India Brazil Rare Earth Deal: चीन जो दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन और प्रोसेसिंग पर लगभग 70% से 90% तक नियंत्रण रखता है, उसकी हेकड़ी को कम करने के लिए भारत ने ब्राजील के साथ एक अहम डील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ब्राजील के साथ जरूरी मिनरल एग्रीमेंट से चीन पर निर्भरता कम हो सकती है। यह मजबूत सप्लाई चेन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 22 फरवरी को दिल्ली में पीएम मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा की मुलाकात के दौरान कुल नौ बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें रेयर अर्थ मिनरल्स पर सहयोग का समझौता सबसे अहम है।
क्यों अहम है रेयर अर्थ मिनरल्स पर यह डील?
आप जानते हैं कि आजकल मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक कार, कंप्यूटर, डिफेंस इक्विपमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सोलर पैनल और विंड टरबाइन – इन सब में कुछ खास खनिज लगते हैं। इन्हें रेयर अर्थ एलिमेंट्स या क्रिटिकल मिनरल्स कहा जाता है, जैसे नियोडिमियम, लिथियम, नायोबियम आदि। ये बहुत जरूरी हैं, लेकिन इनकी सप्लाई ज्यादातर चीन के हाथ में है। दुनिया के 70 से 90% रेयर अर्थ मिनरल्स का खनन और प्रोसेसिंग चीन करता है। अगर चीन कभी एक्सपोर्ट रोक दे या कीमत बढ़ा दे, तो पूरी दुनिया की मुश्किल बढ़ जाती है। भारत भी इन खनिजों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है। लेकिन अब भारत ने एक स्मार्ट कदम उठाया है और ब्राजील के साथ यह डील साइन की है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते पर कहा कि यह क्रिटिकल मिनरल्स का एग्रीमेंट चीन पर निर्भरता कम करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम है। इससे रेजिलिएंट सप्लाई चेन (मजबूत आपूर्ति श्रृंखला) बनेगी, यानी ऐसी सप्लाई चेन जो किसी एक देश पर निर्भर न हो। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया।
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ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने क्या कहा?
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा ने कहा कि हमारा ट्रेड अभी 5 बिलियन डॉलर के आसपास है, लेकिन 2030 तक इसे 30 बिलियन डॉलर तक ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूरी बहुत है, लेकिन पोटेंशियल भी बहुत ज्यादा है।
इस डील से दोनों देशों को क्या फायदा होगा?
ब्राजील के पास खनिज: ब्राजील के पास बहुत सारे अहम खनिज हैं, जैसे नायोबियम, लिथियम, आयरन वगैरह। ब्राजील दुनिया में नायोबियम का सबसे बड़ा उत्पादक है।
भारत के पास तकनीक: भारत के पास अच्छी तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है और हम इन खनिजों को प्रोसेस करके प्रोडक्ट्स बना सकते हैं।
दोनों देश मिलकर एक्सप्लोरेशन, माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग और रिफाइनिंग में साथ काम करेंगे। एक-दूसरे में निवेश भी करेंगे। इससे भारत की प्रोसेसिंग क्षमता भी बढ़ेगी, क्योंकि भारत रेयर अर्थ रिजर्व के मामले में दुनिया में पांचवें नंबर पर है, लेकिन प्रोसेसिंग में पीछे है।
किन-किन क्षेत्रों में हुए हैं समझौते?
रेयर अर्थ मिनरल्स के अलावा भी दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए हैं:
आयरन और ब्लेडिंग के लिए 500 मिलियन डॉलर की फैसिलिटी
अडानी और एम्ब्रेयर की पार्टनरशिप से E175 जेट की असेंबली लाइन
फार्मा में कैंसर दवाओं पर जॉइंट रिसर्च
बायो एनर्जी और डिजिटल पार्टनरशिप
एयरोस्पेस और ऑटो सेक्टर में सहयोग
भारत-ब्राजील ट्रेड का आंकड़ा और टारगेट
आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच ट्रेड पिछले साल 25% बढ़ा है। 2006 में यह सिर्फ 2.4 बिलियन डॉलर था और अब बढ़कर 15 बिलियन डॉलर हो गया है। अब टारगेट है कि 2030 तक इसे दोगुना या उससे भी ज्यादा किया जाए। यह डील सिर्फ दो देशों के बीच ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी एक मिसाल बनने वाली है।
मुख्य बातें (Key Points)
भारत और ब्राजील के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स पर अहम समझौता।
इस डील का मकसद चीन पर निर्भरता कम करना और मजबूत सप्लाई चेन बनाना है।
पीएम मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला की मुलाकात में कुल 9 समझौते हुए।
दोनों देशों के बीच ट्रेड 15 बिलियन डॉलर, 2030 तक 30 बिलियन डॉलर का टारगेट।
डिफेंस, एयरोस्पेस, फार्मा और एनर्जी सेक्टर में भी सहयोग बढ़ेगा।








