Land Registry Rule Change : जमीन की खरीद-फरोख्त में अब धोखाधड़ी और भू-माफियाओं के खेल पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। पारदर्शिता लाने के लिए निबंधन विभाग 1 फरवरी 2026 से आधार सत्यापन की अनिवार्य व्यवस्था लागू करने जा रहा है। अब रजिस्ट्री के समय खरीदार और विक्रेता के साथ-साथ गवाहों के आधार नंबर का भी मौके पर ही सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए जिले के सभी उप-निबंधक कार्यालयों को बायोमेट्रिक मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं।
UIDAI सर्वर से जुड़ा निबंधन विभाग का पोर्टल
एआईजी स्टांप सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि निबंधन विभाग के पोर्टल को UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के सर्वर से जोड़ दिया गया है।
जैसे ही पक्षकार बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाएंगे, दिल्ली स्थित केंद्रीय सर्वर से तत्काल उनकी पहचान की पुष्टि हो जाएगी। पहचान सही पाए जाने पर ही सॉफ्टवेयर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
यह व्यवस्था रियल टाइम में काम करेगी। कुछ ही सेकंड में पहचान की पुष्टि हो जाएगी और रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
फर्जी आधार से होने वाली धोखाधड़ी पर रोक
अभी तक केवल आधार की फोटोकॉपी से काम चल जाता था, जिससे फर्जी आधार कार्ड के जरिए दूसरों की जमीन बेचने की आशंका बनी रहती थी। नई व्यवस्था में यह संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
जिले की तीनों तहसीलों – सदर, बिसलपुर और पूनपुर में हर महीने सैकड़ों बेनामे (रजिस्ट्री) होते हैं। इनमें अब इस नई तकनीक से फर्जीवाड़े की गुंजाइश शून्य हो जाएगी।
पहले कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन की बेनामी रजिस्ट्री कर दी जाती थी। इससे असली मालिकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता था। अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग
स्टाफ को इस नई प्रणाली के संचालन की विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है। सभी उप-निबंधक कार्यालयों के कर्मचारियों को बायोमेट्रिक सिस्टम चलाने और UIDAI पोर्टल से डेटा वेरिफाई करने की पूरी जानकारी दी गई है।
ट्रेनिंग में यह भी बताया गया है कि अगर किसी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़े तो क्या करना है। इससे सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी।
फेस ऑथेंटिकेशन और OTP की भी सुविधा
नई व्यवस्था में केवल फिंगरप्रिंट ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के अन्य मानकों को भी जोड़ा गया है। यदि किसी बुजुर्ग या शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति की उंगलियों में निशान घिस जाने के कारण मैच नहीं होते, तो उनके लिए फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा पहचान) की सुविधा दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त विशेष परिस्थितियों में आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर OTP भेजकर भी सत्यापन किया जा सकेगा। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जिनके फिंगरप्रिंट साफ नहीं हैं।
मजदूर, किसान और बुजुर्ग लोगों के फिंगरप्रिंट अक्सर खराब हो जाते हैं। उनके लिए चेहरे की पहचान या OTP के जरिए वेरिफिकेशन की सुविधा बहुत उपयोगी होगी।
गवाहों का भी आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य
अभी तक रजिस्ट्री दफ्तरों में अक्सर गवाहों की पहचान को लेकर संशय रहता था। कई बार विवादित जमीनों में पेशेवर या फर्जी गवाह खड़े कर दिए जाते थे।
अब गवाहों का आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य होने से उनकी पहचान डेटाबेस में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगी। इससे भविष्य में कानूनी विवाद होने पर गवाह अपनी जिम्मेदारी से मुकर नहीं पाएगा।
फर्जी गवाहों का धंधा करने वाले लोगों पर भी अब लगाम लगेगी। उनकी पहचान रिकॉर्ड में आ जाएगी और बार-बार फर्जी गवाही देना मुश्किल हो जाएगा।
बेनामी संपत्तियों पर रोक
यह नियम बेनामी संपत्तियों के पंजीकरण को रोकने और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने वाले आम नागरिकों के हितों की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित होगा।
काले धन को सफेद करने के लिए अक्सर बेनामी संपत्तियां खरीदी जाती हैं। फर्जी नामों से जमीन-जायदाद खरीदी जाती है। नई व्यवस्था से यह सब रुक जाएगा।
हर लेन-देन में असली पहचान दर्ज होगी। इससे कालाधन रोकने में भी मदद मिलेगी और सरकारी खजाने को नुकसान नहीं होगा।
भू-माफियाओं पर कसेगा शिकंजा
भू-माफिया अक्सर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी या निजी जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं। फिर उन्हें बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन से इन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
जब हर व्यक्ति की पहचान UIDAI डेटाबेस से मैच करनी होगी तो फर्जीवाड़ा करना नामुमकिन हो जाएगा। भू-माफियाओं का धंधा चौपट हो जाएगा।
यह कदम आम लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। जिनकी जमीनें फर्जी तरीके से बेची जा रही थीं, अब वे सुरक्षित रहेंगी।
आम नागरिकों के लिए सुरक्षित निवेश
रियल एस्टेट में निवेश करने वाले आम नागरिकों के लिए यह व्यवस्था बड़ी राहत लेकर आएगी। अब जमीन खरीदते समय धोखाधड़ी का डर नहीं रहेगा।
खरीदार को पूरा भरोसा होगा कि विक्रेता असली मालिक है। सभी दस्तावेज सही हैं। गवाह भी असली हैं। इससे लोगों का विश्वास बढ़ेगा और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ेगा।
कई बार लोग विवाद के डर से जमीन खरीदने से कतराते हैं। नई व्यवस्था उनके डर को दूर करेगी।
पारदर्शिता में बड़ी छलांग
यह कदम सरकार की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है। इससे भूमि रिकॉर्ड प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। भ्रष्टाचार कम होगा।
हर लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। भविष्य में कभी भी इसे वेरिफाई किया जा सकेगा। यह ऐतिहासिक बदलाव है।
निबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था धीरे-धीरे पूरे राज्य में लागू की जाएगी। अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ जिलों में शुरू की जा रही है।
कानूनी विवादों में कमी आएगी
जमीन से जुड़े विवाद अदालतों में सालों लटके रहते हैं। फर्जी दस्तावेजों के कारण असली मालिक परेशान होते रहते हैं। नई व्यवस्था से ऐसे विवादों में भारी कमी आएगी।
जब सभी पक्षकारों की पहचान आधार से वेरिफाई होगी तो बाद में कोई झूठ नहीं बोल सकेगा। अदालतों का बोझ कम होगा और लोगों को न्याय जल्दी मिलेगा।
डिजिटल युग में भारत की भूमि प्रणाली
यह कदम भारत की भूमि प्रबंधन प्रणाली को 21वीं सदी में ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विश्व के कई विकसित देशों में पहले से ऐसी व्यवस्थाएं हैं।
भारत में भी अब तकनीक का इस्तेमाल करके भूमि लेन-देन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा रहा है। यह स्वागत योग्य कदम है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 1 फरवरी 2026 से जमीन रजिस्ट्री में आधार सत्यापन अनिवार्य
- खरीदार, विक्रेता और गवाहों सभी का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन होगा
- निबंधन विभाग का पोर्टल UIDAI सर्वर से जुड़ गया है
- फेस ऑथेंटिकेशन और OTP की भी सुविधा उपलब्ध
- भू-माफियाओं और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगेगी








