Iran Israel War: अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर फुल स्केल मिलिट्री अटैक शुरू कर दिया है और इस बार हमला इतना भीषण है कि इसने पूरे मध्यपूर्व को आग में झोंक दिया। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम के इस अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनई अपने ऑफिस में हुई स्ट्राइक में मारे गए — जिसकी पुष्टि खुद ईरान के सरकारी टीवी ने की है। उनके साथ उनकी बेटी, दामाद और पोती की भी जान गई। ईरान में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक और सात दिन की छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है।
जवाब में ईरान ने सिर्फ इसराइल पर ही नहीं, बल्कि यूएई, कतर, बहरेन और कुवैत पर भी मिसाइलें दागी हैं। दुबई एयरपोर्ट पूरी तरह खाली करा लिया गया, बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए और बहरेन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के बेस पर सीधा हमला हुआ। इन्हीं गल्फ देशों में 1 करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते हैं और अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया तो भारत की तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है।
खामेनई की मौत: ईरान के सबसे शक्तिशाली नेता का अंत
इस पूरे हमले की सबसे बड़ी और सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि ईरान के 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनई अब इस दुनिया में नहीं रहे। वे अपने ऑफिस में थे जब अमेरिकी-इसराइली स्ट्राइक ने उनके कंपाउंड को निशाना बनाया। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने उन्हें “शहीद” घोषित किया और उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि की।
खामेनई के साथ उनकी बेटी, दामाद और पोती भी इस हमले में मारे गए। इसके अलावा ईरान की सेना के कई शीर्ष कमांडर भी एक डिफेंस काउंसिल मीटिंग के दौरान मारे गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर कहा — “जो लोग सारे फैसले लेते थे, उनमें से ज्यादातर अब नहीं रहे।”
ईरान ने 40 दिन के राष्ट्रीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है। तेहरान की सड़कों पर प्रतिक्रिया बंटी हुई दिखी — एक तरफ कुछ लोगों ने जश्न मनाया तो दूसरी तरफ कई लोग रो रहे थे। यह विभाजन बताता है कि ईरान का समाज कितने गहरे तनाव में जी रहा था।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’: एक दिन का हमला नहीं, कई दिनों का अभियान
अमेरिका और इसराइल ने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह कोई एक दिन की सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है — यह कई दिनों तक चलने वाला व्यापक सैन्य अभियान है। ट्रंप ने कहा — “हम उनकी पूरी मिसाइल इंडस्ट्री को जमीन में मिला देंगे।”
तेहरान, इस्फहान, कौम, करमानशाह — पूरे ईरान में बम बरस रहे हैं। ईरान के परमाणु ठिकानों, रक्षा मंत्रालय, खुफिया मंत्रालय और सुप्रीम लीडर के ऑफिस — सभी पर सीधे हमले हुए हैं।
ट्रंप ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए ट्वीट किया — “जब हमारा काम पूरा हो जाए तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लो।” यह बयान साफ बताता है कि अमेरिका का मकसद सिर्फ मिसाइल ठिकाने नष्ट करना नहीं, बल्कि ईरान में पूर्ण सत्ता परिवर्तन है।
बहाना दिया जा रहा है कि ईरान के तानाशाह को हटाने और वहां के लोगों के लिए शांति और लोकतंत्र लाने के लिए यह सब किया जा रहा है। ट्रंप ने कहा — “ईरान की इस दुष्ट कट्टरपंथी तानाशाही को खत्म करना जरूरी है। आपकी आजादी का वक्त आ गया है।”
ईरान का भयंकर पलटवार: 27 अमेरिकी बेस पर हमला, ऑपरेशन ‘ट्रू प्रॉमिस 4’
ईरान ने भी इस हमले का तगड़ा जवाब दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इस जवाबी हमले का नाम ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ रखा गया है।
ईरान ने सिर्फ इसराइल को ही नहीं, बल्कि यूएई, कतर, बहरेन और कुवैत — हर उस जगह पर मिसाइलें दागी हैं जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी है। बहरेन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट बेस पर तो सीधा हमला हुआ, जिसकी चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। दोहा में अमेरिकी अल-उदैद एयरबेस की तरफ से धुआं उठते हुए दिखा।
लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरान का हमला सिर्फ सैन्य ठिकानों पर सीमित नहीं रहा — नागरिक इलाकों पर भी मिसाइलें गिरी हैं। दुबई, कुवैत और बहरेन में फाइव स्टार होटलों से लेकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों तक को निशाना बनाया गया।
दुबई में तबाही: बुर्ज खलीफा के पास इंटरसेप्शन, एयरपोर्ट बंद
दुबई में जो हालात बने हैं, वे किसी हॉलीवुड फिल्म जैसे लग रहे हैं। दुबई एयरपोर्ट को पूरी तरह खाली करा लिया गया, सारी फ्लाइट्स कैंसिल हो गईं और एयरपोर्ट पूरी तरह धुएं से भर गया। बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए और बुर्ज अल अरब के आसपास मिसाइल इंटरसेप्शन के बाद गिरे मलबे से कई जगह आग लग गई। पाम आइलैंड पर फेयरमोंट होटल में भी विस्फोट हुआ और आग लगी।
हालांकि अच्छी खबर यह है कि यूएई का एयर डिफेंस सिस्टम बेहद मजबूत साबित हुआ। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ईरान की तरफ से यूएई पर 1,137 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से 1,132 को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा 209 ड्रोन स्ट्राइक का प्रयास किया गया, जिनमें से 1,195 को इंटरसेप्ट कर लिया गया। जहां-जहां आग लगी, वह ज्यादातर इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन और मिसाइलों का मलबा गिरने से हुई।
अबू धाबी में मिसाइल के मलबे की वजह से एक व्यक्ति की मौत हुई है।
ईरान में स्कूल पर बमबारी: 100 मासूम बच्चियों की मौत
इस पूरे हमले की सबसे दिल दहला देने वाली घटना ईरान के शहर मिनाब में हुई, जहां एक लड़कियों के प्राइमरी स्कूल पर बम गिरा। यह दिन का वक्त था और स्कूल बच्चियों से भरा हुआ था। इस हमले में कम से कम 100 बच्चियां मारी गईं।
विडंबना की चरम सीमा तब दिखी जब इसराइल का आधिकारिक अकाउंट ट्वीट करता है — “Israel has the right to defend itself” (इसराइल को अपनी रक्षा का अधिकार है)। जबकि पहला हमला इसराइल और अमेरिका ने ही किया। मासूम बच्चियों के स्कूल पर बम गिराकर ‘आत्मरक्षा’ का दावा करना — यह किसी भी परिभाषा में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
भारत पर सीधा खतरा: तेल संकट, महंगाई और लाखों फंसे भारतीय
इस युद्ध का सबसे सीधा और सबसे गंभीर असर भारत पर पड़ने वाला है। भारत अपना 50% से ज्यादा कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आयात करता है। हर रोज भारत 26 लाख बैरल तेल गल्फ देशों से मंगाता है। खबरें आ रही हैं कि ईरान की सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान पहले ही कर दिया है।
विशेषज्ञ इसे भारत का ‘नाइटमेयर सिनेरियो’ (सबसे बुरा हालात) बता रहे हैं। अगर होर्मुज बंद हुआ तो सीधा असर यह होगा — पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छुएंगी, शिपिंग कॉस्ट बढ़ेगी, महंगाई बढ़ेगी और रुपये पर भारी दबाव पड़ेगा। आम भारतीय की रसोई से लेकर ट्रांसपोर्ट तक, हर चीज महंगी हो जाएगी।
इसके अलावा इन गल्फ देशों में 1 करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते हैं। जहां-जहां मिसाइलें गिर रही हैं, वहां आपके रिश्तेदार, दोस्त और लाखों भारतीय कामगार हैं। अकेले इसराइल में 18,000 से ज्यादा भारतीय छात्र हैं। ज्यादातर गल्फ देशों ने अपनी पूरी एयरस्पेस बंद कर दी है, सारी फ्लाइट्स कैंसिल हैं और हजारों भारतीय हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर भारतीयों को “अत्यधिक सावधानी” बरतने को कहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की इसराइल यात्रा और टाइमिंग पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल टाइमिंग को लेकर उठ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इस हमले से सिर्फ दो दिन पहले — 25-26 फरवरी को — इसराइल में थे। वे बेंजामिन नेतन्याहू के साथ डिनर कर रहे थे और इसराइली संसद (नेसेट) में भाषण दे रहे थे। अब इसराइल के रक्षा अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि यह हमला हफ्तों पहले ही प्लान हो चुका था।
कांग्रेस के नेताओं ने इस पर सवाल उठाया है — “मोदी के दोस्त नेतन्याहू ने भारत के पुराने मित्र ईरान पर हमला कर दिया।” असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारत ने हमेशा इस संघर्ष में तटस्थ (न्यूट्रल) स्थिति रखी है, लेकिन हमले से ठीक पहले इसराइल की यात्रा करना “बहुत गलत संदेश” देता है।
यह एक ऐसा कूटनीतिक प्रश्न है जिसका जवाब भारत सरकार को देना होगा — क्या मोदी को पहले से इस हमले की जानकारी थी? और अगर नहीं, तो क्या नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री को अंधेरे में रखा?
ईरान में क्या चल रहा था हमले से पहले: अर्थव्यवस्था का ढहना और 30,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या
इस मौजूदा स्थिति की जड़ें दिसंबर 2025 में जाकर मिलती हैं, जब ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह गई। ईरान की करेंसी 40% गिर गई और खाने-पीने की चीजों के दाम 72% बढ़ गए। इससे ईरान के इतिहास के सबसे बड़े जनविरोध प्रदर्शन शुरू हुए।
लेकिन ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनकारियों पर अपने ही लोगों पर गोलियां चलवाईं। अनुमान है कि 30,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए। ट्रंप ने इसके जवाब में कहा था — “मदद रास्ते में है” (Help is on the way)। और फिर मध्यपूर्व में 2003 की इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा किया गया।
फरवरी की शुरुआत में लगा था कि शायद स्थिति ठंडी पड़ जाएगी। हमले से ठीक एक दिन पहले ओमान के विदेश मंत्री ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता “पहुंच में है” (Peace deal is within our reach)। लेकिन अगले ही दिन बमों की बरसात शुरू हो गई।
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक यह हमला महीनों पहले ही प्लान किया जा चुका था और कथित रूप से सऊदी प्रिंस और इसराइल ने बार-बार ट्रंप पर यह कदम उठाने के लिए दबाव बनाया था।
2003 इराक की स्क्रिप्ट दोहराई जा रही है?
यह पूरा घटनाक्रम 2003 की इराक युद्ध की भयावह याद दिला रहा है। तब भी अमेरिका ने इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन को हटाने और लोकतंत्र लाने का बहाना दिया था। वह युद्ध 20 साल तक चला, उसका खर्चा अमेरिकी टैक्सपेयर ने दिया और नुकसान आम लोगों को हुआ।
ईरान इराक से दो गुना बड़ा देश है। सद्दाम हुसैन और लीबिया के गद्दाफी — दोनों बड़े क्रूर तानाशाह थे, लेकिन अमेरिका ने जब आक्रमण करके इन्हें हटाया तो ये देश और भी अस्थिर हो गए। आम जनता के हालात बद से बदतर हुए और ISIS जैसे नए आतंकवादी संगठन पैदा हुए।
अब सबसे बड़ा डर यही है कि कहीं ईरान भी इसी तरह अस्थिर न हो जाए। एक फॉरेन पावर का इस तरह हस्तक्षेप चीजों को बेहतर बनाने के बजाय बद से बदतर भी बना सकता है। ऊपर से देखने में लग सकता है कि एक तानाशाह का अंत हुआ तो अच्छा हुआ, लेकिन इतिहास गवाह है कि बाहरी ताकत द्वारा थोपा गया बदलाव अक्सर लंबे समय में विनाशकारी साबित होता है।
गल्फ देशों में फंसे भारतीयों की कहानी
इस युद्ध की आग सबसे पहले उन लाखों आम लोगों को झुलसा रही है जो गल्फ देशों में रहते हैं। दुबई एयरपोर्ट पर हजारों लोग फंसे हुए हैं — उनकी फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी हैं और कोई नहीं जानता कि एयरपोर्ट कब वापस खुलेगा। कई भारतीय परिवार जो छुट्टियां मनाने या काम के लिए गल्फ में गए थे, वे अब वहीं फंसे हुए हैं।
जो लोग सुबह की फ्लाइट में निकल गए, वे बच गए। लेकिन जिनकी फ्लाइट कुछ घंटे बाद की थी, वे अब एयरपोर्ट की लॉबी में बैठे इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि युद्ध सिर्फ उन देशों तक सीमित नहीं रहता जहां बम गिर रहे हैं — यह हर उस इंसान की जिंदगी बदल देता है जो उस इलाके में मौजूद है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनई मारे गए — ईरान के सरकारी टीवी ने पुष्टि की; उनकी बेटी, दामाद और पोती भी हमले में मारे गए; 40 दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान।
- ईरान ने 27 अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला किया — ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत यूएई, कतर, बहरेन, कुवैत में मिसाइलें दागी गईं; बहरेन में US नौसेना बेस पर सीधा हिट हुआ।
- ईरान के मिनाब शहर में लड़कियों के स्कूल पर बम गिरा — कम से कम 100 मासूम बच्चियों की मौत हुई।
- भारत पर गंभीर खतरा — होर्मुज बंद होने से 26 लाख बैरल रोजाना की तेल आपूर्ति रुक सकती है; गल्फ में 1 करोड़+ भारतीय फंसे; पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई की आशंका।
- PM मोदी की इसराइल यात्रा की टाइमिंग पर सवाल — हमले से दो दिन पहले मोदी इसराइल में थे; विपक्ष ने भारत की तटस्थता पर सवाल उठाए।








