India US Trade Deal Agitation: भारत और अमेरिका के बीच होने जा रहे व्यापार समझौते (Trade Deal) की आग अब देश के खेतों तक पहुंच गई है। नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच जिस डील को ऐतिहासिक बताया जा रहा है, उसे देश के अन्नदाताओं ने ‘आत्मसमर्पण’ करार दिया है। Samyukta Kisan Morcha (SKM) ने मोदी सरकार पर भारतीय खेती को अमेरिकी कंपनियों के हाथों गिरवी रखने का गंभीर आरोप लगाया है और इसके विरोध में 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा कर दी है।
‘आत्मसमर्पण की नीति’ और किसानों का गुस्सा
संयुक्त किसान मोर्चा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र की Bharatiya Janata Party (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। मोर्चा का कहना है कि सरकार द्वारा जारी किया गया ‘अंतरिम व्यापार ढांचा’ अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के सामने पूर्ण घुटने टेकने जैसा है।
आरोप है कि भारत सरकार ने अमेरिका से आने वाले सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDG), पशु आहार (लाल ज्वार), मेवे, ताजे फल, सोयाबीन तेल और शराब जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क (Tariff) या तो खत्म कर दिया है या बेहद कम कर दिया है। किसानों का तर्क है कि इससे भारतीय बाजार अमेरिकी सामानों से पट जाएगा और यहां का स्थानीय किसान बर्बाद हो जाएगा।
पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग
किसानों के गुस्से के केंद्र में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal हैं। एसकेएम ने उन पर देश से झूठ बोलने का आरोप लगाया है। मोर्चा का कहना है कि गोयल ने दावा किया था कि कृषि और डेयरी सेक्टर को मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से बाहर रखा जाएगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
मोर्चा ने दावा किया कि यूके और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों में डेयरी उत्पाद पहले ही शामिल हैं और अब अमेरिका के लिए भी दरवाजे खोले जा रहे हैं। इसे किसानों के साथ ‘विश्वासघात’ और ‘गद्दारी’ बताते हुए एसकेएम ने पीयूष गोयल के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
दूध और सेब पर सबसे बड़ा संकट
समझौते की शर्तों को लेकर सबसे बड़ी चिंता डेयरी और फल उत्पादकों को है। एसकेएम के अनुसार:
डेयरी: अमेरिका से दूध के आयात के लिए ‘गैर-शुल्क बाधाओं’ को हटाया जा रहा है। इसका मतलब है कि अब उन जानवरों का दूध भी भारत आ सकेगा जिन्हें मांसाहार (Non-veg feed) खिलाया गया है, जिसे पहले धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से रोका गया था।
फल: अमेरिका से सेब, अनानास और नारियल के आयात को खुली छूट मिलने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों की बागवानी अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी।
18% बनाम 0% का खेल
किसानों ने इस डील को एकतरफा बताया है। उनका कहना है कि यह ‘मुक्त व्यापार’ नहीं है, बल्कि भारत का नुकसान है। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका भारतीय सामानों पर 18% का शुल्क लगाएगा (जो पहले शून्य या कम था), जबकि भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर लगने वाले 30% से 150% तक के भारी-भरकम शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है। इसका सीधा मतलब है—महंगा निर्यात और सस्ता आयात।
जीएम बीजों का खतरा और 12 फरवरी का अल्टीमेटम
एसकेएम ने चेतावनी दी है कि इस समझौते से भारत में जीएम (Genetically Modified) खाद्य पदार्थों और बीजों की बाढ़ आ जाएगी, जिससे हमारी प्राकृतिक खेती और मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो जाएगी। मक्का और सोयाबीन के आयात से पशु आहार बाजार पर अमेरिकी कंपनियों का कब्जा हो जाएगा।
इन सभी मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से इस डील पर हस्ताक्षर न करने की अपील की है। अगर सरकार पीछे नहीं हटती है, तो 12 फरवरी 2026 को देशभर के किसान, मजदूर और आम जनता एकजुट होकर ‘आम हड़ताल’ करेंगे और सड़कों पर उतरेंगे।
यह मामला सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता का है। अगर भारत अपनी बुनियादी खाद्य जरूरतों (जैसे तेल, दाल, और पशु आहार) के लिए अमेरिका पर निर्भर हो गया, तो भविष्य में यह एक बड़ी रणनीतिक कमजोरी बन सकता है। अमेरिकी कृषि भारी सब्सिडी पर चलती है, जबकि भारतीय किसान ‘नकारात्मक सब्सिडी’ और कर्ज के बोझ तले दबा है। ऐसे में, बिना सुरक्षा कवच के भारतीय बाजार को खोलना छोटे किसानों के लिए अस्तित्व का संकट पैदा कर सकता है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
आरोप: मोदी सरकार ने अमेरिकी कंपनियों के आगे आत्मसमर्पण किया।
मांग: पीयूष गोयल का इस्तीफा और डील रद्द करना।
असर: डेयरी, फल और पशु आहार बाजार पर अमेरिकी कब्जा।
विरोध: 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शन।
मुद्दा: अमेरिकी माल पर 0% टैक्स, जबकि भारतीय माल पर 18% टैक्स।








