केजरीवाल ने राजनैतिक लाभ कमाने के लिए दिल्ली मॉडल स्कूलों के विज्ञापन पर बर्बाद किये करोड़ों रुपए

चंडीगढ़, 10 जून:
पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी किये परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडैक्स (पीजीआई) के आधार पर केजरीवाल सरकार पर बरसते हुये कहा कि दिल्ली सरकार को मानक स्कूल शिक्षा माडल लागू करने संबंधी पंजाब से सीखना चाहिए। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निवेश करने की बजाय करदाताओं के पैसे विज्ञापन मुहिमों पर बरबाद किये हैं।

कैबिनेट मंत्री ने आज यहां पंजाब भवन में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से स्कूल शिक्षा विभाग के अध्यापकों और स्कूल शिक्षा विभाग के समूचे स्टाफ को स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में अग्रणी राज्य बनने के लिए बधाई देने के लिए वर्चुअल प्रोग्राम में शिरक्त कर रहे थे।      
विजय इंदर सिंगला ने मुख्यमंत्री के निरंतर समर्थन और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए उनका धन्यवाद किया और भरोसा दिया कि शिक्षा विभाग अगले साल 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए अपने प्रदर्शन में सुधार लाने की अपनी कोशिशें जारी रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश में चोटी का स्थान बरकरार रखने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जायेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब ने बुनियादी ढांचे और सहूलतों के क्षेत्र में शत-प्रतिशत अंक (150/150)  प्राप्त किये जिसमें क्लासरूम, लैबें, शौचालय, पीने वाले पानी और पुस्तकालय की उपलब्धता शामिल है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा पंजाब ने ईक्विटी(228/230)  और एक्सैस (79/80) डोमेन में भी बहुत बढिय़ा प्रदर्शन किया है जिसमें कमजोर वर्गों के बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करना, विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए उपकरण, दाखिला अनुपात, स्कूल में बने रहने की दर, संचार दर और स्कूलों की उपलब्धता शामिल थे।
सिंगला ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने स्रोतों के सर्वोत्त्म प्रयोग को भी यकीनी बनाया है क्योंकि शिक्षा विभाग ने 100 प्रतिशत फंडों का प्रयोग उल्टी बोली प्रक्रिया वाले जैम पोर्टल के द्वारा सबसे पारदर्शी ढंग से किया है। उन्होंने आगे कहा कि फंडों का समय पर और सही प्रयोग ने विभाग को अगली किस्तों को समय पर प्राप्त करने योग्य बनाया है। उन्होंने कहा कि इसके इलावा, नयी पहलकदमियां और सुधार भी स्कूल शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में सहायक हुए हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट स्कूल नीति, आनलाइन तबादला नीति, विद्यार्थियों को मुफ्त स्मार्टफोनों का वितरण, प्री-प्राइमरी क्लासों की स्कूलों में शुरूआत और महामारी के मुश्किल समय के दौरान आनलाइन क्लासों के जरिये शिक्षा के मानक स्तर को कायम रखना, मुख्य कारक थे जो राज्य को बेहतर परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडैक्स हासिल करने में सहायक सिद्ध हुए।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सिर्फ परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडैक्स ही नहीं बल्कि अन्य मापदण्डों में भी स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में अथाह सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य ने पिछले चार सालों के दौरान दाखिलों में 29 प्रतिशत का विस्तार दर्ज किया है और बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में सरकारी स्कूलों ने प्राईवेट स्कूलों को भी पछाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के हर पहलू में विस्तार दर्ज किया गया है जोकि अन्य राज्यों के लिए मिसाल है।

Leave a Comment