Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) समेत देशभर में चल रही कैश ट्रांसफर स्कीमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने चुनावों के दौरान मुफ्त सुविधाएं (Freebies) देने की घोषणाओं की कड़ी आलोचना करते हुए राज्य सरकारों से सवाल पूछा है कि आखिर वे इस तरह के फिजूल खर्च के बाद विकास के लिए पैसे कहां से लाएंगी? कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं? क्या सरकार को यह योजना बंद करनी पड़ सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार को चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं को लेकर कड़ी फटकार लगाई। भारत के चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले को लेकर दूसरे राज्यों को भी सख्त संदेश दिया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह के फिजूल खर्चे से देश का आर्थिक विकास बाधित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक पार्टियों को मुफ्त योजनाओं के माध्यम से संसाधन वितरित करने के बजाय ऐसी सुनियोजित नीतियां बनानी चाहिए जिनसे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
कोर्ट ने मुफ्त भोजन, मुफ्त बिजली और कैश ट्रांसफर स्कीमों (Unconditional Cash Transfer) पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकारें ऐसे ही मुफ्त की योजनाएं चलाती रहेंगी तो वे असली विकास के लिए धन की व्यवस्था कैसे करेंगी? यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश के कई राज्य सरकारें चुनाव से पहले तरह-तरह की मुफ्त योजनाओं की घोषणा कर रही हैं।
कितना बड़ा है मुफ्त योजनाओं का आर्थिक बोझ?
मुफ्त की योजनाओं के बढ़ते चलन पर पहले भी कई बड़े अर्थशास्त्री चिंता जाहिर कर चुके हैं। फरवरी 2026 में पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey 2025-26) के आंकड़े बताते हैं कि यह चिंता कितनी गंभीर है। सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में अनियंत्रित कैश ट्रांसफर स्कीमों पर कुल खर्च बढ़कर 1.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 1.25 प्रतिशत है, जो पहले 0.19 प्रतिशत हुआ करता था।
इससे भी गंभीर बात यह है कि ऐसी योजनाएं चलाने वाले लगभग आधे राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में हैं। ये राज्य परिसंपत्ति सृजन (Asset Creation) के बजाय उपभोक्ता खर्च को वित्त पोषित करने के लिए कर्ज ले रहे हैं। इसका मतलब है कि राज्य विकास के कामों के लिए पैसे न होने के बावजूद सिर्फ वोट पाने के लिए मुफ्त योजनाएं चला रहे हैं।
लाडली बहना योजना पर कितना खर्च कर रहा MP?
मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये (पहले 1000 रुपये थे, बाद में बढ़ाकर 1250 किए गए) की आर्थिक सहायता दी जाती है। राज्य में इस योजना का लाभ करीब 1.30 करोड़ महिलाओं को मिल रहा है। अगर इस योजना पर सालाना खर्च की गणना करें तो यह करीब 18,000 से 20,000 करोड़ रुपये के आसपास बैठता है। यह मध्य प्रदेश के कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा है।
क्या बंद हो सकती है लाडली बहना योजना?
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या लाडली बहना जैसी योजनाएं बंद होंगी? फिलहाल सरकार की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई सख्त दिशा-निर्देश जारी करता है या ऐसी योजनाओं पर रोक लगाता है, तो कई राज्य सरकारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि लाडली बहना योजना सिर्फ एक मुफ्त योजना नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार का चुनावी वादा भी रही है। माना जाता है कि इस योजना ने ही 2023 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में सरकार के लिए इसे बंद करना राजनीतिक रूप से भी आसान नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अन्य योजनाओं पर क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का असर सिर्फ लाडली बहना तक सीमित नहीं रहेगा। देशभर में कई राज्य सरकारें इस तरह की कैश ट्रांसफर योजनाएं चला रही हैं। झारखंड में मैया सम्मान योजना, दिल्ली में महिला सम्मान योजना, तमिलनाडु में कई कल्याणकारी योजनाएं और पश्चिम बंगाल में लक्ष्मी भंडार योजना जैसी तमाम योजनाएं हैं जिन पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण में साफ कहा गया है कि इस तरह की अनियंत्रित कैश ट्रांसफर स्कीमों से राज्यों का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में संभव है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनावी घोषणाओं और मुफ्त योजनाओं पर लगाम लगाने की कोशिश करे।
आम जनता पर क्या होगा असर?
अगर सुप्रीम कोर्ट ऐसी योजनाओं पर रोक लगाता है तो इसका सीधा असर करोड़ों लाभार्थियों पर पड़ेगा। लाडली बहना योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं के लिए यह राशि उनके दैनिक खर्चों में मददगार साबित हो रही है। ऐसे में अगर यह योजना बंद होती है तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
दूसरी तरफ, अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि इस तरह की योजनाओं से देश का विकास रुकता है। जो पैसा सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसे विकास के कामों पर लगना चाहिए, वह सीधे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इससे लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है।
मुख्य बातें (Key Points)
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी फ्रीबीज और मुफ्त योजनाओं की कड़ी आलोचना की है।
कोर्ट ने पूछा कि मुफ्त योजनाओं पर फिजूल खर्च के बाद विकास के लिए पैसे कहां से आएंगे?
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, कैश ट्रांसफर स्कीमों पर खर्च बढ़कर 1.7 लाख करोड़ रुपये हुआ।
मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना पर सालाना करीब 18-20 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
लाडली बहना समेत देशभर की ऐसी योजनाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, हालांकि अभी सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।








