Indian Railway: देश की बिजली न हो गुल, इसके लिए रेलवे ने कैंसिल की 670 ट्रेनें

Indian Railway: देश में गर्मी के बढ़ते तापमान ने अप्रैल महीने में बिजली की डिमांड (Power Demand) को बढ़ा दिया है। बिजली की डिमांड बढ़ने से कोयले की खपत बढ़ गई है। कोयले की इस बढ़ी जरूरत को पूरा करने के लिए रेलवे पर ढुलाई का प्रेशर बढ़ गया है। यही कारण है कि रेलवे को कुछ हफ्तों से रोजाना मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को कैंसिल करना पड़ रहा है। कोयले से लदी गाड़ियों के रास्ता देने के लिए रेलवे को ऐसा करना पड़ रहा है। भारतीय रेलवे (Indian Railway) के मुताबिक 24 मई तक 670 पैसेंजर ट्रेनें कैंसल की गई हैं। इसमें 500 से अधिक ट्रेनें लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें (Mail Express Trains)  हैं।

ढुलाई के लिए बढ़ाई ट्रेनें

रिपोर्ट्स के मुताबिक रेलवे ने कोयले की ढुलाई के लिए रोजाना 415 मालगाड़ियां देने का वादा किया है। हर मालगाड़ी में करीब 3,500 टन कोयला ढोने की क्षमता है। अधिकारियों के मुताबिक कहा कि पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक बढ़ाने के लिए कम से कम और दो महीने और जारी रह सकता है। इससे पावर प्लांट्स के पास कोयले का स्टॉक रहेगा। साथ ही जुलाई-अगस्त में भी बिजली संकट को टाला जा सकेगा। जुलाई-अगस्त में बारिश के कारण कोयले की माइनिंग का काम कम होता है।

देश की 70 फीसदी बिजली में इस्तेमाल होता है कोयला

देश में 70 फीसदी बिजली बनाने में कोयले का उपयोग होता है। रेलवे ने भी कोयले की ढुलाई बढ़ाने के लिए कई लंबी दूरी की ट्रेनें चलाई हैं। सीनियर अधिकारी कोयला की ढुलाई पर नजर रख रहे हैं। कोयला लाने-ले जाने के रूट्स पर अगर कोई दिक्कत आती है तो रेलवे उसे पहले ठीक करता है।

बढ़ाई ढुलाई के लिए ट्रेनों की संख्या

आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में रेलवे रोजाना कोयले की ढुलाई के लिए 269 मालगाड़ियां चलाता था। 2017-18 और 2018-19 में ट्रेनों की संख्या में इजाफा किया गया। पिछले साल रोजाना 347 मालगाड़ियां चलाई गई और गुरुवार तक यह संख्या रोजाना 400 से 405 पहुंच गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इस साल कोयले की मांग में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

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