India-US Trade Deal 2026: भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में चल रही खींचतान अब खत्म हो गई है और तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। 7 फरवरी 2026 को White House और भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर ‘इंट्रिम ट्रेड एग्रीमेंट’ (अंतरिम व्यापार समझौता) का फ्रेमवर्क जारी कर दिया है। यह समझौता भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है क्योंकि अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया भारी-भरकम जुर्माना हटा दिया है और भारतीय किसानों के हितों को भी आंच नहीं आने दी है।
किसानों और डेयरी सेक्टर पर कोई समझौता नहीं
इस डील की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर देश के अन्नदाताओं के लिए है। भारत ने इस व्यापार समझौते में अपने कृषि और डेयरी सेक्टर (Dairy Sector) से कोई भी समझौता नहीं किया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल, तंबाकू और कुछ सब्जियों जैसे संवेदनशील उत्पादों को पूरी तरह से ‘संरक्षित’ (Protected) रखा गया है। यानी अमेरिकी कृषि उत्पादों की वजह से भारतीय किसानों को नुकसान नहीं होगा।
ट्रंप ने हटाया 25% का ‘पेनाल्टी टेरिफ’
इस समझौते के साथ ही अमेरिका ने भारत को एक बड़ी राहत दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके भारत पर रूसी तेल आयात (Russian Oil Import) को लेकर लगाया गया अतिरिक्त 25% का ‘पेनाल्टी टेरिफ’ हटा दिया है।
पहले ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 25% टेरिफ और रूस से तेल खरीदने की सजा के तौर पर एक्स्ट्रा टैक्स लगाया था, जिसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया था। लेकिन अब इस नए फ्रेमवर्क के तहत, अमेरिका भारतीय उत्पादों पर रेसिप्रोकल टेरिफ को घटाकर सिर्फ 18% करेगा।
30 ट्रिलियन डॉलर का खुलेगा बाजार
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में तैयार हुए इस फ्रेमवर्क से भारतीय निर्यातकों, खासकर एमएसएमई (MSMEs), किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का विशाल अमेरिकी बाजार खुल जाएगा।
निर्यात बढ़ने से भारत में महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, होम डेकोर और हस्तशिल्प जैसे सेक्टर्स को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बिना किसी बाधा के एंट्री मिलेगी।
क्या सस्ता होगा और भारत ने क्या दिया?
इस समझौते में ‘लेन-देन’ (Give and Take) का भी ध्यान रखा गया है। जहां अमेरिका जेनेरिक दवाओं, रत्न-आभूषण और विमान के पुर्जों पर टेरिफ ‘शून्य’ (Zero) करेगा, वहीं भारत ने भी कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाने की बात कही है।
भारत अमेरिका से आने वाले ड्राइड डिस्टिनल्स ग्रेन्स, पशु आहार, रेड सोरघम (Red Sorghum), ड्राई फ्रूट्स, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स (शराब) पर शुल्क कम या खत्म करेगा। इसके अलावा, भारत ने अगले 5 सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (500 Billion Dollar) के सामान खरीदने का इरादा भी जताया है, जिसमें ऊर्जा उत्पाद और टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
आम आदमी पर असर (Human Impact)
इस डील का सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजगार पर पड़ेगा। जहां एक तरफ ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलने से फैक्ट्रियों में काम बढ़ेगा और नई नौकरियां मिलेंगी, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी ड्राई फ्रूट्स और कुछ खाद्य पदार्थ भारतीय बाजारों में सस्ते हो सकते हैं।
‘जानें पूरा मामला’
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत फरवरी 2025 में शुरू हुई थी। पिछले एक साल से दोनों देशों के बीच तनाव चल रहा था, खासकर तब जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया था। 2 फरवरी 2026 को पीएम मोदी और ट्रंप ने सहमति जताई थी और अब 7 फरवरी को आधिकारिक फ्रेमवर्क जारी कर दिया गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
बड़ी राहत: अमेरिका ने भारत पर से रूसी तेल खरीद का 25% पेनाल्टी टेरिफ हटा दिया है।
सुरक्षा: भारतीय कृषि और डेयरी उत्पाद (दूध, गेहूं, चावल) पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
नया टेरिफ: अमेरिका अब भारतीय उत्पादों पर अधिकतम 18% टेरिफ ही लगाएगा।
शून्य शुल्क: जेनेरिक दवाओं, रत्नों और विमान के पुर्जों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
भविष्य: भारत अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीदारी करेगा।








