Intermittent Fasting Weight Loss: आजकल सोशल मीडिया पर इंटरमिटेंट फास्टिंग, कीटो डाइट, OMAD डाइट और DASH डाइट जैसी डाइट्स की खूब चर्चा है। सेलिब्रिटीज और इन्फ्लुएंसर्स इनकी मदद से तेजी से वजन घटा रहे हैं। लेकिन जब आप उन्हीं डाइट्स को फॉलो करते हैं तो आपका वजन नहीं घट रहा। ऐसा क्यों होता है? यथार्थ हॉस्पिटल, फरीदाबाद की चीफ डाइटिशियन डॉ. आस्था शर्मा ने इसके पीछे की असली वजहें बताई हैं।
डॉ. आस्था शर्मा कहती हैं कि हर किसी का शरीर अलग होता है और इसलिए डाइट का असर भी अलग-अलग होता है। यह कोई जादू नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया है जिसमें कंसिस्टेंसी सबसे जरूरी है।
मेटाबॉलिज्म सबका अलग होता है
डॉ. आस्था बताती हैं कि आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म दूसरों से अलग होता है। आपकी बॉडी अलग है, दूसरों की बॉडी अलग है। उम्र का फैक्टर हो सकता है कि आपकी उम्र वो नहीं है जो डाइट फॉलो करने वाले की है।
जेनेटिक फैक्टर भी बड़ी भूमिका निभाता है। अगर फैमिली हिस्ट्री में थायरॉइड, PCOS या इंसुलिन रेजिस्टेंस है तो इसकी वजह से भी वजन नहीं घटता।
फिजिकल एक्टिविटी की कमी
डॉ. आस्था कहती हैं कि अगर आप फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर रहे हैं तो यह बड़ी वजह हो सकती है। डाइट अकेले असर नहीं करती, फिजिकल एक्टिविटी भी उसमें जोड़ना जरूरी है। डाइट और एक्सरसाइज दोनों साथ में काम करते हैं।
अगर आप डाइट को गलत तरह से फॉलो कर रहे हैं या पोर्शन साइज को कंट्रोल नहीं कर रहे हैं, तो यह भी एक बड़ी वजह है कि दूसरों पर वो डाइट असर कर रही है और आप पर नहीं।
कैलोरीज और प्रोटीन का संतुलन
डॉ. आस्था बताती हैं कि अगर आपका वजन नहीं घट रहा तो इसकी वजह यह हो सकती है कि आप कैलोरीज और फैट ज्यादा ले रहे हैं। आप प्रोटीन अपनी डाइट में नहीं रख पा रहे हैं या फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर रहे हैं।
नींद पूरी न होना और स्ट्रेस भी बड़े कारण हैं। अगर आप ज्यादा स्ट्रेस ले रहे हैं, ऑफिस का काम लेट नाइट कर रहे हैं, तो यह भी वजन न घटने की वजह हो सकती है।
क्या करें अगर वजन नहीं घट रहा?
डॉ. आस्था सलाह देती हैं कि सबसे पहले पर्सनलाइज्ड डाइट प्लान बनाना चाहिए। रोजाना कम से कम 45 मिनट ब्रिस्क वॉक करनी चाहिए। ऑयली फूड, जंक फूड अपनी डाइट से हटाना है और प्रिजर्वेटिव्स नहीं लेने हैं।
अगर यह सब करने के बावजूद भी वजन नहीं घट रहा है, तो डॉक्टर को दिखाइए, टेस्ट करवाइए और डाइटिशियन से पर्सनलाइज्ड डाइट प्लान बनवाइए। डाइट में कंसिस्टेंसी रखनी है। डाइट कोई जादू नहीं है, यह एक प्रोसेस है।
हेल्थ बजट 2026-27: कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को साल 2026-27 का बजट पेश किया। इस बार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को ₹16,530 करोड़ से ज्यादा का बजट मिला है, जो पिछले साल की तुलना में 10% ज्यादा है।
हेल्थ रिसर्च के लिए डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च को ₹4,821 करोड़ का बजट दिया गया है। सबसे बड़ी घोषणा यह है कि कैंसर के इलाज में काम आने वाली 17 दवाओं से बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है।
बेसिक कस्टम ड्यूटी क्या है?
जब भी कोई सामान विदेश से आता है तो सरकार उस पर एक टैक्स लगाती है, इसे बेसिक कस्टम ड्यूटी कहते हैं। मान लीजिए आपने ₹10,000 की कोई दवा मंगवाई और उस पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी लगी, तो आपको ₹1,000 टैक्स देना पड़ेगा।
लेकिन जब बेसिक कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी तो वो दवा सस्ती हो जाएगी। इसके अलावा सात रेयर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली खास दवाओं और स्पेशल फूड पर भी कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी।
एक्सपर्ट्स का कहना: कैंसर मरीजों को बड़ी राहत
मेदांता में मेडिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर डॉ. कुंजहरी मेधी कहते हैं कि देश में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिन दवाओं से बेसिक कस्टम ड्यूटी हटाई गई, वो टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और हॉर्मोनल थेरेपी से जुड़ी हैं।
यह सभी अलग-अलग तरह के कैंसर के लिए एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट हैं। कैंसर का इलाज लंबे समय तक चलता है और महंगा भी होता है। इसलिए दवाएं सस्ती होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
बायोफार्मा शक्ति: भारत बनेगा ग्लोबल हब
बजट में बायोफार्मा शक्ति की घोषणा भी की गई है। यह सरकार की एक नई पहल है जिसके तहत 5 सालों में ₹10,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे ताकि भारत को ग्लोबल बायोफार्मा हब के रूप में स्थापित किया जा सके।
बायोफार्मा का मतलब है जीवित चीजों से बनने वाली दवाएं। यानी वो दवाएं जो इंसानों के सेल्स, बैक्टीरिया, फंगस या वायरस से बनाई जाती हैं। इनमें शामिल हैं वैक्सीन, एंटीबॉडी ट्रीटमेंट्स, जीन थेरेपीज, सेल इम्प्लांट, मॉडर्न इंसुलिन और रिकॉम्बिनेंट प्रोटीन ड्रग्स।
तीन नए NIPER खोले जाएंगे
बायोफार्मा से जुड़े नेटवर्क को मजबूत करने के लिए तीन नए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) खोले जाएंगे। साथ ही पहले से मौजूद सात NIPERs को अपग्रेड किया जाएगा।
शारदा केयर हेल्थ सिटी में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट और हेड डॉ. अनिल ठकवानी कहते हैं कि बायोफार्मा शक्ति जैसी पहल से बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं का विकास तेजी से होगा। इससे भविष्य में मरीजों को ज्यादा सटीक और असरदार कैंसर थेरेपीज मिल सकेंगी।
हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव
बजट में हेल्थ केयर सेक्टर के लिए कई दूसरी जरूरी घोषणाएं भी की गई हैं। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत नए AIIMS बनाए जाएंगे।
मेंटल हेल्थ केयर सर्विस को मजबूत करने के लिए उत्तर भारत में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस खोला जाएगा। वहीं रांची और तेजपुर के मेंटल हेल्थ इंस्टिट्यूशंस को अपग्रेड किया जाएगा।
हर जिले में इमरजेंसी सेंटर
तीन नए ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद भी खोले जाएंगे। हर जिला अस्पताल में इमरजेंसी एंड ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भी बजट में है।
साथ ही प्राइवेट अस्पतालों के साथ पार्टनरशिप में पांच मेडिकल टूरिज्म हब्स भी बनाए जाएंगे। एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा।
करी पत्ता बनाम धनिया: कौन ज्यादा हेल्दी?
पारस हेल्थ, गुरुग्राम की डाइटिशियन दृश्या आले बताती हैं कि करी पत्ता और धनिया दोनों ही खाने में स्वाद बढ़ाते हैं और सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं।
करी पत्ता आयरन, कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। आयरन से खून की कमी दूर होती है, कैल्शियम से हड्डियां मजबूत होती हैं, फाइबर पाचन सुधारता है और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर के सेल्स को नुकसान से बचाते हैं।
करी पत्ता के फायदे
करी पत्ता मेटाबॉलिज्म बूस्ट करता है। मेटाबॉलिज्म यानी हम जो खाना खाते हैं उसे एनर्जी में बदलने, नए सेल्स बनाने और पुराने को बचाए रखने का पूरा प्रोसेस। करी पत्ता ब्लड शुगर कंट्रोल करने और बालों के लिए भी अच्छा माना जाता है।
वहीं धनिए की पत्ती विटामिन A, विटामिन C और विटामिन K का अच्छा सोर्स है। विटामिन A आंखों के लिए फायदेमंद है, विटामिन C इम्युनिटी मजबूत करता है और विटामिन K हड्डियों को मजबूत बनाता है।
इस्तेमाल का सही तरीका
धनिए की पत्तियों में डिटॉक्सिफाइंग गुण भी होते हैं जो शरीर से टॉक्सिंस यानी जहरीले तत्वों को निकालने में मदद करते हैं और पाचन भी बेहतर बनाते हैं।
दृश्या आले कहती हैं कि करी पत्ते को तड़के में हल्का सा पकाकर इस्तेमाल करें ताकि इसके पोषक तत्व नष्ट न हों। इन्हें ज्यादा जलाने या डीप फ्राई करने से बचें।
वहीं धनिए की पत्तियों को सब्जी या दाल बन जाने के बाद डालें, गार्निश के तौर पर यानी ऊपर से। अगर इन्हें पहले ही डाल दिया जाएगा तो इनमें मौजूद विटामिंस नष्ट हो सकते हैं।
सावधानियां
दोनों पत्तों को हमेशा ताजा, अच्छी तरह धोकर और सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। जिन्हें लो BP या थायरॉइड से जुड़ी दिक्कतें हैं, उन्हें बहुत ज्यादा धनिए के पत्ते खाने से बचना चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
- हर किसी का मेटाबॉलिज्म अलग होता है, इसलिए डाइट का असर भी अलग होता है – उम्र, जेनेटिक्स, थायरॉइड, PCOS जैसे फैक्टर्स वजन घटने में बाधा बन सकते हैं
- डाइट के साथ फिजिकल एक्टिविटी, पूरी नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट जरूरी है
- पर्सनलाइज्ड डाइट प्लान बनवाएं और कंसिस्टेंसी बनाए रखें, डाइट कोई जादू नहीं बल्कि एक प्रोसेस है
- हेल्थ बजट 2026-27 में कैंसर की 17 दवाओं से कस्टम ड्यूटी हटी, दवाएं होंगी सस्ती
- बायोफार्मा शक्ति से भारत बनेगा ग्लोबल बायोफार्मा हब, ₹10,000 करोड़ का निवेश
- करी पत्ते को तड़के में हल्का पकाएं, धनिया को गार्निश के तौर पर बाद में डालें








