Iran America War ने एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। पश्चिम एशिया की जंग में अमेरिका को बीते 24 घंटों में सबसे बड़ा झटका लगा है। ईरान ने एक साथ कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है और एक पायलट अभी भी लापता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो अब तक जीत के दावे कर रहे थे, वे पहली बार अपने नुकसान को कबूल करने पर मजबूर हो गए हैं।
ईरानी हमलों में अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान के साथ ही एक अमेरिकी A-10 वर्थहॉग अटैक एयरक्राफ्ट भी निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद एक अमेरिकी पायलट अभी भी लापता है और ईरान ने उसे पकड़ने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। पेंटागन के मुताबिक अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 300 से ज्यादा घायल हैं। यह पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचाने वाली घटना है।
24 घंटे में ईरान ने दी अमेरिका को बड़ी चोट
पश्चिम एशिया में जंग बहुत ही खतरनाक मोड़ पर आ गई है। हालात यह हो गए हैं कि अमेरिका अब खुद ईरान के हमलों का सामना नहीं कर पा रहा। ईरान ने बीते 24 घंटे में ही उसे जंग में अब तक का सबसे बड़ा नुकसान पहुंचा दिया है। एक साथ उसके कई विमान गिरा दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान ईरान के अंदर सैन्य अभियान के दौरान क्रैश हो गया। इस विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे जिनमें से एक को बचा लिया गया। जबकि दूसरा अब भी लापता है और उसके ईरान में ही कहीं छिपे होने की आशंका है।
एक अन्य घटना में कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी A-10 वर्थहॉक अटैक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया गया जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि इसका पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा।
ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर और चिनूक भी क्षतिग्रस्त
ईरान ने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। जबकि बचाव अभियान में लगे दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी हमले की चपेट में आ गए। कुवैत में ही कैंप बोरिंग पर हुए ईरानी हमलों में अमेरिकी सेना का एक बोइंग CH-47 चिनूक भारीभरकम हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।
इसे लेकर ईरानी मीडिया की तरफ से कुछ तस्वीरें भी जारी की गई हैं। यह तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि अमेरिकी वायुसेना को कितना भारी नुकसान हुआ है।
ईरानी राज्य टेलीविजन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर कोई दुश्मन पायलट दिखे तो उसे पुलिस को सौंप दें और इसके बदले इनाम देने का वादा भी किया है। जिससे साफ है कि बीते 24 घंटे अमेरिकी वायुसेना के लिए बेहद भारी रहे।
ट्रंप ने पहली बार कबूला नुकसान, बोले – यह युद्ध है
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इसे लेकर सवाल किया गया तो पहली बार अप्रत्यक्ष रूप से ही सही लेकिन उन्होंने भी अपने नुकसान को कबूल किया है। ट्रंप ने कहा कि इन घटनाओं का कूटनीति और बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ट्रंप ने कहा, “बिल्कुल नहीं। यह युद्ध है। हम युद्ध में हैं। मौजूदा हालात जटिल और संवेदनशील हैं। इसलिए मैं चल रहे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहूंगा।”
उन्होंने विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मीडिया कवरेज को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि यह एक सक्रिय सैन्य अभियान है जिसे समझने की जरूरत है। यानी जो ट्रंप कल तक अमेरिका की जीत के दावे कर रहे थे, ईरान को लगातार धमकियां दे रहे थे, अब उन्होंने चुप्पी साध ली है।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने ट्रंप पर कसा तंज
इसे लेकर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिब ने तंज भी कसा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान को लगातार 37 बार हराने के बाद उन्होंने जो यह बिना रणनीति वाला शानदार युद्ध शुरू किया था, वो सत्ता परिवर्तन से घटकर “अरे क्या कोई हमारे पायलटों को ढूंढ सकता है प्लीज” तक आ गया है।
गालिब ने लिखा, “वाह क्या जबरदस्त तरक्की है, सचमुच के जीनियस।” यह तंज साफ दिखाता है कि ईरान इस जंग में अमेरिका पर हावी हो रहा है।
पेंटागन ने स्वीकारा भारी नुकसान, 13 सैनिक शहीद
एक के बाद एक कई सैन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों के प्रभावित होने की घटनाओं ने इस युद्ध की गंभीरता और जोखिम को और बढ़ा दिया है। पेंटागन के मुताबिक अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 300 से ज्यादा घायल हैं।
इस जंग में अब तक अमेरिका को चार F-15E फाइटर जेट का नुकसान उठाना पड़ा है। उसका एक E-3 सेंट्री AWACS विमान भी ईरानी हमले में तबाह हो चुका है। ताजा हमलों को लेकर ईरान ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस ने इस इलाके के ऊपर एक MQ-1 अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया है।
जिससे साफ है कि इस जंग में ईरान का पलड़ा भारी हो गया है।
ट्रंप ने रक्षा बजट में 42% की बढ़ोतरी की मांग की
हालात यह हो गए हैं कि जंग में डटे रहने के लिए अमेरिका को अपना रक्षा बजट भी बढ़ाना पड़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले साल के लिए अमेरिका के रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की मांग की है।
व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें मिलिट्री बजट को 42% बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया है। यह रकम अमेरिकी इतिहास में रक्षा बजट में सबसे बड़ी वृद्धि है। यह साफ दर्शाता है कि यह युद्ध अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर कितना भारी बोझ बन रहा है।
ईरान ने 48 घंटे युद्धविराम का प्रस्ताव भी ठुकराया
इस बीच अमेरिका की तरफ से युद्ध विराम की कोशिशें भी जारी हैं। लेकिन वहां भी उसे कामयाबी नहीं मिल रही। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अमेरिका ने 2 अप्रैल को मित्र देशों में से किसी एक के जरिए 48 घंटे के युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था।
यह प्रस्ताव मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेनाओं के सामने बढ़ती चुनौतियों के बाद आया था। अमेरिकी प्रस्ताव का ईरान ने लिखित जवाब नहीं दिया बल्कि लगातार हमले करके जमीनी स्तर पर जवाबी कारवाई की। यानी ईरान ने 48 घंटे के युद्धविराम प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है।
इजरायल ने तेहरान में मिसाइल भंडारण केंद्र पर किए हमले
इस बीच इजरायली सेना यानी आईडीएफ ने जरूर यह दावा किया है कि उसके वायु सेना के विमानों ने तेहरान में कई बड़े सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के एरियल डिफेंस और बैलिस्टिक मिसाइल भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया।
इन हमलों में उन जगहों को भी तबाह किया गया है जहां हथियारों का उत्पादन और रिसर्च किया जाता था। लेकिन मौजूदा हालात में यह साफ है कि ईरान के खिलाफ जंग शुरू कर अमेरिका और इजरायल बुरी तरह फंस गए हैं।
यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ीं, रूस ने तेज किए हमले
रूस-यूक्रेन युद्ध में भी एक नया मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब से ईरान जंग में उलझे हैं तब से ही यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रूस के खिलाफ जंग के मैदान में वो अकेला पड़ गया है।
ना तो उसके पास हथियार बचे हैं और ना ही जंग के मैदान में टिके रहने के लिए जरूरी फंड। क्योंकि अगर रूस के साथ इस जंग में पिछले 4 साल से ज्यादा वक्त से यूक्रेन टिका हुआ है तो उसके पीछे की वजह अमेरिका और यूरोप से मिलने वाली मदद है।
लेकिन अब जब उसे अमेरिका से हथियारों की सप्लाई नहीं हो पा रही है तो वह पूरी तरह यूरोप की मदद पर निर्भर हो गया है।
जेलेंस्की ने सांसदों से वित्त विधेयक पारित करने की अपील की
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को संसद में भी सांसदों का सपोर्ट नहीं मिल रहा। ऐसे में अब उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सांसदों से अगले हफ्ते ही महत्वपूर्ण कानून पारित करने की अपील की है ताकि वित्तीय संकट को टाला जा सके।
जेलेंस्की ने कहा कि मेरे पास प्रमुख मसौदा कानूनों की एक सूची है जो फंड इकट्ठा करने के लिए जरूरी है। इनमें अदालती व्यवस्था को मजबूत करने से लेकर ऊर्जा क्षेत्र की प्रक्रियाओं में सुधार करना शामिल है।
बताया जा रहा है कि इस विधेयक पर 7 और 8 अप्रैल को वोटिंग की तैयारी है।
रूस ने लुहांस्क पर कब्जे का दावा किया, ईस्टर युद्धविराम नाकाम
रूसी सेना ने पहले ही यूक्रेन के एक और प्रांत लुहांस्क पर कब्जे का दावा किया है। जिसके बाद से यूक्रेन ईस्टर युद्धविराम की कोशिशों में जुटा हुआ है। लेकिन उसकी कोशिशें भी कामयाब होती नजर नहीं आ रही हैं।
बल्कि इसके उलट रूस की तरफ से हमले लगातार जारी हैं। ताजा हमलों में खेरसॉन, झिटोमिर, खारकीव, सुमी और डोनेस्क क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने X पर एक पोस्ट में कहा कि रात भर में लगभग 500 ड्रोन और क्रूज मिसाइलों ने यूक्रेन पर हमला किया।
यूक्रेन के ईस्टर युद्ध विराम प्रस्तावों पर मॉस्को की प्रतिक्रिया क्रूर हमलों के साथ है।
पाकिस्तान को UAE का 3.5 अरब डॉलर कर्ज चुकाना होगा
पाकिस्तान इस वक्त दो तरफा मार झेल रहा है। पश्चिम एशिया में जारी जंग से पाकिस्तान में भी ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। जिसके चलते पाकिस्तान की जनता शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ हो गई है।
शहबाज सरकार ने अचानक पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी। जहां पेट्रोल की कीमत ₹458.40 कर दी गई, वहीं डीजल की कीमत ₹520.35 हो गई। जिससे जनता में सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया और बाद में पूरे देश में ही बवाल मच गया।
जनता का गुस्सा इतना उग्र रहा कि शहबाज सरकार को बैकफुट पर आने पर मजबूर होना पड़ा। सरकार को आखिरकार घुटने टेकने पड़े और एक झटके में पेट्रोल के दाम ₹80 प्रति लीटर घटा दिए।
यूएई ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने पर किया मजबूर
पाकिस्तान ने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई से कुल 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लिया था और अब यह कर्ज लौटाने की डेडलाइन लगभग खत्म होने वाली है। हालांकि शहबाज सरकार की तरफ से इस टाइम लिमिट को बढ़ाने की मांग कई बार की गई लेकिन यूएई ने भी अपना रुख साफ कर दिया कि अब और समय नहीं दिया जाएगा।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि सरकार 11 अप्रैल को $450 मिलियन डॉलर, 17 अप्रैल को $1 अरब डॉलर और 23 अप्रैल को $1 अरब डॉलर वापस कर देगी। पाकिस्तान इस महीने 4.8 अरब डॉलर का कर्ज चुकाएगा। इसमें 8 अप्रैल को 1.3 अरब डॉलर का यूरो बॉन्ड भी शामिल है।
चीन में शी जिनपिंग ने पोलित ब्यूरो सदस्य की बलि ली
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने करीबियों पर जरूरत से ज्यादा शक करने लगे हैं। जिसके चलते चीनी सेना खोखली हो गई है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए उन्होंने अपने एक और करीबी की बलि ले ली है और इस बार भी आरोप भ्रष्टाचार के ही लगाए गए हैं।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले और चीन की सबसे शक्तिशाली पोलित ब्यूरो के सदस्य मा झिंगरुई पर कार्रवाई की गई है। कभी जिनपिंग के बगल में बैठकर चीन की किस्मत के बड़े फैसले लेने वाले इस नेता को अब गद्दार और भ्रष्ट घोषित कर जांच के घेरे में ले लिया गया है।
चीन की भ्रष्टाचार विरोधी संस्था ने पुष्टि की है कि मा झिंगरुई के खिलाफ कानून और अनुशासन के गंभीर उल्लंघन के संदेह में जांच शुरू कर दी गई है।
ग्लोबल फायर पावर 2026: बांग्लादेश के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना
ग्लोबल फायर पावर 2026 के एक ताजा रिपोर्ट ने दुनिया के ऐसे 10 देशों की लिस्ट जारी की है जिनके पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना है और इस रिपोर्ट में पहले नंबर पर चौंकाने वाला नाम है।
इस लिस्ट में नंबर 10 और 9 पर ताइवान और उत्तर कोरिया हैं। इन दोनों ही देशों के पास करीब 19-19 लाख सैनिक हैं। नंबर 8 पर अमेरिका है। दुनिया का सबसे ताकतवर देश सैनिकों की कुल संख्या के मामले में 21 लाख के साथ काफी पीछे है।
नंबर 7 और 6 पर चीन और रूस का नाम है। चीन के पास एक्टिव सैनिक तो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं लेकिन कुल गिनती में वो 31 लाख पर सिमट गया। रूस 36 लाख के साथ छठे नंबर पर है।
नंबर 5 और 4 पर दक्षिण कोरिया और भारत का नाम है। दक्षिण कोरिया 35 लाख की फौज रखता है। वहीं भारत अपनी विशाल सेना और रिजर्व जवानों को मिलाकर 49 लाख की ताकत के साथ चौथे नंबर पर है।
तीसरे नंबर पर इस लिस्ट में यूक्रेन है। रूस से चल रही जंग ने यूक्रेन को रातोंरात फौजी देश बना दिया है। आज इनके पास 50 लाख से ज्यादा लोग सेना से जुड़े हुए हैं।
दूसरे नंबर पर वियतनाम का नाम है। इस छोटे से देश के पास 53 लाख रिजर्व सैनिक ऐसे हैं जो खेतीबाड़ी करते हैं लेकिन जंग के एक बुलावे पर बंदूक उठा लेते हैं।
और इन सभी देशों को पछाड़कर नंबर वन पर है बांग्लादेश। ग्लोबल फायर पावर 2026 की रिपोर्ट कहती है कि बांग्लादेश के पास 70 लाख से ज्यादा सैन्यकर्मी हैं। उनके पास बॉर्डर पर रहने वाले असली सैनिक तो सिर्फ 2 लाख हैं लेकिन उन्होंने अपने रिजर्व और अर्धसैनिक बलों की तैयारी से दिग्गज देशों को पीछे छोड़ दिया है।
क्या है पश्चिम एशिया युद्ध का असर?
पश्चिम एशिया में जारी यह युद्ध पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद अब बाब अल मंदेब पर भी ईरान की नजर है। यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है।
अगर ईरान इस मार्ग पर भी नियंत्रण करने की कोशिश करता है तो तेल के दाम आसमान छू सकते हैं। पूरी दुनिया में इसका असर महसूस होगा और भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह बड़ी चुनौती बन सकता है।
पश्चिम एशिया में लगभग एक महीने से जारी यह जंग अब नए खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिका और इजरायल की गठबंधन सेना ईरान के सामने कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
• ईरान ने 24 घंटे में अमेरिकी F-15 और A-10 विमान गिराए, एक पायलट लापता
• पेंटागन ने स्वीकारा – 13 सैनिक शहीद, 300 से अधिक घायल
• ट्रंप ने पहली बार कबूला नुकसान, 1.5 ट्रिलियन डॉलर रक्षा बजट की मांग
• यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ीं, रूस ने लुहांस्क पर कब्जे का दावा किया
• पाकिस्तान UAE को 3.5 अरब डॉलर कर्ज चुकाने पर मजबूर
• चीन में शी जिनपिंग ने पोलित ब्यूरो सदस्य मा झिंगरुई के खिलाफ जांच शुरू की
• ग्लोबल फायर पावर 2026: बांग्लादेश के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना












