्त करना है।
इस परियोजना के तहत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध (Tarunpreet Singh Sondh) आज फतेहगढ़ साहिब (Fatehgarh Sahib) का दौरा करेंगे। सरकार का कहना है कि यह काम पहल के आधार पर किया जाएगा, ताकि जिन गांवों में हालत ज्यादा खराब है, वहां पहले सुधार हो सके।
तालाबों के कायाकल्प का रोडमैप
सूत्रों के अनुसार पिछले 10 से 15 सालों में पंजाब के कई गांवों के तालाब बदहाल हो गए थे। कुछ जगहों पर तो इनका उपयोग भी बंद हो चुका था। अब सरकार इन तालाबों की सफाई के साथ-साथ सिल्टिंग (Silt Removal) की व्यवस्था भी करेगी। इसके अतिरिक्त तालाबों के चारों ओर बैठने की उचित सुविधा और ट्रैक (Walking Track) बनाए जाएंगे ताकि गांव वालों को एक साफ और सुसज्जित स्थान मिल सके।
सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त फंड रखा गया है और इस बार गांवों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
सीचेवाल मॉडल पर विधानसभा में मचा बवाल
पंजाब सरकार ने विधानसभा सेशन (Assembly Session) के दौरान तालाबों को सीचेवाल मॉडल (Seechewal Model) से साफ करवाने की बात कही थी। हालांकि इस पर विपक्षी नेता प्रताप सिंह बाजवा (Pratap Singh Bajwa) ने आपत्ति जताई थी। बाजवा का तर्क था कि सीचेवाल कोई इंजीनियर नहीं बल्कि ठेकेदार है और यह कार्य किसी मान्यता प्राप्त एजेंसी जैसे पेक (PECF) से कराया जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर विधानसभा में काफी हंगामा हुआ और बाजवा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्ष के नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि संत सीचेवाल (Sant Seechewal) ने पर्यावरण संरक्षण के लिए असाधारण कार्य किए हैं, इसी कारण उन्हें राज्यसभा (Rajya Sabha) का सदस्य भी बनाया गया है।
पंजाब सरकार के इस नए मिशन से न केवल राज्य के गांवों में स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि जल संरक्षण (Water Conservation) की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।








