Imaan Mazari Pakistan Lawyer : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक ऐसी कहानी सामने आई है जो इंसाफ की लड़ाई लड़ने वालों की मुश्किल राह को बयां करती है। 32 वर्षीय ईमान मज़ारी, जो एक बहादुर ह्यूमन राइट्स वकील हैं, को उनके पति हादी अली चट्ठा के साथ 10 साल की सजा सुनाई गई है। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर राज्य विरोधी (Anti-State) सामग्री फैलाई थी।
ईमान ने हमेशा उन मुद्दों पर आवाज उठाई है जो पाकिस्तान में सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। वो अल्पसंख्यकों की रक्षा करती हैं, बदनामी के आरोपों में फंसे पत्रकारों का साथ देती हैं और जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों के लिए लड़ती हैं। लेकिन उनकी यह हिम्मत अब उन्हें खुद मुसीबतों में डाल रही है।
सोशल मीडिया पोस्ट बनी सजा की वजह
इस्लामाबाद की एक अदालत ने हाल ही में ईमान और उनके पति को Prevention of Electronic Crimes Act (PECA) के तहत दोषी ठहराया। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, ईमान ने बेहद आपत्तिजनक सामग्री फैलाई जो पाकिस्तान की सेना की आलोचना करती थी।
अदालत ने दंपत्ति को तीन अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई – PECA की धारा 9 के तहत 5 साल की कठोर कारावास, धारा 10 के तहत 10 साल की कठोर कारावास और धारा 26-A के तहत 2 साल की कठोर कारावास। ये सभी सजाएं एक साथ (समवर्ती) चलेंगी, जिसका मतलब है कि उन्हें अधिकतम 10 साल जेल में रहना होगा।
यह सजा उस वक्त सुनाई गई जब दोनों एक कोर्ट हियरिंग के लिए जा रहे थे और उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत में नहीं डरीं ईमान
सजा सुनाए जाने के बाद भी ईमान का हौसला कम नहीं हुआ। अदालत में उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “इस देश में सच्चाई बोलना बहुत मुश्किल लगता है। हम जानते थे कि यह काम आसान नहीं होगा लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।”
ईमान का यह बयान उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वो भले ही जेल जाएं, लेकिन मजलूमों की आवाज उठाना नहीं छोड़ेंगी।
कौन हैं ईमान मज़ारी
ईमान एक प्रो-बोनो वकील हैं, यानी वह मुफ्त में मामले लड़ती हैं। उन्होंने पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील मामलों पर काम किया है। उनके क्लाइंट्स में शामिल हैं:
- बलूच समुदाय के वे लोग जो जबरन गायब करा दिए गए
- प्रसिद्ध बलूच एक्टिविस्ट महरंग बलूच
- ईशनिंदा (खुदा के खिलाफ बोलने) के आरोपों में फंसे लोग
- अफगान शरणार्थी जिन्हें पाकिस्तानी अथॉरिटी दबाती है
- बदनामी के आरोपों में फंसे पत्रकार
ईमान का परिवार भी प्रभावशाली है, लेकिन अमीर परिवार से होने के बावजूद उन्होंने अपनी जिंदगी मुश्किल बना ली है क्योंकि वो सत्ता के खिलाफ खड़ी होने से नहीं डरतीं।
पाकिस्तान में सिकुड़ता नागरिक अधिकारों का स्पेस
पाकिस्तान में संविधान में बदलाव और जल्दबाजी में पास किए गए कानूनों ने राजनीतिक और नागरिक अधिकारों को कमजोर कर दिया है। ईमान के एक क्लाइंट, पत्रकार असद अली तूर कहते हैं, “ईमान राज्य के लिए निरंतर एक चुनौती है। वो हर उस व्यक्ति की पैरवी करती है जो राज्य की ज्यादतियों का शिकार है।”
पाकिस्तान जैसे देश में जहां महिलाओं की कामकाजी भागीदारी वैसे ही बेहद कम है, एक महिला का इस तरह से अपनी आवाज उठाना और भी चुनौतीपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर भी होता है उत्पीड़न
ईमान को केवल अदालतों और सरकारी दबाव का ही सामना नहीं करना पड़ता। सोशल मीडिया पर उन्हें लिंग-आधारित अपमानजनक टिप्पणियों (Sexist Comments) और फोटोशॉप्ड तस्वीरों का भी सामना करना पड़ता है।
पाकिस्तान जैसे रूढ़िवादी समाज में, जहां महिलाओं को अक्सर दबाया जाता है, ईमान का यह संघर्ष और भी कठिन हो जाता है।
सेना ने भी लगाए आरोप
जनवरी 2026 में पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईमान की एक X (ट्विटर) पोस्ट दिखाई और उन्हें “आतंकवाद फैलाने वाला” कहा।
उन्होंने आरोप लगाया, “यह लोकतंत्र और मानव अधिकारों के नाम पर छिपे हुए अपराध करते हैं।”
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की सैन्य स्थापना ने ईमान को निशाना बनाया है। उनकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ उनके खिलाफ मुकदमों की लिस्ट भी लंबी होती गई। उन पर साइबर टेररिज्म और नफरत फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान
अपनी सारी मुश्किलों के बावजूद, ईमान को उनकी हिम्मत और ईमानदारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 2025 में उन्हें World Expression Forum से Young Inspiration Award से सम्मानित किया गया।
यह पुरस्कार उन युवाओं को दिया जाता है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए निडरता से आवाज उठाते हैं।
पीछे नहीं हटने का संकल्प
ईमान और उनके पति ने स्पष्ट कर दिया है कि वो रुकने वाले नहीं हैं। ईमान कहती हैं, “हम इस देश में गैरकानूनी तरीके से जेल जाने वाले लोगों के लिए लड़ेंगे और हम लड़ते रहेंगे।”
यह बयान केवल एक वकील का नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान का है जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होने के लिए अपनी आजादी तक की कुर्बानी देने को तैयार है।
जानें पूरा मामला
ईमान मज़ारी का मामला पाकिस्तान में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति की ओर इशारा करता है। जहां एक तरफ देश लोकतंत्र का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ असहमति की आवाज उठाने वालों को चुप कराया जा रहा है।
ईमान जैसे वकील जो कमजोर वर्गों – बलूचों, अल्पसंख्यकों, अफगान शरणार्थियों और पत्रकारों – के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। उनका अपराध केवल इतना है कि वो सत्ता से सवाल पूछती हैं और उन लोगों की मदद करती हैं जिनके पास अपनी आवाज नहीं है।
पाकिस्तान में रहने वाले आम नागरिकों पर इसका सीधा असर यह है कि यदि कोई व्यक्ति अपने अधिकारों की बात करता है या गलत के खिलाफ खड़ा होता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। यह माहौल डर और खामोशी का है, जहां सच बोलना एक अपराध बन गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पाकिस्तानी ह्यूमन राइट्स वकील ईमान मज़ारी और उनके पति हादी अली चट्ठा को 10 साल की जेल की सजा मिली
- आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर राज्य विरोधी (Anti-State) सामग्री पोस्ट की
- ईमान बलूच समुदाय, अल्पसंख्यकों, पत्रकारों और शरणार्थियों के लिए मुफ्त में कानूनी लड़ाई लड़ती हैं
- पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता ने उन्हें “आतंकवाद फैलाने वाला” करार दिया
- 2025 में उन्हें World Expression Forum से Young Inspiration Award मिला
- अदालत में भी ईमान ने कहा कि वो सच की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगी








