Hydrogen Train India : भारत के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। हरियाणा में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने जा रही है, जो जींद से सोनीपत के बीच दौड़ेगी। यह ट्रेन डीज़ल की जगह हाइड्रोजन फ्यूल पर चलेगी और करीब 89 किलोमीटर का सफर सिर्फ एक घंटे में पूरा करेगी। इस पहल का मकसद पर्यावरण संरक्षण के साथ यात्रियों को तेज, सस्ती और आधुनिक रेल सेवा देना है।

कौन, कब, कहाँ और क्या
हरियाणा में भारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने जा रहा है। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चलेगी और 89 किमी की दूरी लगभग 1 घंटे में तय करेगी। यह भारत में ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
जींद से सोनीपत तक बदलेगा सफर का अनुभव
यह हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद जंक्शन से अपनी यात्रा शुरू करेगी और रास्ते में छह स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें जिन सिटी, पांडुपिंडारा जंक्शन, बंबेवा, गोहाना जंक्शन, मोहाना और अंत में सोनीपत जंक्शन शामिल हैं। यह रूट खासतौर पर रोजाना अपडाउन करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और व्यापारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा।

समय की बचत और सड़क यातायात पर असर
अभी इसी रूट पर डीएमयू ट्रेन से सफर करने में करीब 2 घंटे लगते हैं, जबकि सड़क मार्ग से लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है। हाइड्रोजन ट्रेन के शुरू होने से यह सफर सिर्फ एक घंटे में पूरा होगा। इससे न सिर्फ यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि सड़क पर वाहनों का दबाव भी कम होगा।
किराया कितना होगा? आम यात्रियों के लिए बड़ी राहत
यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल किराए को लेकर है। इस हाइड्रोजन ट्रेन का न्यूनतम किराया सिर्फ ₹5 रखा गया है, जबकि अधिकतम किराया ₹25 तक होगा। स्टेशन के हिसाब से किराया इस प्रकार तय किया गया है—
- जिन सिटी: ₹5
- पांडुपिंडारा: ₹5
- बंबेवा: ₹10
- गोहाना जंक्शन: ₹15
- मोहाना: ₹20
- सोनीपत जंक्शन: ₹25
रेलवे अधिकारियों के अनुसार टिकट व्यवस्था डीएमयू ट्रेनों की तरह ही होगी।

पर्यावरण के लिए क्यों खास है यह ट्रेन
यह ट्रेन पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें डीज़ल या किसी भी तरह के जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल नहीं होगा। इसके चलते कार्बन उत्सर्जन शून्य रहेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ऐसी ट्रेनें बड़े पैमाने पर चलाई जाती हैं, तो रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तकनीक और क्षमता की पूरी जानकारी
यह दुनिया की सबसे लंबी 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन है। इसकी कुल शक्ति 2400 किलोवाट है और अधिकतम गति 140 किमी प्रति घंटा तक है। एक बार में यह ट्रेन करीब 2500 यात्रियों को ले जा सकती है। 360 किलो हाइड्रोजन में यह लगभग 180 किलोमीटर का सफर तय कर सकती है। तुलना करें तो डीज़ल ट्रेन को 1 किलोमीटर चलने में करीब 4.5 लीटर डीज़ल की जरूरत पड़ती है।
भारत में बनी, भारत के लिए
इस हाइड्रोजन ट्रेन को पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। इसके कोच इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई में बनाए गए हैं और इसका परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस पूरी परियोजना पर करीब ₹82 करोड़ की लागत आई है, जिसे रेलवे भविष्य की स्वच्छ परिवहन व्यवस्था में निवेश मान रहा है।
जानें पूरा मामला
हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां यह तकनीक व्यावहारिक रूप से अपनाई गई है। जींद–सोनीपत रूट पर चलने वाली यह ट्रेन सिर्फ एक नई सेवा नहीं, बल्कि भारतीय रेल यात्रा के भविष्य की झलक मानी जा रही है।

मुख्य बातें (Key Points)
- हरियाणा में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू
- जींद से सोनीपत तक 89 किमी का सफर सिर्फ 1 घंटे में
- न्यूनतम किराया ₹5, अधिकतम ₹25
- शून्य कार्बन उत्सर्जन, पूरी तरह ग्रीन ट्रांसपोर्ट








