India UAE Strategic Partnership : भारत की राजधानी नई दिल्ली में 19 जनवरी 2026 को ऐसा कुछ हुआ, जिसने बिना किसी शोर-शराबे के पाकिस्तान की महीनों से चली आ रही रणनीति को झटका दे दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच महज कुछ घंटों की मुलाकात ने पश्चिम एशिया की राजनीति में साफ संदेश दे दिया कि भारत अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक ताकत भी है।
तीन घंटे की डिप्लोमेसी, असर दूर तक
यह कोई लंबा स्टेट विजिट नहीं था और न ही इसे लेकर पहले से कोई बड़ा प्रचार हुआ। लेकिन निजी और प्रतिनिधिमंडल स्तर पर हुई गहन बातचीत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के उस नैरेटिव को कमजोर कर दिया, जिसे ‘इस्लामिक नाटो’ के नाम से प्रचारित किया जा रहा था।
विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने इस दौरे को छोटा लेकिन बेहद ठोस बताया, और यहीं से साफ हो गया कि रणनीति पहले से तैयार थी।
पाकिस्तान की ‘Fighter Jet Diplomacy’ क्या थी?
पाकिस्तान बीते कुछ महीनों से चीन की मदद से बने JF-17 Thunder Fighter Jet को बेचकर खुद को एक वैश्विक डिफेंस सप्लायर के रूप में पेश कर रहा था। इसका मकसद था सैन्य संकट की स्थिति में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच एक त्रिपक्षीय रक्षा ढांचा खड़ा करना।
हालांकि, सऊदी अरब और तुर्की की ओर से किसी औपचारिक रणनीतिक संधि की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन पाकिस्तान इसे पहले ही एक बड़े गठबंधन की तरह बेच रहा था।
India-UAE Strategic Partnership का नया फ्रेमवर्क
यूएई राष्ट्रपति के इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने Letter of Intent पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत रक्षा निर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त क्षमता विकास, नियमित सैन्य अभ्यास और सेवा प्रमुखों के दौरे एक औपचारिक ढांचे में लाए जाएंगे।
इसका सीधा संदेश यह है कि पश्चिम एशिया में भारत अब केवल ट्रेड पार्टनर नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार बन चुका है।
डिफेंस से आगे, स्पेस और AI तक समझौते
रक्षा के साथ-साथ भारत और यूएई ने अंतरिक्ष सहयोग में भी बड़ा कदम उठाया। दो लॉन्च सुविधाओं, सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग और स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर सहमति बनी।
इसके अलावा नागरिक परमाणु ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्राथमिक सहयोग क्षेत्र घोषित किया गया। यूएई भारत में डेटा सेंटर्स, सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करेगा।
आर्थिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान से कई गुना आगे भारत
यूएई हर साल भारत को 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति करेगा, जिससे वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर बन गया है।
दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले पाकिस्तान का दिसंबर 2025 तक का विदेशी मुद्रा भंडार महज 21 अरब डॉलर बताया गया है।
आतंकवाद पर सीधा और सख्त संदेश
भारत और यूएई ने सीमा पार आतंकवाद की खुलकर निंदा की। नेताओं ने साफ कहा कि आतंकवाद, उसके फाइनेंसर और समर्थकों—सभी को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
एफएटीएफ के तहत टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर सहयोग और मजबूत करने पर भी सहमति बनी। यह बयान पाकिस्तान के लिए बिना नाम लिए सीधा संदेश था।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
इस रणनीतिक साझेदारी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को गति मिलेगी। इसका असर रोजगार, तकनीकी विकास और दीर्घकालीन सुरक्षा पर साफ दिखेगा।
क्या है पूरा मामला (पृष्ठभूमि)
जहां पाकिस्तान JF-17 बेचकर एक कथित इस्लामिक सैन्य गठबंधन का सपना देख रहा था, वहीं भारत ने यूएई जैसे मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के साथ डिफेंस, स्पेस, न्यूक्लियर, एआई और एनर्जी में वास्तविक और ठोस गठबंधन खड़ा कर दिया। बिना धमकी, बिना शोर—लेकिन पूरी रणनीति के साथ।
मुख्य बातें (Key Points)
- यूएई राष्ट्रपति का छोटा दौरा, लेकिन रणनीतिक असर बहुत बड़ा
- India-UAE रक्षा, स्पेस और AI सहयोग औपचारिक ढांचे में
- पाकिस्तान की फाइटर जेट डिप्लोमेसी को करारा झटका
- आतंकवाद पर भारत-यूएई का सख्त और स्पष्ट रुख








