Jewar Airport Launch के साथ भारत के एविएशन सेक्टर में एक नया इतिहास रच दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन कर दिया है। यह एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर में बना यह Jewar Airport पूरी तरह तैयार होने के बाद एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा और आकार में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब ढाई गुना बड़ा होगा।
24 साल पुराना सपना हुआ साकार
Jewar Airport Launch की कहानी कोई नई नहीं है। इस एयरपोर्ट का सपना साल 2001 में तब शुरू हुआ जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने सबसे पहले इसका प्रस्ताव रखा था। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस प्रोजेक्ट की रिपोर्ट को मंजूरी भी दे दी थी।
लेकिन उसके बाद कई सालों तक यह योजना अधर में लटकी रही। बीच की सरकारों ने इस एयरपोर्ट को कभी हरियाणा, कभी राजस्थान तो कभी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में ले जाने की कोशिश की, मगर कुछ ठोस नहीं हो सका। फिर आया साल 2014 और इसी साल इस योजना को नई उड़ान मिली।
PM मोदी ने रखी थी नींव, साढ़े चार साल में तैयार हुआ पहला चरण
2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनका सपना है कि हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई सफर कर सके। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने खुद Jewar Airport की नींव रखी। करीब साढ़े चार साल की मेहनत के बाद अब इसका पहला चरण पूरी तरह तैयार हो चुका है और आज इसके उद्घाटन के साथ दशकों पुराना सपना हकीकत में बदल गया है।
कितना बड़ा है Jewar Airport: आंकड़े चौंका देंगे
Noida International Airport का पहला चरण 1034 हेक्टेयर जमीन पर बनकर तैयार हुआ है, जबकि पूरा प्रोजेक्ट 5100 हेक्टेयर में फैलेगा। इतने विशाल क्षेत्रफल के साथ Jewar Airport पूरी तरह विकसित होने के बाद एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा।
पहले चरण में 3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा एक रनवे बनकर तैयार है। आगे चलकर कुल छह रनवे बनाने की योजना है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 9,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे चार चरणों में साल 2050 तक पूरा किया जाएगा।
PPP मॉडल पर बना, स्विट्जरलैंड की कंपनी निभा रही अहम भूमिका
Jewar Airport Launch की एक और खास बात यह है कि इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बनाया जा रहा है। इस एयरपोर्ट को डेवलप करने की जिम्मेदारी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की है, जिसमें स्विट्जरलैंड की जूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG बड़ी भूमिका निभा रही है।
इसी कंपनी की 100% सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई है, जो अगले 40 साल तक Jewar Airport का संचालन और रखरखाव करेगी। यानी यह एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर चलेगा और विश्व स्तरीय सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी।
Jewar Airport की 6 बड़ी खूबियां जो इसे बनाती हैं खास
1. कोहरे में भी उड़ानें रहेंगी जारी: Noida International Airport के रनवे को इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) जैसी अल्ट्रा मॉडर्न तकनीक से लैस किया गया है। इसका मतलब यह है कि घने कोहरे, भारी बारिश और खराब मौसम में भी जब रनवे पर सिर्फ 50 मीटर तक की विजिबिलिटी हो, तब भी विमानों का आवागमन बिना किसी रुकावट के जारी रह सकता है। उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान फ्लाइट देरी और कैंसिलेशन की जो बड़ी समस्या होती है, Jewar Airport उसे काफी हद तक कम कर देगा। यह खबर उन लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत है जो हर साल सर्दियों में कोहरे की वजह से घंटों एयरपोर्ट पर अटके रहते हैं।
2. नेट जीरो कार्बन एयरपोर्ट: Jewar Airport देश का पहला ऐसा हवाई अड्डा है जिसे नेट जीरो कार्बन के लक्ष्य के साथ डिजाइन किया गया है। यहां प्रदूषण को शून्य करने की पूरी कोशिश की गई है। एयरपोर्ट की कुल ऊर्जा जरूरतों का 55% हिस्सा हरित ऊर्जा यानी ग्रीन एनर्जी के माध्यम से पूरा होगा। टाटा पावर के सहयोग से सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिनसे 13 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। साथ ही पवन ऊर्जा से 10.8% ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। एयरपोर्ट की सभी सुविधाओं के लिए बिजली चालित वाहनों और मशीनों का इस्तेमाल होगा।
3. मल्टीमॉडल कारगो हब: Jewar Airport पर सालाना 2.5 मीट्रिक टन क्षमता वाला एक मल्टीमॉडल कारगो हब बनाया गया है। इससे व्यापार और सामान की आवाजाही बेहद तेज होगी। यह सुविधा कारोबारियों और निर्यातकों के लिए गेमचेंजर साबित होगी।
4. एविएशन हब के रूप में विकास: Noida International Airport को सिर्फ पैसेंजर एयरपोर्ट की तरह नहीं, बल्कि एक पूर्ण एविएशन हब के तौर पर तैयार किया जा रहा है। यहां मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग (MRO) तथा एयर कारगो की सुविधाएं एक ही जगह पर मिलेंगी। इसका मतलब है कि विमानों की मरम्मत और सर्विसिंग के लिए अब विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी।
5. बड़े विमानों के लिए तैयार: Jewar Airport पर 24 कोड-C (मध्यम आकार के विमान) और 2 कोड-D तथा कोड-F विमानों के लिए पार्किंग स्टैंड बनाए गए हैं। एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग (ARFF) कैटेगरी-9 की हाई सिक्योरिटी कैटेगरी में शामिल किया गया है। इसकी वजह से यहां बोइंग 777 जैसे बड़े और लंबी दूरी के विमानों का भी संचालन आसानी से हो सकेगा।
6. अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था: Jewar Airport की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के पास होगी, जिसमें 1047 जवान हर समय तैनात रहेंगे। एयरपोर्ट को हाई सिक्योरिटी कैटेगरी में रखा गया है, जिससे यात्रियों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
कहां-कहां के लिए उड़ेंगी फ्लाइट
Jewar Airport Launch के बाद शुरुआती दौर में यहां से देश के कई बड़े शहरों के लिए उड़ानें शुरू होंगी। इनमें लखनऊ, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और वाराणसी प्रमुख हैं। माना जा रहा है कि शुरुआत में हर दिन करीब 150 फ्लाइट ऑपरेट होंगी।
इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने Noida International Airport से उड़ान भरने की मंजूरी दे दी है। आने वाले समय में और भी एयरलाइंस इस एयरपोर्ट से जुड़ सकती हैं।
आम लोगों को क्या फायदा होगा
Jewar Airport Launch का सबसे बड़ा फायदा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों के लाखों लोगों को मिलेगा। इस एयरपोर्ट से इन क्षेत्रों में तेजी से विकास होगा, रोजगार के हजारों नए मौके बनेंगे और व्यापार को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। जो लोग पहले दिल्ली के IGI एयरपोर्ट तक जाने में घंटों लगाते थे, उन्हें अब नजदीक में ही विश्व स्तरीय एयरपोर्ट की सुविधा मिल जाएगी।
किसानों की जमीन पर बने इस प्रोजेक्ट को पूरे क्षेत्र के आर्थिक बदलाव का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। एयरपोर्ट के आसपास रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भारी निवेश की संभावना है।
भारत की एविएशन ताकत का नया प्रतीक
Jewar Airport Launch को सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर देखना सही नहीं होगा। यह दरअसल भारत की बढ़ती एविएशन ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। जब कोई देश नेट जीरो कार्बन लक्ष्य वाला एयरपोर्ट बनाता है, जहां कोहरे में भी विमान लैंड कर सकते हैं, जहां MRO से लेकर कारगो तक सब एक ही छत के नीचे मिलता है, तो यह साफ संकेत है कि भारत अब ग्लोबल एविएशन मैप पर अपनी जगह और मजबूत कर रहा है। दिल्ली-NCR में दूसरे बड़े एयरपोर्ट की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी और Jewar Airport उस कमी को पूरा करने के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की पूरी तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि
Noida International Airport की परिकल्पना सबसे पहले साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने की थी। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इसकी रिपोर्ट मंजूर भी कर दी थी, लेकिन बाद की सरकारों के दौर में यह प्रोजेक्ट अटका रहा। 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद इसे फिर से गति मिली और 2021 में PM मोदी ने नींव रखी। करीब साढ़े चार साल की मेहनत के बाद आज Jewar Airport Launch के साथ भारत को एक और विश्व स्तरीय एयरपोर्ट मिल गया है, जो चार चरणों में 2050 तक पूरी तरह विकसित होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Noida International Airport (Jewar Airport) का उद्घाटन किया, यह पूरी तरह बनने के बाद एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।
- Jewar Airport देश का पहला नेट जीरो कार्बन लक्ष्य वाला एयरपोर्ट है, जहां 55% ऊर्जा ग्रीन एनर्जी से आएगी।
- अत्याधुनिक ILS तकनीक से 50 मीटर विजिबिलिटी में भी विमानों की लैंडिंग संभव होगी, सर्दियों में फ्लाइट देरी की समस्या काफी कम होगी।
- शुरुआत में रोज 150 फ्लाइट ऑपरेट होंगी, इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस
ने उड़ान की मंजूरी दी है।








