Iran Protests : ईरान में जारी आंदोलन के बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार खुलकर डोनाल्ड ट्रंप पर हमला बोला है। देश के नाम संबोधन में खामेनेई ने कहा कि ट्रंप का भी पतन होगा और ईरान में हो रही हिंसा के पीछे अमेरिका की भूमिका है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी तेहरान से शुरू हुआ आक्रोश 100 से ज्यादा शहरों तक फैल चुका है और हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।
ईरान में बीते 12 दिनों से महंगाई के खिलाफ चल रहा विरोध अब सीधे सत्ता और व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन में बदल गया है। सड़कों पर उतर आए लोग सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं, सरकारी इमारतों पर हमले हो रहे हैं और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया जा रहा है।

आंदोलन पर खामेनेई का बड़ा बयान
खामेनेई ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के कुछ लोग किसी दूसरे देश के नेता को खुश करने के लिए सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दिया और कहा कि जो कुछ भी ईरान में हो रहा है, उसके पीछे अमेरिका जिम्मेदार है। यही नहीं, ईरान ने हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है।
शहर-शहर सुलगता ईरान
ईरान की राजधानी तेहरान से निकला गुस्सा अब मशहद, इस्फहान, शिराज, तबरीज जैसे बड़े शहरों तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम किया, आगजनी की और कई जगहों पर सरकारी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। हालात इतने बिगड़े कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और पुलिस से जुड़ी इमारतों को भी निशाना बनाया गया।

सड़कों पर नारे, सत्ता को खुली चुनौती
अब प्रदर्शन केवल महंगाई तक सीमित नहीं रहे। सड़कों पर “खामेनेई को मौत” और “इस्लामिक रिपब्लिक का अंत” जैसे नारे गूंज रहे हैं। कई जगह प्रदर्शनकारी क्राउन प्रिंस रीजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाते दिखे और “यह आखिरी लड़ाई है, शाह पहलवी लौटेंगे” जैसे नारे लगाए गए।
हिंसा, मौतें और गिरफ्तारियां
अमेरिकी ह्यूमन राइट एजेंसी के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 3000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। बढ़ती हिंसा ने आम नागरिकों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कों पर डर का माहौल है और लोग अपने घरों में सिमटने को मजबूर हैं।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का सख्त एक्शन
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान सरकार को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई हुई, तो उसके गंभीर नतीजे होंगे। इस चेतावनी के बाद ईरान सरकार भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं, तेहरान एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है और सेना को अलर्ट पर रखा गया है।
बड़ी तस्वीर: सत्ता बनाम सड़क
ईरान में विरोध प्रदर्शनों को स्वतःस्फूर्त नहीं माना जा रहा। जानकारों के मुताबिक, आंदोलन की शुरुआत भले ही अंदरूनी मुद्दों से हुई हो, लेकिन बाद में इसमें बाहरी बयानों और दबाव ने आग में घी डालने का काम किया। अमेरिका लंबे समय से ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करता रहा है और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। इसी टकराव की झलक एक बार फिर सड़कों पर दिख रही है।

आम लोगों पर असर
इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो गई है। व्यापार, पढ़ाई और आपसी संपर्क सब प्रभावित हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों को यह डर सताने लगा है कि यह आंदोलन कब और कितना और हिंसक रूप ले लेगा।
जानें पूरा मामला
ईरान में महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ 12 दिन पुराना विरोध अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। हिंसा, विदेशी आरोप-प्रत्यारोप और सत्ता परिवर्तन के नारों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी खबर बना दिया है, जहां एक तरफ खामेनेई अमेरिका को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका ईरान सरकार को चेतावनी दे रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
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ईरान में 100 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन जारी
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खामेनेई ने ट्रंप पर सीधा हमला, अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
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45 मौतें, करीब 3000 लोग हिरासत में
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इंटरनेट, फोन सेवाएं और तेहरान एयरपोर्ट बंद
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प्रदर्शन अब सत्ता परिवर्तन के नारों तक पहुंचा








