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The News Air - Breaking News - Iran Israel War: लारीजानी की हत्या के बाद ईरान का कहर, NATO में बड़ी टूट, ट्रंप बौखलाए

Iran Israel War: लारीजानी की हत्या के बाद ईरान का कहर, NATO में बड़ी टूट, ट्रंप बौखलाए

ईरान के सबसे ताकतवर नेता अली लारीजानी की इजराइली हमले में मौत के बाद ईरान ने इजराइल पर जबरदस्त हमला किया, तेल अवीव में भारी तबाही, NATO ने अमेरिका की मदद से किया इनकार, ट्रंप के अपने अधिकारी ने दिया इस्तीफा

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 18 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय
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Iran Israel War
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Iran Israel War: दुनिया इस वक्त कई मोर्चों पर एक साथ धधक रही है। ईरान और अमेरिका–इजराइल की जंग में एक और बड़ा मोड़ आ गया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी की इजराइली हवाई हमले में मौत हो गई है। इसके साथ ही सीजफायर की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई है, क्योंकि लारीजानी ही वह शख्स थे जिनके जरिए अमेरिका बातचीत की कोशिश कर रहा था।

अली लारीजानी कौन थे और उनकी मौत क्यों है सबसे बड़ा झटका

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की है कि इजराइली हमले में लारीजानी के साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी और उनके ऑफिस प्रमुख अलीरजा बायत तथा कई बॉडीगार्ड्स भी मारे गए। लारीजानी को पूर्व सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान का वास्तविक नेता (de facto leader) माना जा रहा था, जो देश को चला रहे थे।

लारीजानी ईरान के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते थे, जिसकी तुलना अमेरिका के कैनेडी परिवार से की जाती थी। वह 2008 से 2020 तक ईरानी संसद के स्पीकर रहे। 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध के दौरान वह IRGC में कमांडर भी रह चुके थे। इसी हमले में अमेरिकी और इजराइली सेना ने ईरान की बसीज अर्धसैनिक बल के कमांडर जनरल गुलाम रजा सुलेमानी को भी एक अलग हमले में मार गिराया।

नेतन्याहू ने ईरान की जनता को तख्तापलट के लिए उकसाया

लारीजानी की हत्या के बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए ईरान की जनता को भड़काने की कोशिश की। नेतन्याहू ने कहा, “हमने अली लारीजानी को खत्म कर दिया। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स असल में गुंडों का एक गिरोह है जो ईरान को चलाता है। हमने बसीज के कमांडर को भी खत्म कर दिया जो तेहरान की सड़कों पर आम लोगों के खिलाफ दहशत फैलाते हैं।” नेतन्याहू भले ही ईरान में तख्तापलट के बीज बोने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई कामयाबी मिलती नहीं दिख रही।

ईरान ने नियुक्त किए नए सुरक्षा प्रमुख, शांति प्रस्ताव ठुकराए

ईरान ने पहले से ही हर हालात से निपटने की तैयारी कर रखी थी। खामेनेई की जगह उनके बेटे मुस्तफा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया था और अब लारीजानी की जगह सईद जलीली को सुरक्षा काउंसिल की कमान सौंप दी गई है। जलीली को ईरान में “जिंदा शहीद” (Living Martyr) की उपाधि मिली हुई है, जिससे उनकी लोकप्रियता और क्षमता दोनों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मुस्तफा खामेनेई ने मध्यस्थ देशों की तरफ से दिए गए शांति प्रस्तावों को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा, “अभी शांति का वक्त नहीं है। अमेरिका और इजराइल से बदला लेना ही होगा।” वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराक्ची ने चेतावनी दी कि लारीजानी जैसी बड़ी शख्सियत की मौत से ईरान के सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का राजनीतिक ढांचा बहुत मजबूत है।”

ईरान का इजराइल पर जवाबी कहर: तेल अवीव में भारी तबाही

बदले की कसम खाने के बाद ईरान ने इजराइल और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर जबरदस्त हमला किया। ईरान ने क्लस्टर वॉरहेड मिसाइलों से तेल अवीव को निशाना बनाया, जहां कई जगह धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और भारी तबाही मची। यूएई के कई इलाकों में ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए। सऊदी अरब ने भी कई हमले इंटरसेप्ट किए।

हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि यूएई को ईरान के हमलों से बचाव के लिए अपने लड़ाकू विमान तैनात करने पड़े हैं। ईरान की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए रियाद में खाड़ी देशों की एक आपात बैठक बुलाई गई है। अमेरिकी सेना ने इसके जवाब में अपने सबसे खतरनाक हथियार, 5000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स (ट्विटर) पर जानकारी दी कि ईरान के तट पर बने मजबूत मिसाइल ठिकानों को तबाह कर दिया गया है, जहां से एंटीशिप मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थीं।

NATO ने ट्रंप का साथ देने से किया इनकार, गठबंधन टूटने के कगार पर

ईरान युद्ध ने NATO में भी बड़ी दरार पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद थी कि जंग में NATO उनके साथ खड़ा होगा, लेकिन किसी भी देश ने आगे आने से मना कर दिया। NATO के मुताबिक यह आर्टिकल 5 का मामला नहीं है क्योंकि किसी NATO सदस्य देश पर ईरान ने सीधा हमला नहीं किया। यह जंग अमेरिका ने खुद शुरू की है।

ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कहा, “ईरान युद्ध में अमेरिका की मदद ना करके NATO एक बहुत बड़ी मूर्खतापूर्ण गलती कर रहा है। लेकिन अब हमें NATO की जरूरत नहीं है।” फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कैबिनेट बैठक में साफ कह दिया कि “हम इस जंग में किसी पक्ष में नहीं हैं और फ्रांस होर्मुज स्ट्रेट में किसी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लेगा।”

ब्रिटेन भी अमेरिका के खिलाफ, ट्रंप ने कसा तंज

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी इस युद्ध में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया, हालांकि उन्होंने कहा कि ब्रिटेन होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने और नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए यूरोपीय और खाड़ी सहयोगियों के साथ सामूहिक योजना पर काम कर रहा है।

इस नपे-तुले बयान पर ट्रंप भड़क गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “स्टार्मर विंस्टन चर्चिल नहीं हैं। उनके फैसले ऐसे समय में अमेरिका और ब्रिटेन के संबंधों को कमजोर कर रहे हैं जब मध्यपूर्व में तनाव बढ़ रहा है।” यानी अमेरिका और यूरोप के बीच खुलेआम खींचतान दुनिया देख रही है।

ट्रंप के अपने अधिकारी ने दिया इस्तीफा, ईरान युद्ध को बताया गलत

सबसे बड़ी बात यह कि अब ट्रंप अपने ही घर में घिर गए हैं। अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर (NCTC) के डायरेक्टर जो कैंट ने 17 मार्च को अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। कैंट ने अपने इस्तीफे में ट्रंप प्रशासन की पोल खोलते हुए कहा, “मेरा दिल इस बात की गवाही नहीं देता कि मैं ट्रंप प्रशासन के ईरान युद्ध का समर्थन करूं। ईरान से हमारे देश को कोई तात्कालिक खतरा नहीं था। यह साफ है कि हमने यह युद्ध इजराइल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया।”

कैंट ने अमेरिकी सेना में ग्रीन बैरेट के तौर पर 11 जगहों पर तैनाती देखी है और CIA में भी काम किया है। उनका यह इस्तीफा ट्रंप प्रशासन के भीतर पहला बड़ा सार्वजनिक विरोध है। ट्रंप ने जवाब में कैंट को “सुरक्षा पर बहुत कमजोर” बताया और कहा कि उनका जाना “अच्छी बात है।” हालांकि व्हाइट हाउस और नेशनल इंटेलिजेंस निदेशक तुलसी गैबार्ड के कार्यालय ने कैंट के गंभीर आरोपों पर कोई सीधा जवाब देने से परहेज किया।

नॉर्थ कोरिया में चुनाव: किम जोंग उन की पार्टी को 99.93% वोट

उत्तर कोरिया में सुप्रीम पीपल्स असेंबली के चुनाव के नतीजे आ गए हैं। असेंबली में कुल 687 सीटें हैं और किम जोंग उन की वर्कर्स पार्टी ने गठबंधन सहयोगियों के साथ 99.93% वोट हासिल करते हुए सभी सीटों पर कब्जा कर लिया। सिर्फ 0.07% यानी करीब 18,000 लोगों ने विरोध में वोट डाला, लेकिन यह वोट किम के खिलाफ नहीं बल्कि स्थानीय उम्मीदवारों के खिलाफ दिए गए। मतदान प्रतिशत करीब 99.1% रहा।

नॉर्थ कोरिया में वोट डालना सिर्फ अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी माना जाता है। वोट न डालना राजद्रोह के बराबर है। चीन और रूस में रहने वाले उत्तर कोरियाई नागरिकों को भी मतदान का अधिकार है। किम जोंग उन इस सदन के सर्वोच्च नेता हैं, विपक्ष की कोई भूमिका नहीं है और किम का आदेश ही अंतिम आदेश होता है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग: काबुल में अस्पताल पर हमला, 400 से ज्यादा की मौत

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच करीब एक महीने से चल रही जंग ने और खतरनाक मोड़ ले लिया है। पाकिस्तानी वायुसेना ने दोबारा काबुल में बम बरसाए, जिसमें ओमिद नशामुक्ति केंद्र (Omid Addiction Treatment Hospital) में इलाज करा रहे 400 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और 250 से अधिक लोग घायल हुए। भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “बर्बर” और “अक्षम्य” करार दिया।

तालिबान ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए बदला लेने की कसम खाई है। तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी ने काबुल में राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहा कि पाकिस्तान की कूटनीतिक मंशा पर अफगानिस्तान का भरोसा पूरी तरह उड़ गया है। पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह केवल सैन्य स्थलों को निशाना बनाता है, लेकिन तालिबान ने कहा कि वहां कोई सैन्य मौजूदगी नहीं थी।

भारत की अफगानिस्तान पर पैनी नजर, आतंकवाद फैलने का खतरा

इस जंग में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संघर्ष से पैदा हुई अस्थिरता का फायदा उठाकर ISIS या अलकायदा जैसे संगठन दोबारा सिर उठा सकते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर आवाज उठाई है और बेगुनाहों पर हमले के लिए पाकिस्तान की कड़ी निंदा की है। चीन इस विवाद में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

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चांद और मंगल पर खेती: NASA का क्रांतिकारी प्रयोग

विनाश और तबाही की इन खबरों के बीच विज्ञान की दुनिया से एक उम्मीद भरी खबर भी आई है। टेक्सस एएंडएम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता हैरिसन कोकर और NASA की टीम एक क्रांतिकारी सिस्टम पर काम कर रही है जिसे BLISS (Bio-Regenerative Life Support System) कहा जाता है। यह तकनीक इंसानी कचरे को रिसाइकल करके उसे एक पोषक घोल में बदल देती है, जिसे चांद और मंगल की बंजर मिट्टी में मिलाने से वह उपजाऊ बन सकती है।

वैज्ञानिकों ने नकली चंद्रमा और मंगल ग्रह की मिट्टी में BLISS से तैयार घोल मिलाकर 24 घंटे तक प्रयोग किया। नतीजे चौंकाने वाले रहे: मिट्टी से सल्फर, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज बाहर निकल आए। माइक्रोस्कोप से देखने पर पता चला कि जो मिट्टी पहले कांच की तरह नुकीली थी, वह अब चिकनी और उपजाऊ हो गई है। अगर यह कामयाब रहा तो भविष्य में “मून फार्मिंग” और “मार्स फार्मिंग” हकीकत बन सकती है।

संक्षिप्त विश्व समाचार

अर्जेंटीना ने WHO से नाम लिया वापस: अमेरिका की राह पर चलते हुए अर्जेंटीना ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक तौर पर अपना नाम वापस ले लिया। राष्ट्रपति मिलेई ने कोविड-19 महामारी को लेकर संगठन की कड़ी निंदा की।

यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को दिया प्रस्ताव: EU ने हंगरी को कच्चा तेल ले जाने वाली क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत का भुगतान करने का प्रस्ताव यूक्रेन को दिया।

TikTok पर छिड़ी बहस: TikTok को लेकर ट्रंप प्रशासन सवालों में है। ट्रेजरी विभाग को 10 अरब डॉलर के भुगतान पर सेनेटर मार्क वार्नर ने व्हाइट हाउस से जवाब मांगा।

चीन का ताइवान को पुनर्मिलन का ऑफर: मिडिल ईस्ट जंग के बीच ऊर्जा सुरक्षा का हवाला देकर चीन ने ताइवान को पुनर्मिलन का बड़ा प्रस्ताव दिया है, हालांकि ताइवान लंबे समय से बीजिंग की विलय की कोशिशों का विरोध करता रहा है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • अली लारीजानी की इजराइली हमले में मौत, ईरान ने सईद जलीली को नया सुरक्षा प्रमुख नियुक्त किया।
  • NATO ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ देने से इनकार किया, ट्रंप ने कहा “अब NATO की जरूरत नहीं।”
  • अमेरिका के NCTC डायरेक्टर जो कैंट ने इस्तीफा दिया, कहा “ईरान से कोई खतरा नहीं था, युद्ध इजराइली लॉबी के दबाव में शुरू हुआ।”
  • पाकिस्तान द्वारा काबुल के अस्पताल पर हमले में 400+ लोगों की मौत, भारत ने इसे “बर्बर” बताया।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. अली लारीजानी कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?

अली लारीजानी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और आयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद देश के सबसे ताकतवर नेता थे। 17 मार्च 2026 को इजराइली हवाई हमले में उनकी, उनके बेटे और बॉडीगार्ड्स की मौत हो गई।

Q2. NATO ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ क्यों नहीं दिया?

NATO एक रक्षात्मक गठबंधन है और इसकी शर्तें तभी लागू होती हैं जब किसी सदस्य देश पर सीधा हमला हो। ईरान पर हमला अमेरिका ने खुद शुरू किया, इसलिए यह आर्टिकल 5 के दायरे में नहीं आता। यूरोपीय देशों ने स्पष्ट कहा कि यह उनकी जंग नहीं है।

Q3. पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग कब शुरू हुई और वर्तमान स्थिति क्या है?

यह युद्ध फरवरी 2026 के अंत में पाकिस्तान की काबुल पर एयर स्ट्राइक से शुरू हुआ और अब करीब एक महीने से जारी है। हाल ही में काबुल के ओमिद अस्पताल पर हमले से 400 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिसके बाद तालिबान ने बदला लेने की कसम खाई है।

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