Kyiv Diary : ‘ट्रेनों से बाहर धकेला जा रहा, यूक्रेन में फंसी छात्रा की आपबीती

The News Air- बेंगलुरु : यूक्रेन से एक और परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। खारकिव में फंसे कर्नाटक के छात्रों ने कहा है कि स्थानीय यूक्रेनी अधिकारी और सेना भारतीय छात्रों पर हमला कर रहे हैं और उन पर बंदूकें तान रहे हैं। कर्नाटक की रहने वाली हर्षिता अभी भी खारकिव में फंसी हुई हैं। उन्होंने मीडिया से उन कठिनाइयों के बारे में बात की, जिनका वे सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्रों को क्षेत्र से लोगों को निकालने के लिए व्यवस्थित ट्रेनों में चढ़ने की इजाजत नहीं दी जा रही है।

हर्षिता ने कहा, ‘भारतीय छात्रों को ट्रेनों से बाहर धकेला जा रहा है, उन्हें चढ़ने नहीं दिया जा रहा है, अगर उनसे सवाल किया गया तो उनके साथ मारपीट की जा रही है और उन पर बंदूक तान दी जा रही है।’ उन्होंने कहा, ‘जब ट्रेनें प्लैटफॉर्म पर आती हैं, तो दरवाजे बंद हो जाते हैं। वे केवल यूक्रेनियों को ट्रेनों में चढ़ने देते हैं। यूक्रेनियन में भी, बच्चों को पहले सवार किया जाता है, बाद में उनकी माताओं और फिर अन्य महिलाओं और अंत में यूक्रेनी पुरुषों को अंदर जाने दिया जाता है।’

‘ले रहे हैं 15 हजार रुपये, फिर भी मदद नहीं’

हर्षिता ने कहा कि भारतीय छात्र ट्रेनों में चढ़ने में सक्षम नहीं हैं। उनसे प्रति व्यक्ति साढ़े सात से 15 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं और भुगतान करने के बाद भी भारतीयों को इजाजत नहीं दी जा रही है। हम पांच से छह दिनों तक बंकरों में रहे। उन्होंने कहा, ‘लगभग 8 से 10 मिसाइलें उस रेलवे स्टेशन के बहुत करीब से दागी गईं, जहां मैं खड़ी थी।

जब भी भारतीयों ने उनसे ट्रेनों में चढ़ने की अनुमति नहीं देने के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बंदूकें तान दीं और हमें धमकाया।’ हर्षिता ने कहा, ‘वे सभी दूतावास से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे कुछ नहीं कर रहे हैं। ट्रेन स्टेशन पर, अधिकारी यूक्रेनियों की पिटाई नहीं कर रहे हैं। भारतीयों को प्रताड़ित किया जा रहा है, ट्रेन में भारतीय छात्रों को बाहर धकेला जा रहा है और पीटा जा रहा है।

ऐसी कई घटनाएं हैं जहां भारतीयों को बंकर छोड़ने के लिए कहा गया है। यूक्रेनियन भारतीय छात्रों को बता रहे हैं कि भारत उनका समर्थन कर रहा है तो हमें उनकी मदद क्यों करनी चाहिए?’

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