Iran-Israel War को पूरा एक महीना बीत चुका है और अब यह जंग हर दिन एक नया खतरनाक मोड़ ले रही है। एक तरफ IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि सोमवार दोपहर 12 बजे तक ईरानी यूनिवर्सिटी पर हमले की निंदा करो, वरना अमेरिकी और इजराइली यूनिवर्सिटियां भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। दूसरी तरफ NATO ने अमेरिका की मदद से इनकार कर दिया है और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने तो यहां तक कह दिया कि “अमेरिका की एक हारी हुई जंग में हम अपने सैनिकों को मरने के लिए नहीं भेजेंगे।” इसी बीच अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3200 से ज्यादा जगहों पर ट्रंप के खिलाफ “No Kings” के नारे गूंजे।
Iran-Israel War: ईरान ने दी ट्रंप को 30 मार्च दोपहर 12 बजे तक की डेडलाइन
Iran-Israel War में सबसे बड़ा घटनाक्रम ईरान की तेहरान स्थित ‘ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ पर इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले को लेकर सामने आया है। इस हमले में यूनिवर्सिटी की पूरी बिल्डिंग जमींदोज हो गई, जिसने ईरान को और भड़का दिया।
IRGC ने इसके बाद एक बेहद सख्त बयान जारी करते हुए कहा: “वाइट हाउस के लापरवाह शासकों को जान लेना चाहिए कि अब से इजराइल के सभी विश्वविद्यालय और पश्चिम एशिया क्षेत्र में अमेरिकी यूनिवर्सिटियां तब तक वैध लक्ष्य मानी जाएंगी, जब तक ईरानी विश्वविद्यालयों के विनाश का बदला नहीं ले लिया जाता।”
IRGC ने ट्रंप प्रशासन को 30 मार्च यानी सोमवार को तेहरान के समय के मुताबिक दोपहर 12:00 बजे तक की डेडलाइन दी है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर अमेरिकी सरकार चाहती है कि उसकी यूनिवर्सिटियां बदले की कार्रवाई से बची रहें, तो उसे इस डेडलाइन से पहले ईरानी यूनिवर्सिटी पर बमबारी की निंदा करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी करना होगा।
हूतियों और हिजबुल्लाह ने बढ़ाई इजराइल की मुश्किलें
Iran-Israel War में हूती विद्रोहियों की एंट्री ने इजराइल के लिए स्थिति और भी कठिन बना दी है। हूती सैन्य प्रवक्ता याहिया सरी ने बयान जारी कर कहा: “हमने इजराइल के खिलाफ अपने दूसरे सैन्य अभियान को अंजाम दिया है। इस हमले में क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। जब तक इजराइल अपने हमले पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक हम अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकेंगे।”
हिजबुल्लाह भी लेबनान से इजराइल के खिलाफ पूरी ताकत से जंग में कूदा हुआ है। ईरान को हूती और हिजबुल्लाह दोनों का समर्थन मिल रहा है, जिसने इस संघर्ष को एक बहुमोर्चा युद्ध में बदल दिया है।
IRGC ने मार गिराया अमेरिकी MQ-9 ड्रोन, F-16 को भी बनाया निशाना
प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक IRGC ने इजराइल और अन्य जगहों पर इजराइली और अमेरिकी उद्योगों को निशाना बनाया। इन हमलों में लंबी दूरी और मध्यम दूरी की ठोस और तरल ईंधन प्रणालियों तथा हमलावर ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। IRGC ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया और एक F-16 लड़ाकू विमान को भी निशाना बनाया।
ईरानी सेना ने इजराइल के हाइफा बंदरगाह शहर में एक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रडार केंद्र को निशाना बनाया। इसके अलावा बेन गुरियन हवाई अड्डे पर एक ईंधन भंडारण केंद्र पर भी हमला किया गया। ईरानी मिसाइलों के चलते दक्षिणी इजराइल के नेगेव और डेड सी के क्षेत्रों में भी सायरन की गूंज सुनाई देती रही।
इजराइली सेना ढहने के कगार पर: ईरानी संसद अध्यक्ष की चेतावनी
Iran-Israel War में इजराइली सेना की स्थिति भी कमजोर पड़ती दिख रही है। इजराइली सेना के चीफ एयाल जमीर पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि इजराइली सेना ढहने के कगार पर पहुंच चुकी है। इसके बावजूद इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने इस वीकेंड पर ईरान और लेबनान में लगभग 250 ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन इकाइयां, मिसाइल लॉन्च ठिकाने और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने इजराइल पर तंज कसते हुए कहा: “इजराइल अपनी सेना की आंतरिक कमजोरियों को छिपाने के लिए तनाव बढ़ा रहा है। लेकिन हमारी कार्रवाई से उसका पतन और तेज हो जाएगा।”
“ताबूत में जाएंगे अमेरिकी सैनिक”: 6 अप्रैल के बाद जमीनी हमले की आशंका
Iran-Israel War अब एक नए और खतरनाक चरण में प्रवेश करने वाली है। अमेरिकी नौसेना का एम्फीबियस एसॉल्ट शिप यूएसएस त्रिपोली 3500 मरीन और नौसैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट पहुंच गया है, जिसके बाद माना जा रहा है कि 6 अप्रैल के बाद अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला बोल सकता है।
लेकिन ईरान ने इस खतरे का जवाब भी तैयार रखा है। तेहरान टाइम्स ने अपने फ्रंट पेज पर लेख प्रकाशित कर लिखा: “नर्क में आपका स्वागत है। जो अमेरिकी सैनिक ईरानी जमीन पर कदम रखेंगे, वे केवल ताबूत में वापस जाएंगे।” ईरान ने साफ कर दिया है कि वह हर तरह के हालात का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
NATO ने छोड़ा अमेरिका का साथ: ब्रिटिश PM की कड़ी टिप्पणी
Iran-Israel War में ट्रंप के लिए सबसे बड़ा झटका अपने ही सहयोगियों से आया है। अमेरिका ने NATO से सैन्य मदद मांगी, लेकिन वहां से साफ इनकार मिल गया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने तो यहां तक कह दिया: “अमेरिका की एक हारी हुई जंग में हम अपने सैनिकों को मरने के लिए नहीं भेजेंगे।”
NATO का यह इनकार ट्रंप प्रशासन के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद शर्मनाक है। यह पहली बार है जब अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों ने इतनी खुलकर उसकी युद्ध नीति का विरोध किया है। इससे यह साफ है कि Iran-Israel War में ट्रंप अकेले पड़ते जा रहे हैं और उनकी विदेश नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका में “No Kings” प्रदर्शन: 50 राज्यों में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता
Iran-Israel War के बीच ट्रंप को अपने ही देश में भी भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3200 से ज्यादा जगहों पर “No Kings” यानी “कोई राजा नहीं” के बैनर तले हजारों रैलियां निकाली गईं। लगभग हर बड़े शहर में प्रदर्शन हुए। वाशिंगटन डीसी के डाउनटाउन में दोपहर भर रैलियां चलती रहीं और लोग राजधानी की सड़कों पर हाथों में बैनर-पोस्टर लिए ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मार्च करते रहे।
प्रदर्शनकारियों ने “No War” जैसे नारे लगाए और लिंकन मेमोरियल की सीढ़ियों पर भी प्रदर्शन किया। कई जानी-मानी हस्तियां और राजनेता इन प्रदर्शनों में शामिल हुए। बड़े डेमोक्रेट नेताओं ने नेशनल मॉल में स्टेट कैपिटल बिल्डिंग के बाहर भाषण दिए।
सेनेटर क्रिस्टन गिलिब्रैंड ने कहा: “राष्ट्रपति ट्रंप को राजा की तरह नहीं सोचना चाहिए। उन्हें देश के लोगों के बारे में सोचना चाहिए। उन्हें महंगाई कम करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर परिवार आसानी से जिंदगी गुजार सके।”
यह “No Kings” प्रदर्शन का तीसरा दौर है। पिछले साल जून में ट्रंप के जन्मदिन पर इसकी शुरुआत हुई थी, जिसमें लगभग 40 से 60 लाख लोगों ने 2100 विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। ईरान के साथ चल रही जंग इस बार प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। यूरोप, लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी ट्रंप के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे।
इमरान खान के बेटे कासिम ने UN में पाकिस्तान सरकार को किया बेनकाब
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे कासिम खान ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की बैठक में पाकिस्तान सरकार की कड़ी निंदा करते हुए तहलका मचा दिया है। कासिम ने अपने पिता की गिरफ्तारी, जेल में उनके हालात, मेडिकल सुविधाओं की कमी और परिवार से मिलने पर रोक जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया।
कासिम ने कहा: “हम इस काउंसिल और OHCHR से पाकिस्तान से इमरान खान पर जुल्म तुरंत खत्म करने की अपील करने को कहते हैं। पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र वर्किंग ग्रुप की राय माननी चाहिए और उन्हें मेरे पिता को रिहा करना चाहिए।”
शहबाज शरीफ सरकार कासिम खान के बयान पर भड़क उठी। सरकार का आरोप है कि कासिम और PTI नेता जुल्फी बुखारी के बयान देश विरोधी हैं और इनसे पाकिस्तान के GSP Plus दर्जे को कमजोर करने की कोशिश की गई है, जिसके तहत देश को एक्सपोर्ट पर कम टैरिफ मिलते हैं। फेडरल इंफॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार, पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी और सिंध के सूचना मंत्री शारजील मेमन ने इसे सोची-समझी साजिश बताया।
गौरतलब है कि इमरान खान अगस्त 2023 से कई मामलों में जेल में बंद हैं और अब उनके बेटे ने संयुक्त राष्ट्र में यह मुद्दा उठाकर पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी बढ़ा दिया है।
नेपाल में ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां: ओली के बाद पूर्व मंत्री खड़का भी अरेस्ट
पड़ोसी देश नेपाल में तख्तापलट के बाद बने प्रधानमंत्री बालेन शाह की नई सरकार ताबड़तोड़ फैसले ले रही है। रविवार की सुबह नेपाली कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का को गिरफ्तार कर लिया गया। खड़का पर सरकारी जमीन कब्जाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
पुलिस की केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो (CIB) ने उन्हें काठमांडू से हिरासत में लिया। जांच के दौरान उनके घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई और जले हुए नोट भी मिले, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। खड़का पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के करीबी माने जाते हैं।
इससे एक दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। इन गिरफ्तारियों पर नेपाल की राजनीति दो हिस्सों में बंट गई है। पूर्व मंत्री माधव प्रसाद चौलागिन ने कहा कि अगर यह कार्रवाई कानूनी है तो सही है, लेकिन अगर बदले की भावना से की जा रही है तो देश के हालात बिगड़ सकते हैं।
नेपाल PM बालेन शाह का 100 दिन का ब्लूप्रिंट
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश की व्यवस्था सुधारने के नाम पर 100 दिनों का ब्लूप्रिंट पेश किया है, जिसमें कई बड़े फैसले शामिल हैं:
- संपत्ति जांच: सभी नेताओं और सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति की बारीकी से जांच होगी।
- मंत्रालयों में कटौती: सरकारी खर्च कम करने के लिए मंत्रालयों की संख्या 25 से घटाकर 17 कर दी गई।
- शिक्षा से राजनीति बाहर: स्कूलों और विश्वविद्यालयों से राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों को हटाने का निर्देश।
- डिजिटल सेवाएं: पासपोर्ट, लाइसेंस और नागरिकता प्रमाण पत्र अब डिजिटल माध्यम से मिलेंगे।
- महिला सुरक्षा: महिलाओं के लिए विशेष ब्लू लाइन बस सेवा शुरू की जा रही है।
पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख कमर बाजवा का निधन
पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का निधन हो गया है। बाथरूम में फिसलने से उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी और वह एक महीने से अस्पताल में एडमिट थे। बाजवा पाकिस्तान की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली शख्सियत थे।
किम जोंग उन ने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन: हाई थ्रस्ट मिसाइल इंजन का टेस्ट
Iran-Israel War के बीच उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने ट्रंप की चिंता और बढ़ा दी है। उत्तर कोरिया ने हाई थ्रस्ट मिसाइल इंजन का सफल परीक्षण किया है, जो अमेरिका तक मार करने में सक्षम बताई जा रही है। ऐसे समय में जब अमेरिका पहले से ही मिडिल ईस्ट में एक भीषण जंग में फंसा हुआ है, उत्तर कोरिया का यह कदम ट्रंप प्रशासन के लिए एक और बड़ा सिरदर्द बन गया है।
इराक कुर्दिस्तान में राष्ट्रपति आवास पर ड्रोन अटैक, क्यूबा पर प्रतिबंधों की निंदा
इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में राष्ट्रपति आवास पर ड्रोन हमला किया गया। अमेरिका ने इसे कायरतापूर्ण हमला बताया और ईरान के साथ जुबानी जंग और तेज हो गई। वहीं क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रॉड्रिगेज पैरेला ने अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि क्यूबा को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मामले पर चिंता जताई है।
रेशम के कीड़े से प्रेरित रोबोट: आपदा में फंसे लोगों को बचाएगी नई तकनीक
विज्ञान की दुनिया से एक रोमांचक खबर सामने आई है। NPJ Robotics Journal में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक वैज्ञानिकों ने रेशम के कीड़े से प्रेरणा लेकर एक ऐसा ओडर ट्रैकिंग रोबोट तैयार किया है जो हवा में घुली हल्की सी गंध का भी पीछा कर सकता है।
नर रेशम के कीड़ों में अपने साथी की गंध को दूर से पहचानने की अद्भुत क्षमता होती है। उनके सिर पर लगे एंटीना इतने संवेदनशील होते हैं कि वे हवा के झोंकों में छिपे गंध के मामूली अणुओं को भी सूंघ लेते हैं। वैज्ञानिकों ने इसी जैविक तकनीक को रोबोटिक सेंसर में ढाल दिया है।
यह रोबोट जब किसी मलबे के ऊपर से गुजरता है तो इंसानी पसीने या सांसों से निकलने वाली गंध को पहचानकर सीधे उस जगह की तरफ बढ़ने लगता है जहां कोई फंसा हो सकता है। खास बात यह है कि यह रोबोट उन सकरी जगहों पर भी जा सकता है जहां खोजी कुत्तों या भारी मशीनों का पहुंचना संभव नहीं होता। भूकंप या किसी बड़ी आपदा के बाद यह तकनीक अनगिनत जिंदगियां बचा सकती है।
Iran-Israel War का आगे क्या होगा असर
Iran-Israel War अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है जहां इसके और भयावह होने की हर संभावना बनी हुई है। एक तरफ ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हर दांव के खिलाफ मजबूती से खड़ा होकर साबित कर दिया है कि वह इस जंग में झुकने को तैयार नहीं है। दूसरी तरफ ट्रंप अपने ही सहयोगियों और अपनी जनता का भरोसा खोते जा रहे हैं। NATO का साथ छूट चुका है, ब्रिटेन ने करारा जवाब दे दिया है और अमेरिका की सड़कों पर “No Kings” के नारे गूंज रहे हैं। 6 अप्रैल के बाद अगर अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला बोलता है तो यह जंग तीसरे विश्वयुद्ध जैसे हालात पैदा कर सकती है। भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि इसका सीधा असर तेल कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले करोड़ों भारतीयों की सलामती पर पड़ रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Iran-Israel War को एक महीना पूरा: IRGC ने ट्रंप को 30 मार्च दोपहर 12 बजे तक यूनिवर्सिटी बमबारी की निंदा का अल्टीमेटम दिया, NATO ने अमेरिका की मदद से इनकार किया, ब्रिटिश PM ने “हारी हुई जंग” कहा।
- अमेरिका के 50 राज्यों में 3200+ जगहों पर ट्रंप विरोधी “No Kings” प्रदर्शन; ईरान जंग, महंगाई और इमीग्रेशन नीति का विरोध; ट्रंप की लोकप्रियता तेजी से गिर रही।
- इमरान खान के बेटे कासिम ने जिनेवा में UNHRC में पाकिस्तान सरकार की कड़ी निंदा की; शहबाज सरकार ने इसे GSP Plus खतरे में डालने वाली साजिश बताया।
- नेपाल PM बालेन शाह ने पूर्व मंत्री खड़का को गिरफ्तार किया, ओली पहले ही जेल में; 100 दिन का ब्लूप्रिंट पेश, मंत्रालय 25 से घटाकर 17 किए।








